‘प्रगति पोर्टल’ से ‘बॉटल नेक स्टेट’ से ‘ब्रेकथ्रू’ राज्य बना उत्तर प्रदेश : आदित्यनाथ

'प्रगति पोर्टल' से 'बॉटल नेक स्टेट' से 'ब्रेकथ्रू' राज्य बना उत्तर प्रदेश : आदित्यनाथ

  •  
  • Publish Date - January 13, 2026 / 03:04 PM IST,
    Updated On - January 13, 2026 / 03:04 PM IST

लखनऊ, 13 जनवरी (भाषा) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा शुरू किये गये ‘प्रगति पोर्टल’ जैसे माध्यमों से परियोजनाओं की समयबद्ध निगरानी के चलते उत्तर प्रदेश क्रियान्वयन के मामले में ‘बॉटलनेक स्टेट’ से ‘ब्रेकथ्रू’ राज्य बन चुका है।

मुख्यमंत्री ने परियोजनाओं एवं जन शिकायतों की त्वरित समीक्षा और समाधान के लिये राष्ट्रीय स्तर पर बनाये गये पोर्टल ‘प्रो एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन’ (प्रगति) के बारे में जानकारी देते हुए संवाददाताओं को बताया, ”प्रगति पोर्टल के माध्यम से परियोजनाओं की समीक्षा की जाती है। यही वजह है कि अब उत्तर प्रदेश परियोजनाओं के क्रियान्वयन की दिशा में बॉटलनेक (प्रगति को मंद करने वाला) नहीं रहा बल्कि वह ब्रेकथ्रू (बड़ी बाधाओं को पार करने वाला) राज्य बन गया है।”

आदित्यनाथ ने कहा कि ‘प्रगति’ जैसे मंच ने केंद्र और राज्यों के बीच संवाद को सुगम बनाकर ‘टीम इंडिया’ की भावना को और अधिक प्रभावी बनाया है। यही वजह है कि अब समस्या पर नहीं बल्कि समाधान पर चर्चा होती है।

प्रगति पोर्टल को वर्ष 2015 में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के एक हिस्से के रूप में शुरू किया गया था। इस पोर्टल का प्रबंधन प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा किया जाता है। इसका उद्देश्य एक सुव्यवस्थित समीक्षा प्रक्रिया के माध्यम से परियोजना कार्यान्वयन में व्याप्त खामियों को दूर करना है। यह मंच विभिन्न सरकारी विभागों के बीच संवाद और समन्वय में सुधार के साथ ही देश भर में परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करके शासन को बेहतर बनाने के लिए विकसित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2014 में केन्द्र में नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में सरकार बनने से पहले के हालात का जिक्र करते हुए कहा, ”वर्ष 2014 से पहले एक जकड़न थी। परियोजनाएं स्वीकृत तो होती थीं लेकिन कभी पूरी नहीं हो पाती थीं। आज हर परियोजना के शिलान्यास के साथ उसके पूरे होने की तिथि भी तय हो जाती है। जब परियोजना की प्रगति की निश्चित समय पर समीक्षा होती है तो हमें वह समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ती हुई दिखाई देती है। आज यही प्रगति हमें प्रगति जैसे मंच के माध्यम से देखने को मिल रही है।”

आदित्यनाथ ने प्रगति पोर्टल की शुरुआत का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2003 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी ने ‘स्वागत’ यानी स्टेट वाइड अटेंशन ऑन गवर्नेंस बाई एप्लीकेशन ऑफ़ टेक्नोलॉजी’ पोर्टल तैयार कराया था। उन्होंने कहा कि इसे जन शिकायतों के निवारण के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से तैयार कराया था और प्रगति पोर्टल उसी का एक राष्ट्रीय स्वरूप है।

उन्होंने कहा कि पैमाने और प्रभाव के स्तर पर देखें तो प्रगति के माध्यम से 86 लाख करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को गति मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इनमें से 377 प्रमुख परियोजनाओं की सीधे प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा की जाती है और प्रगति पोर्टल ने आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय क्षेत्रों में और अधिक सकारात्मक शासन को भी एक नई दिशा दी है।

आदित्यनाथ ने कहा, ”उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में अगर हम इस मॉडल (प्रगति पोर्टल) को देखेंगे तो यह वास्तव में गेम चेंजर साबित हुआ है। राज्य में पिछले साढ़े आठ वर्षों के अंदर रेलवे का सबसे बड़ा नेटवर्क बना है, सबसे अधिक शहरों में मेट्रो या कनेक्टिविटी हुई है, देश की पहली अंतर्देशीय जलमार्ग की सुविधा भी उत्तर प्रदेश के अंदर संचालित हो रही है। देश का पहला रोपवे भी उत्तर प्रदेश में ही बन रहा है। यह सभी परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से चल रही हैं क्योंकि प्रगति पोर्टल के माध्यम से उनकी लगातार समीक्षा की जा रही है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की चार लाख 19 हजार करोड रुपए की 65 बड़ी परियोजनाएं प्रगति पोर्टल के तहत आती हैं। इनमें से 26 परियोजनाएं पहले ही शुरू हो चुकी हैं और 39 परियोजनाएं अपने निर्माण के अलग-अलग चरणों में हैं।

उन्होंने कहा कि कुल 10 लाख 48 हजार करोड़ रुपए की 330 परियोजनाओ के साथ उत्तर प्रदेश के पास देश का सबसे बड़ा ‘इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो’ है जिसमें परिवहन, ऊर्जा, शहरी मूलभूत अवसंरचना, स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दो लाख 37 हजार करोड़ रुपए की लागत की 128 परियोजनाएं पहले ही शुरू हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा आठ लाख 11 हजार करोड रुपए की 202 परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि आज प्रतिस्पर्धा के इस युग में जो भी राज्य परियोजनाओं को लाने और विभिन्न मंजूरियां देने में थोड़ी भी लापरवाही करेगा तो स्वाभाविक रूप से निवेशक दूसरे राज्य में चला जाएगा जहां उसे ये सब सुविधाएं आसानी से मिलती हों। उन्होंने कहा कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से निरंतर निगरानी के चलते निवेशक अब आसानी महसूस कर रहे हैं।

भाषा सलीम

मनीषा नरेश

नरेश