शिक्षा के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित करेगा उत्तर प्रदेश: राजनाथ सिंह

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शिक्षा के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित करेगा उत्तर प्रदेश: राजनाथ सिंह

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  • Publish Date - March 13, 2026 / 04:06 PM IST,
    Updated On - March 13, 2026 / 04:06 PM IST

लखनऊ, 13 मार्च (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित करेगा क्योंकि राज्य का ध्यान ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने पर केंद्रित है, जिसके तहत बच्चे सकारात्मक माहौल में पढ़ें और प्रगति करें।

सिंह ने लखनऊ में स्थित सिटी मांटेसरी स्कूल गोल्फ सिटी परिसर के मुख्य भवन के उद्घाटन के अवसर पर कहा, ‘‘यहां के शिक्षण संस्थान न केवल राज्य के छात्रों के लिए, बल्कि पूरे देश के छात्रों के लिए भी आकर्षण के केंद्र बनकर उभरेंगे।’’

उन्होंने कहा कि राज्य का ध्यान केवल स्कूल और कॉलेज खोलने पर नहीं है बल्कि ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने के प्रयासों पर है, जिसमें बच्चे अपनी पढ़ाई के साथ-साथ सीखने के सकारात्मक माहौल में आगे बढ़ सकें।

सिंह ने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि इस प्रकार के समन्वित प्रयासों के कारण उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित करेगा।’’

लखनऊ से सांसद सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश एक व्यापक नजरिए के साथ आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी ने राज्य को पिछले कुछ वर्षों में सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति करते देखा है। बुनियादी ढांचे, निवेश, उद्योग और शिक्षा के क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश ने नयी गति हासिल की है।’’

उन्होंने सावित्रीबाई फुले और ज्योतिबा फुले का उल्लेख करते हुए कहा कि इन दूरदर्शी हस्तियों ने समाज के वंचित वर्गों यानी उन लोगों तक शिक्षा पहुंचाई, जो सामाजिक पायदान के सबसे निचले स्तर पर थे।

उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने यह दिखाया कि समाज में समानता और जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा सबसे प्रभावी साधन है।’’

मंत्री ने कहा, ‘‘भारत, अपने नाम के अनुरूप हमेशा ज्ञान की खोज में लगा रहा है। यदि आप इसका इतिहास देखें, तो प्राचीन काल से लेकर आज तक भारत इस ज्ञान-यात्रा के प्रति दृढ़तापूर्वक समर्पित रहा है।’’

उन्होंने कहा कि भारत की ज्ञान परंपराओं में शिक्षा को कभी केवल जानकारी हासिल करने का साधन नहीं माना गया, बल्कि इसे चरित्र निर्माण का एक महत्वपूर्ण माध्यम समझा गया।

उन्होंने कहा कि जब तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला जैसे महान विश्वविद्यालय फले-फूले, तब दुनिया के दूर-दराज के हिस्सों से छात्र इन प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में पढ़ने के लिए भारत आया करते थे।

सिंह ने कहा, ‘‘आपने संभवतः फाह्यान और ह्वेन सांग के नाम सुने होंगे। ये लोग भी भारत आए थे। उन्होंने यह यात्रा इसलिए की क्योंकि इस भूमि में शिक्षा में न केवल ज्ञान प्राप्त करना शामिल है, बल्कि जीवन मूल्यों का समावेश भी शामिल है।’’

इस अवसर पर सिंह ने यह भी कहा कि डॉ एमएस स्वामीनाथन ने कृषि विज्ञान के अनुप्रयोग के माध्यम से देश को खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. वर्गीस कुरियन ने श्वेत क्रांति के माध्यम से भारत को दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देशों में से एक बना दिया।

डॉ. जेसी बोस का उदाहरण देते हुए सिंह ने कहा, ‘डॉ. जगदीश चंद्र बोस का उदाहरण हमारे सामने है। अपने शुरुआती दिनों में, उनके पास अत्याधुनिक, शानदार या परिष्कृत प्रयोगशालाओं तक पहुंच नहीं थी। फिर भी, उनके भीतर की जिज्ञासा की भावना ने आज उन्हें विज्ञान की दुनिया में अमर बना दिया।’

उन्होंने कहा, ‘इन सभी उदाहरणों में एक समान सूत्र चलता है: सबसे पहले, उन्होंने ज्ञान प्राप्त किया, और बाद में, उन्होंने उस ज्ञान को समाज के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। यही शिक्षा का असली उद्देश्य है कि एक व्यक्ति अपने ज्ञान का उपयोग न केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए, बल्कि समाज की उन्नति के लिए भी करता है।” यह शिक्षा का यही लोकाचार है जो स्वाभाविक रूप से बच्चों में जिज्ञासा और पूछताछ की भावना को बढ़ावा देता है। यह उनके विचारों को विकसित करता है, और उन्हें आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरित करता है।’

उन्होंने स्कूल की नयी परिभाषा देते हुए कहा कि स्कूल सिर्फ ज्ञान देने की जगह नहीं है, बल्कि यह चरित्र निर्माण की प्रयोगशाला भी है।

उन्होंने कहा, ”यह एक ऐसी जगह है जहां न केवल गणित, विज्ञान या भाषाएं पढ़ाई जाती हैं, बल्कि जीवन के मूल्य भी सिखाए जाते हैं।”

उन्होंने कहा कि हमारे बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ चरित्र निर्माण पर भी ध्यान देना होगा।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का असली उद्देश्य किसी व्यक्ति के लिए अपने ज्ञान का उपयोग न केवल अपने लाभ के लिए, बल्कि समाज की प्रगति के लिए भी करना है।

सिंह ने कहा, ‘बच्चे निश्चित रूप से स्कूल में अपनी पढ़ाई करते हैं, लेकिन उनका व्यक्तित्व घर पर बनता है। स्कूल उन्हें ज्ञान, अनुशासन और अनुभव प्रदान करता है, जबकि घर उन्हें जीवन का अनुभव, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्य देता है।’

उन्होंने कहा कि अच्छी नौकरी, आकर्षक वेतन पैकेज, या किसी प्रतिष्ठित संस्थान में प्रवेश पाना ही जीवन में संपूर्ण सफलता नहीं है।

सिंह ने कहा, ‘सच्ची सफलता तब मिलती है जब कोई व्यक्ति अपने ज्ञान और विचारों के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सक्षम होता है: बच्चों को न केवल अंक हासिल करने के लिए, बल्कि जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करना आवश्यक है।’

भाषा

अरूनव जफर सिम्मी जोहेब

जोहेब