दाखिल-खारिज से पहले जमाबंदी का सरकारी भूमि अभिलेखों से मिलान किया जाएगा: बिहार के मंत्री

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दाखिल-खारिज से पहले जमाबंदी का सरकारी भूमि अभिलेखों से मिलान किया जाएगा: बिहार के मंत्री

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  • Publish Date - June 22, 2026 / 03:45 PM IST,
    Updated On - June 22, 2026 / 03:45 PM IST

पटना, 22 जून (भाषा) बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने सोमवार को कहा कि राज्य में सरकारी भूमि की सुरक्षा और भूमि अभिलेखों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए दाखिल-खारिज के प्रत्येक मामले के निष्पादन से पहले संबंधित जमाबंदी का सरकारी भूमि अभिलेखों से अनिवार्य रूप से मिलान किया जाएगा।

जायसवाल ने कहा कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के इस कदम का उद्देश्य सरकारी भूमि पर गलत तरीके से जमाबंदी कायम होने की संभावना को समाप्त करना और सरकारी संपत्तियों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा, ‘‘कई मामलों में यह पाया गया है कि दाखिल-खारिज की प्रक्रिया के दौरान सरकारी भूमि से संबंधित अभिलेखों का समुचित मिलान नहीं किये जाने के कारण भविष्य में विवाद उत्पन्न होते हैं और सरकारी भूमि पर गलत जमाबंदी कायम होने की आशंका बनी रहती है। अब ऐसी किसी भी चूक की संभावना को समाप्त करने के लिए विभागीय स्तर पर स्पष्ट व्यवस्था लागू की गई है।’’

जायसवाल ने कहा कि विभाग द्वारा बिहारभूमि पोर्टल के ई-जमाबंदी मॉड्यूल में सरकारी भूमि के डिजिटलीकरण, प्रविष्टि और सत्यापन के लिए आवश्यक तकनीकी प्रावधान पहले ही किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि खतियान और सरकारी भूमि पंजी के आधार पर चिह्नित सभी सरकारी भूमि से संबंधित जमाबंदियों की सूची अंचल अधिकारियों को उपलब्ध करा दी गई है।

उन्होंने कहा कि इससे किसी भी दाखिल-खारिज आवेदन के निष्पादन से पहले संबंधित भूमि का ऑनलाइन सत्यापन और मिलान करना आसान हो गया है।

मंत्री ने बताया कि विभागीय समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कुछ स्थानों पर दाखिल-खारिज के मामलों में सरकारी भूमि से संबंधित अभिलेखों का मिलान नहीं किया जा रहा था।

उन्होंने कहा कि इसे गंभीरता से लेते हुए सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने स्तर से अंचल अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित करें कि प्रत्येक दाखिल-खारिज आवेदन का निष्पादन सरकारी भूमि की उपलब्ध सूची से जांच और मिलान के बाद ही किया जाए।

भाषा

कैलाश सुभाष

सुभाष

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