वेनेजुएला में मादुरो की सरकार गिरने के बाद क्यूबा के भविष्य को लेकर उठ रहे सवाल

वेनेजुएला में मादुरो की सरकार गिरने के बाद क्यूबा के भविष्य को लेकर उठ रहे सवाल

वेनेजुएला में मादुरो की सरकार गिरने के बाद क्यूबा के भविष्य को लेकर उठ रहे सवाल
Modified Date: January 6, 2026 / 09:47 am IST
Published Date: January 6, 2026 9:47 am IST

हवाना, छह जनवरी (एपी) वेनेजुएला में हुए अमेरिकी हमले में 32 क्यूबाई सुरक्षा अधिकारियों की मौत के बाद क्यूबा में सोमवार को झंडे झुकाकर शोक मनाया गया। इस हमले के बाद क्यूबाई नागरिकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी का उनके देश के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा।

दोनों देशों की सरकारों के बीच इतने करीबी रिश्ते हैं कि क्यूबाई सैनिक और सुरक्षा एजेंट अक्सर वेनेजुएला के राष्ट्रपति के अंगरक्षक होते थे और वेनेजुएला के पेट्रोलियम आयात से क्यूबा की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को कई वर्षों तक सहारा मिलता रहा है।

क्यूबाई अधिकारियों ने सप्ताहांत में कहा कि 32 सुरक्षा अधिकारी इस हमले में मारे गए लेकिन इसके बारे में और कोई विवरण नहीं दिया गया।

 ⁠

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि मादुरो को हटाने से दशकों पुराने एक और लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी और वह है क्यूबा की सरकार को नुकसान पहुंचाना।

क्यूबा को वेनेजुएला से अलग करने से उसके नेताओं के लिए भयानक परिणाम हो सकता है।

शनिवार को ट्रंप ने कहा कि क्यूबा की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था मादुरो की विदाई के बाद और अधिक बदतर हो जाएगी।

कई पर्यवेक्षकों का कहना है कि एक करोड़ की आबादी वाले क्यूबा ने तेल संसाधनों से संपन्न वेनेजुएला पर असाधारण प्रभाव डाला है। वेनेजुएला की जनसंख्या क्यूबा से तीन गुणा अधिक है।

वहीं क्यूबा के लोग लंबे समय से लगातार बिजली कटौती और बुनियादी खाद्य सामग्रियों की कमी से परेशान हैं। इस हमले के बाद वे एक ऐसे भविष्य की आशंका से जूझ रहे हैं जिसकी पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।

क्यूबा की नागरिक बर्ता लूज सिएरा मोलीना (75) ने कहा, ‘मैं बात नहीं कर सकती। मेरे पास शब्द नहीं हैं।”

देश की एक अन्य 63 वर्षीय नागरिक रेगिना मेंडेज ने कहा, ‘हमें मजबूत रहना होगा।’

क्यूबा के ऊर्जा विशेषज्ञ जॉर्ज पिनोन ने बताया कि मादुरो की सरकार पिछले तीन महीनों में औसतन 35,000 बैरल तेल क्यूबा को भेज रही थी जो कुल मांग का लगभग एक चौथाई है।

उन्होंने कहा, ‘एक सवाल है, जिसका हमारे पास कोई जवाब नहीं है। वह यह है कि क्या अमेरिका वेनेजुएला को क्यूबा को तेल निर्यात करने की अनुमति देगा?’

पिनोन ने बताया कि एक समय मेक्सिको क्यूबा को रोजाना 22,000 बैरल तेल भेजता था, लेकिन जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सितंबर में मेक्सिको सिटी का दौरा किया, तो यह घटकर 7,000 बैरल रह गया।

पिनोन ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि इस समय मेक्सिको क्यूबा की मदद करेगा।”

वाशिंगटन में अमेरिकन यूनिवर्सिटी के क्यूबाई अर्थशास्त्री रिकार्डो टोरेस ने कहा, ‘बिजली कटौती काफी हो रही है। ऐसा तब है जब वेनेजुएला कुछ मात्रा में तेल भेज रहा है।’

उन्होंने कहा, ‘अब सोचिए, अगर निकट भविष्य में यह आपूर्ति रुक जाए। तो यह एक आपदा होगी।’

पिनोन ने बताया कि क्यूबा के पास अंतरराष्ट्रीय बाजार से तेल खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं।

उन्होंने कहा, ‘उनके पास जो आखिरी सहयोगी बचा है वह रूस है।”

पिनोन ने बताया कि रूस क्यूबा को सालाना लगभग 20 लाख बैरल तेल भेजता है।

उन्होंने कहा, ‘रूस के पास यह अंतर पाटने की क्षमता है। क्या उनके पास राजनीतिक प्रतिबद्धता है या राजनीतिक इच्छा है, मैं नहीं जानता।”

टोरेस ने भी यह सवाल उठाया कि क्या रूस क्यूबा की मदद करेगा।

उन्होंने कहा, ‘क्यूबा के मामले में हस्तक्षेप करने से यूक्रेन के मुद्दे पर अमेरिका से बातचीत खतरे में पड़ सकती है। वह (रूस) ऐसा क्यों करेगा? यूक्रेन कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है।”

टोरेस ने यह भी कहा कि क्यूबा को अपने निजी क्षेत्र और बाजार को खोलना चाहिए और सार्वजनिक क्षेत्र पर खर्च को कम करना चाहिए, ताकि चीन क्यूबा की मदद के लिए आगे आ सके।

एपी जोहेब सिम्मी

सिम्मी


लेखक के बारे में