राष्ट्रपति शी की यात्रा से पहले भारतीय राजदूत ने भारत-चीन के बीच स्थिर, दोस्ताना संबंध पर जोर दिया

राष्ट्रपति शी की यात्रा से पहले भारतीय राजदूत ने भारत-चीन के बीच स्थिर, दोस्ताना संबंध पर जोर दिया

राष्ट्रपति शी की यात्रा से पहले भारतीय राजदूत ने भारत-चीन के बीच स्थिर, दोस्ताना संबंध पर जोर दिया
Modified Date: September 10, 2026 / 08:56 pm IST
Published Date: September 10, 2026 8:56 pm IST

(केजेएम वर्मा)

बीजिंग, 10 सितंबर (भाषा) भारतीय राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने भारत और चीन के बीच स्थिर, अनुमान लगाने योग्य और मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया है, क्योंकि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग इस हफ्ते होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए नयी दिल्ली जाने वाले हैं।

करीब सात साल में शी की यह भारत की पहली यात्रा होगी। उनके 12-13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ बैठक करने की भी उम्मीद है।

सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ में छपे एक लेख में दोरईस्वामी ने कहा, ‘‘दुनिया की सर्वाधिक आबादी वाली दो उभरती अर्थव्यवस्थाओं के तौर पर, भारत और चीन के बीच स्थिर, भरोसेमंद और मैत्रीपूर्ण संबंध न सिर्फ हमारे 2.8 अरब लोगों के हित में है, बल्कि एशिया और पूरी दुनिया में शांति, स्थिरता और खुशहाली के लिए भी जरूरी है।’’

उन्होंने कहा कि भारत और चीन, दोनों की इसमें दिलचस्पी है कि वैश्विक शासन के ढांचे ऐसे विकसित हों जो विकासशील देशों की आकांक्षाओं और हितों को दर्शाएं, क्योंकि एशिया और व्यापक अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य तेजी से बहुध्रुवीय होते जा रहे हैं।

दोरईस्वामी ने बुधवार रात अखबार के वेब संस्करण में प्रकाशित एक लेख में कहा कि नयी दिल्ली में इस हफ्ते होने वाला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत-चीन सहयोग को और प्रगाढ़ करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘यह साझा हित ब्रिक्स जैसे मंचों पर ठोस रूप में दिखाई देता है। ब्रिक्स, सतत विकास और वित्तीय ढांचा से लेकर प्रौद्योगिकी सहयोग तक और जन केंद्रित विकास जैसे मुद्दों पर, उभरती अर्थव्यवस्थाओं की एक मजबूत आवाज है।’’

भारतीय राजदूत ने कहा, ‘‘भारत की मेजबानी में होने वाले इस ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को ध्यान में रखते हुए, हमारे पास व्यापार और कनेक्टिविटी से लेकर जलवायु कार्रवाई, सार्वजनिक स्वास्थ्य और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे पारस्परिक हित के मुद्दों पर चीन-भारत सहयोग को और प्रगाढ़ करने का एक बेहतरीन मौका है। साथ ही, हम एक अधिक संतुलित, समावेशी और न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था बनाने में भी रचनात्मक योगदान दे सकते हैं।’’

उन्होंने कहा कि पिछले साल राष्ट्रपति शी ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा था कि चीन और भारत सहयोग साझेदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं, और ये दोनों देश एक-दूसरे के लिए खतरा नहीं, बल्कि विकास के अवसर हैं।

शी और मोदी पिछले साल चीन के शहर तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में मिले थे।

भारतीय राजदूत ने कहा, ‘‘यह दृष्टिकोण हमारी दोनों सभ्यताओं के बीच पारस्परिक लाभ वाले संपर्कों के लंबे इतिहास के अनुरूप है। चीन-भारत सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता इस साझेदारी के लिए एक जरूरी आधार प्रदान करती है।’’

उन्होंने कहा, “हमें परस्पर सम्मान, संवेदनशीलता और पारस्परिक हितों को ध्यान में रखते हुए उस आधार को और मजबूत करना चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि राष्ट्रों के बीच स्वाभाविक रूप से होने वाले मतभेद विवादों में न तब्दील हों। ऐसा करके, हमारी साझेदारी दोनों देशों के लोगों की भलाई और एक अधिक स्थिर, शांतिपूर्ण और समृद्ध विश्व के निर्माण में योगदान दे सकती है।’’

शी ने पिछली बार 2019 में चेन्नई के निकट स्थित मामल्लपुरम में मोदी के साथ शिखर बैठक के लिए भारत का दौरा किया था।

भाषा सुभाष सुरेश

सुरेश


लेखक के बारे में