इस्लामाबाद, 28 अगस्त (भाषा) पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की हालिया ईरान यात्रा के दौरान क्षेत्रीय तनाव कम करने, सैन्य गतिरोध समाप्त करने और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने पर चर्चा हुई। विदेश कार्यालय ने इसकी जानकारी दी।
विदेश कार्यालय का यह स्पष्टीकरण उन दावों के बीच आया है कि जिसमें कहा गया है कि मुनीर ने अमेरिका के ‘‘दूत’’ के तौर पर पड़ोसी देश की यात्रा की थी।
विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंदराबी ने बृहस्पतिवार को कहा कि मुनीर की तेहरान यात्रा ‘‘पूरी तरह पाकिस्तान की मध्यस्थ की भूमिका के संदर्भ और पृष्ठभूमि में’’ हुई थी।
उन्होंने कहा, ‘‘यह दावा भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत है कि मुनीर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप या अमेरिका के दूत के तौर पर ईरान गए थे।’’
मुनीर ने सोमवार को ईरान के नेताओं के साथ पश्चिम एशिया में संघर्ष को और बढ़ने से रोकने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के उपायों पर ‘‘व्यापक चर्चा’’ की थी। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी उनके साथ तेहरान गए थे।
अंदराबी ने साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यात्रा के दौरान हुई चर्चा ‘‘क्षेत्रीय तनाव कम करने, सैन्य गतिरोध खत्म करने और शांति एवं स्थिरता बहाल करने के लिए बातचीत के जरिए समाधान तलाशने’’ पर केंद्रित थी।
उन्होंने कहा कि यह यात्रा वाशिंगटन और तेहरान के बीच मतभेद कम करने में पाकिस्तान की ‘‘ईमानदार और रचनात्मक भूमिका’’ को दर्शाती है। उनके अनुसार, ईरानी नेतृत्व ने तनाव कम करने और संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान तलाशने के पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना की।
अंदराबी ने कहा, ‘‘पाकिस्तान पश्चिम एशिया और खाड़ी में संकट तथा अमेरिका-ईरान गतिरोध के समाधान के लिए अपने भाईचारे वाले देशों के साथ मिलकर ईमानदार और समन्वित प्रयासों में लगा हुआ है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान शांति वार्ता को फिर से शुरू करने और संघर्ष के व्यापक, न्यायसंगत एवं स्थायी समाधान के लिए सभी ईमानदार प्रयासों का समर्थन करता रहेगा।’’
इस्लामाबाद अमेरिका-ईरान के बीच रुकी हुई शांति वार्ता को फिर से शुरू कराने और मध्यस्थता के प्रयासों को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू किए थे, जिसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की। इससे महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही प्रभावित हुई और पेट्रोलियम की कीमतों में बढ़ोतरी हुई।
अप्रैल में अमेरिका-ईरान संघर्ष खत्म करने के लिए युद्धविराम की घोषणा की गई थी। हालांकि, बाद में शांति प्रक्रिया पटरी से उतर गई और इसे फिर से शुरू नहीं किया जा सका।
पाकिस्तान की गारंटी वाले अंतरिम शांति समझौते की प्रक्रिया भी जुलाई में उस समय बाधित हो गई जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के साथ अमेरिका और ईरान ने फिर से सैन्य हमले शुरू कर दिए। वार्ता बहाल कराने के पाकिस्तान के प्रयासों का अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।
तेहरान यात्रा के दौरान मुनीर और नकवी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, सर्वोच्च नेता के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में प्रतिनिधि मोहसिन रेजाई, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ, विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी से बातचीत की।
ईरान के साथ व्यापार के बारे में पूछे जाने पर अंदराबी ने कहा कि पाकिस्तान द्विपक्षीय व्यापार समझौतों का पालन कर रहा है और तेहरान के साथ व्यापार उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के ढांचे से बाहर लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध करता है और उम्मीद करता है कि अमेरिका-ईरान गतिरोध के व्यापक समाधान के तहत आर्थिक मुद्दों का भी समाधान किया जाएगा।
प्रेस वार्ता के दौरान अंदराबी ने भारत के पूर्व प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) अनिल चौहान के उस बयान को भी खारिज किया जिसमें उन्होंने मई 2025 के संघर्ष के दौरान भारतीय ‘लॉइटरिंग म्यूनिशन’ के सरगोधा के पास किरणा हिल्स से टकराने की बात कही थी।
‘लॉइटरिंग म्यूनिशन’ एक ऐसा मानवरहित हथियार है जो किसी इलाके के ऊपर कुछ समय तक उड़ते हुए लक्ष्य की तलाश या पुष्टि कर सकता है और फिर लक्ष्य पर जाकर विस्फोट कर देता है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम किरणा हिल्स के संबंध में भारत के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के बाद में किए गए दावों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं। 2025 के सैन्य संघर्ष के दौरान पाकिस्तान में किसी रणनीतिक संपत्ति या संवेदनशील बुनियादी ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचा था।’’
भारत ने 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में मई 2025 में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकवादी ठिकानों पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत हमले किए थे। भारत के अनुसार, इन हमलों में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे।
भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष के दौरान भारतीय हमलों में सरगोधा स्थित एक हवाई अड्डा भी निशाना बना था। ऐसी खबरें आई थीं कि यह अड्डा किरणा हिल्स में स्थित एक भूमिगत परमाणु भंडारण केंद्र से जुड़ा हुआ है।
मंगलवार को नयी दिल्ली में ‘ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद’ विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व सीडीएस चौहान ने कहा कि भारतीय बलों ने किरणा हिल्स को ‘‘निशाना नहीं बनाया था’’। उन्होंने कहा कि सरगोधा की ओर बड़ी संख्या में ‘लॉइटरिंग म्यूनिशन’ भेजे गए थे और हो सकता है कि उनमें से एक अपनी संचालन क्षमता खोने के बाद नीचे आकर किसी पहाड़ी से टकरा गया हो।
अफगानिस्तान के मुद्दे पर अंदराबी ने कहा कि पाकिस्तान काबुल के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी तंत्र की सफलता ‘‘सिर्फ आश्वासनों के बजाय ठोस कार्रवाई’’ पर निर्भर करेगी।
उन्होंने कहा कि काबुल को अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का सम्मान करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) जैसे आतंकवादी संगठनों द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ न किया जाए।
अंदराबी ने यह भी कहा कि सोमवार से किर्गिस्तान के बिश्केक में शुरू होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद के शिखर सम्मेलन के बाद पाकिस्तान एक साल के लिए संगठन की अध्यक्षता संभालेगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और अगले साल एससीओ शिखर सम्मेलन इस्लामाबाद में आयोजित किया जाएगा।
भाषा मनीषा रंजन
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