(जेनिफर लेवासियूर, स्मिथसोनियन इन्स्टीट्यूशन के नेशनल एयर एंड स्पेस म्यूजियम में क्यूरेटर)
लंदन, 13 अप्रैल (द कन्वरसेशन) अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के इतिहास में अब तक शोधकर्ताओं के पास अंतरिक्ष यात्राओं की कहानी बताने के लिए दस्तावेज, कलाकृतियां और तस्वीरों का बड़ा भंडार मौजूद रहा है। हालांकि, चंद्रमा के चारों ओर आर्टेमिस द्वितीय मिशन के पूरा होने के बाद अंतरिक्ष का एक नया और ताजा दृश्य सामने आया है।
मिशन के दौरान ही पृथ्वी पर भेजी गई डिजिटल तस्वीरें दल के अनुभवों की आधुनिक झलक पेश करती हैं। 1972 में अपोलो 17 के बाद जन्मी पीढ़ियों के लिए, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में इस मिशन की वास्तविकता पर विश्वास करना मुश्किल हो सकता है।
हालांकि, यह मिशन वास्तविक था और इसमें शामिल चार अंतरिक्ष यात्री – रीड वाइजमेन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैन्सेन अपनी यात्रा की कहानी उन तस्वीरों के जरिए बता सकते हैं, जो अब नासा के पास सुरक्षित हैं।
मानव अंतरिक्ष उड़ान के दृश्य इतिहास का अध्ययन करने वाले विशेषज्ञों के लिए चंद्रमा पर वापसी की तस्वीरों का लंबे समय से इंतजार था। अपोलो युग के बाद अंतरिक्ष यात्रा की तस्वीरें मुख्य रूप से स्पेस शटल प्रक्षेपण, अंतरिक्ष स्टेशन और मंगल रोवर तक सीमित रही थीं।
आर्टेमिस-द्वितीय की तस्वीरों में अपोलो जैसी कालजयी झलक तो है ही, लेकिन आधुनिक उपकरणों के कारण वे अधिक स्पष्ट, साफ और उच्च गुणवत्ता वाली हैं। इनसे अंतरिक्ष यात्रा अधिक भव्य, साहसिक और आकर्षक दिखाई देती है।
जेनरेशन ‘एक्स’ के कई लोगों की तरह, अपोलो मिशनों की प्रत्यक्ष स्मृति न होने के कारण अंतरिक्ष से जुड़ी यादें अन्य घटनाओं—जैसे स्पेस शटल ‘चैलेंजर’ दुर्घटना, 1998 में जॉन ग्लेन की वापसी उड़ान और हब्बल टेलिस्कोप से ली गई गहरे अंतरिक्ष की तस्वीरों—तक सीमित रही हैं।
इंटरनेट और सोशल मीडिया की बदौलत इन तस्वीरों ने बहुत कम समय में प्रतीकात्मक (आइकॉनिक) रूप ले लिया और इन्हें पहले के अन्वेषण अभियानों की तस्वीरों के संदर्भ में भी देखा गया।
फोटोग्राफी की तैयारी
मिशन के दल ने निकोन के डिजिटल कैमरों और आईफोन के साथ कई सप्ताह का प्रशिक्षण लिया। यह तकनीक अपोलो 17 के दौरान इस्तेमाल किए गए 1960 के दशक के 35 मिमी कैमरों की तुलना में कहीं अधिक उन्नत है।
नासा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर इस्तेमाल किए जाने वाले निकोन डी5 कैमरे को प्राथमिकता देता रहा है और इसी भरोसेमंद तकनीक का उपयोग आर्टेमिस-द्वितीय मिशन में भी किया गया।
इस मिशन में इस्तेमाल किया गया ओरियन अंतरिक्षयान आकार में बड़ा है और इसमें पहले की तुलना में अधिक खिड़कियां और कैमरे लगाए गए हैं। इसकी छह में से पांच खिड़कियों पर लाइव-स्ट्रीमिंग कैमरे लगे थे, जो चंद्रमा के पास से गुजरने के दृश्य रिकॉर्ड कर रहे थे।
चंद्रमा के चारों ओर व्यापक दूरी से गुजरने के कारण अंतरिक्ष यात्रियों को एक नजर में चंद्रमा की सतह का अधिक हिस्सा देखने का अवसर मिला। उन्हें भूवैज्ञानिकों और वैज्ञानिकों के साथ विशेष प्रशिक्षण दिया गया था, ताकि वे संभावित लैंडिंग स्थलों, क्रेटरों और अन्य विशेषताओं की पहचान कर सकें।
नई और रोमांचक तस्वीरें
मिशन के दौरान दल ने ‘अर्थसेट’ (पृथ्वी का अस्त) और सूर्य ग्रहण जैसे दुर्लभ दृश्यों को कैद करने की तैयारी की थी।
1968 में अपोलो 8 द्वारा लोकप्रिय बनाई गई ‘अर्थराइज’ छवि इस बार चंद्रमा की स्थिति के कारण उसी रूप में दिखाई नहीं दी। हालांकि, मिशन के शुरुआती चरण में पृथ्वी की एक नई ऐतिहासिक छवि सामने आई, जिसने अपोलो युग की यादें ताजा कर दीं।
1972 में हैरिसन स्मिथ द्वारा ली गई ‘ब्लू मार्बल’ तस्वीर अंतरिक्ष युग की सबसे प्रसिद्ध तस्वीरों में से एक बनी थी और इसे 20वीं सदी की प्रतिष्ठित छवियों में गिना जाता है।
अब 2026 में ली गई नई तस्वीर पृथ्वी को एक अलग दृष्टिकोण से दिखाती है—जहां चंद्रमा की रोशनी में पृथ्वी, उसका वायुमंडल और ध्रुवीय ज्योति (ऑरोरा) स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
हालांकि, आज के डिजिटल और छवि-संपादन के युग में इन नई तस्वीरों को पहले जैसी व्यापक पहचान मिलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। फिर भी, आर्टेमिस-द्वितीय से प्राप्त शुरुआती तस्वीरें इस मिशन की विशाल दृश्य सामग्री का केवल एक छोटा हिस्सा हैं। आधुनिक मेमोरी कार्ड की क्षमता के कारण इस मिशन में ली गई तस्वीरों की संख्या अपोलो 17 के दौरान ली गई लगभग 4,000 तस्वीरों से कहीं अधिक हो सकती है।
आने वाले हफ्तों और महीनों में जैसे-जैसे ये तस्वीरें सार्वजनिक डाटाबेस में जुड़ेंगी, आर्टेमिस द्वितीय मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए एक नई दृष्टि के रूप में उभरेगा और अपोलो मिशनों की विरासत को आगे बढ़ाएगा।
(द कन्वरसेशन) मनीषा वैभव
वैभव