वेंस के नेतृत्व में बातचीत ने ईरान के साथ सद्भाव का माहौल बनाया : खबर

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वेंस के नेतृत्व में बातचीत ने ईरान के साथ सद्भाव का माहौल बनाया : खबर

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  • Publish Date - April 13, 2026 / 11:42 AM IST,
    Updated On - April 13, 2026 / 11:42 AM IST

(सागर कुलकर्णी)

वाशिंगटन, 13 अप्रैल (भाषा) ईरान के साथ शांति के लिए अमेरिका के उप राष्ट्रपति जे डी वेंस की अगुवाई में हुई बातचीत भले ही नाकाम रही हो, लेकिन 21 घंटे तक हुई वार्ता से तेहरान में नए नेतृत्व के साथ सद्भाव का माहौल बनाने में मदद मिली है।

‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने अमेरिकी अधिकारियों का नाम बताए बिना उनके हवाले से कहा कि इस्लामाबाद में बातचीत के दौरान बने सद्भाव के माहौल ने वाशिंगटन को यह यकीन दिलाया है कि ईरान इस खतरनाक लड़ाई को खत्म करने के लिए उनकी शर्तें मान सकता है।

इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नाकाबंदी की घोषणा ईरान को एक समझौते के लिए मजबूर कर सकती है।

खबर में कहा गया है, ‘‘बातचीत की जानकारी रखने वाले एक अमेरिकी अधिकारी, जिन्होंने बंद कमरे में हुई बातचीत पर नाम न बताने की शर्त पर चर्चा की, ने कहा कि वेंस को बातचीत शुरू करने से पहले अमेरिका और ईरान के बीच अविश्वास और गलतफहमी के खतरे का अच्छी तरह पता था।’’

अधिकारी ने कहा कि वेंस और ईरान के वार्ताकार एक-दूसरे के साथ सहज हो गए थे।

ट्रंप भी इस बात से सहमत दिखे। उन्होंने ‘फॉक्स न्यूज’ के ‘संडे मॉर्निंग फ्यूचर्स’ को बताया, “हमारी बहुत गहरी बातचीत हुई, और आखिर में, यह बहुत दोस्ताना हो गई।”

उन्होंने कहा, “और हमें लगभग हर वह चीज मिल गई जिसकी हमें जरूरत थी, सिवाय इस बात के कि वे अपनी परमाणु महत्वाकांक्षा को छोड़ने से इनकार कर रहे हैं।”

‘द वाशिंगटन पोस्ट’ की खबर में कहा गया है कि बातचीत शुरू होने के बाद अमेरिका की टीम को यह साफ हो गया था कि ईरानियों को ट्रंप प्रशासन के इस बात पर जोर देने के दूरगामी असर पूरी तरह से समझ नहीं आए कि कोई भी समझौता ईरान को कभी भी परमाणु शस्त्र हासिल करने से रोकने पर केंद्रित होना चाहिए।

ईरान दशकों से इस बात पर जोर देता रहा है कि उसका परमाणु हथियार बनाने का कोई इरादा नहीं है। ट्रंप और उनके सहयोगियों, जिसमें इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी शामिल हैं, का दावा है कि ईरान की इस बात को सिर्फ मुंहजबानी सच नहीं माना जा सकता।

प्रशासन का कहना है कि ईरान को अपनी परमाणु संवर्धन क्षमता पूरी तरह से छोड़ देनी चाहिए, जिसका इस्तेमाल असैन्य कार्यों के लिए भी किया जा सकता है। ईरान ने इस स्तर पर जाने से इनकार कर दिया है और ऐसा लगता है कि उसे उम्मीद है कि ट्रंप इससे कम पर मान जाएंगे।

अधिकारी ने कहा कि वेंस ने बातचीत के दौरान गलतफहमियों को दूर करने की कोशिश की।

भाषा वैभव मनीषा

मनीषा