ऑस्ट्रेलिया: एआई डेटा सेंटर कितना बिजली-पानी इस्तेमाल करेंगे? हमारे पास इसका कोई डेटा नहीं
ऑस्ट्रेलिया: एआई डेटा सेंटर कितना बिजली-पानी इस्तेमाल करेंगे? हमारे पास इसका कोई डेटा नहीं
(माइकल वार्डोन, ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी)
कैनबरा, सात जून (द कन्वरसेशन) ऑस्ट्रेलिया में डेटा सेंटर की बढ़ती तादाद अब खनन उद्योग में तेजी को टक्कर दे रही है। ‘ओपनएआई’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैम ऑल्टमैन ने पिछले सप्ताह कहा था कि ऑस्ट्रेलिया ‘दुनिया की डेटा सेंटर राजधानी’ बन सकता है।
हालांकि, इसकी कीमत पर्यावरण को चुकानी पड़ेगी। पानी का इस्तेमाल चिंता का एक आम विषय है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, एआई सेंटर प्रति वर्ष अरबों लीटर पानी का उपयोग कर सकते हैं।
लेकिन आंकड़े क्या कहते हैं?
अगर पानी की मात्रा के हिसाब से बात करें, तो प्रति मेगालीटर (एक लाख लीटर) से प्राप्त होने वाले नतीजों के आधार पर डेटा सेंटर कम खतरनाक और पानी का अधिक किफायती इस्तेमाल करने वाले प्रतीत होते हैं।
बड़ी समस्या ऊर्जा और स्थान से जुड़ी है।
एक नयी रिपोर्ट के मुताबिक, डेटा सेंटर में बिजली की मांग नवीकरणीय स्रोतों से मिलने वाली स्वच्छ ऊर्जा से अधिक हो सकती है और इसके परिणामस्वरूप नये गैस संयंत्र स्थापित करने पड़ सकते हैं।
पूरी तरह से आश्वस्त होने से पहले हमें इन सेंटर में उपयोग किए जाने वाले पानी और ऊर्जा की मात्रा का विस्तृत विवरण चाहिए।
पानी की कितनी खपत
वित्तीय वर्ष 2023-24 में ऑस्ट्रेलियाई उद्योगों ने लगभग 1.76 करोड़ मेगालीटर पानी की खपत की, जो सिडनी हार्बर में मौजूद जल की मात्रा से लगभग 30 गुना अधिक है। इसमें से कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन ने कुल खपत का लगभग दो-तिहाई हिस्सा यानी 1.18 करोड़ मेगालीटर पानी इस्तेमाल किया।
इस जल का उपयोग ऐसी वस्तुओं के उत्पादन में किया गया, जिनका मूल्य 54.6 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर था और उपभोग किए गए प्रत्येक मेगालीटर जल पर लगभग 4,600 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर मूल्य का उत्पादन हुआ।
इसकी तुलना ‘अन्य उद्योगों’ से करने पर सामने आया कि डेटा सेंटर में प्रति मेगालीटर पानी का मूल्य 23 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर था, जो किसी कृषि क्षेत्र में उपयोग किए जाने वाले जल के मूल्य से 500 गुना अधिक है।
डेटा सेंटर कितना पानी इस्तेमाल करते हैं?
स्पष्ट आंकड़ों की कमी के कारण हम पानी की खपत का केवल एक मोटा अनुमान ही लगा सकते हैं।
शोध में सामने आया कि डेटा सेंटर को प्रति मेगावाट क्षमता के लिए लगभग 25 मिलीलीटर (मिली) पानी की आवश्यकता होती है।
ऑस्ट्रेलिया में लगभग 300 डेटा सेंटर हैं, जिनकी परिचालन क्षमता लगभग 1.3 गीगावाट है।
इन आंकड़ों के आधार पर, ऑस्ट्रेलिया के वर्तमान डेटा सेंटर प्रति वर्ष 15,000-35,000 मिलीलीटर पानी का इस्तेमाल करते हैं। यह देशभर में उपयोग किए जाने वाले पानी का एक प्रतिशत से भी कम है।
तीन चेतावनियों पर ध्यान देने की जरूरत
पहली बात, पानी के उपयोग के विश्वसनीय अनुमानों में काफी भिन्नता पाई जाती है।
दूसरी बात, अधिकांश अनुमान केवल शीतलन के लिए सीधे उपयोग किए गए पानी की गणना करते हैं।
डेटा सेंटर पानी का काफी कम उपयोग करते हैं और अधिक कुशल होते जा रहे हैं, लेकिन डेटा सेंटर बिजली उत्पादन में उपयोग होने वाले पानी के रूप में अप्रत्यक्ष रूप से काफी अधिक पानी का उपयोग करते हैं।
कोयला, गैस और जल विद्युत संयंत्रों को पानी की आवश्यकता होती है।
तीसरी बात, प्रस्तावित नये डेटा सेंटर मौजूदा डेटा सेंटर की तुलना में बहुत बड़े हैं।
कुछ डेटा सेंटर प्रतिदिन पांच से 40 मिलीलीटर तक पानी की मांग कर रहे हैं।
सिडनी में एआई डेटा सेंटर में भारी वृद्धि होने की संभावना है।
अगर निर्माणाधीन या मूल्यांकन के अधीन सभी 41 परियोजनाएं बन जाती हैं, तो एक दशक के भीतर सिडनी की जल आपूर्ति का 15-20 प्रतिशत सीधे उपयोग डेटा सेंटर करेंगे।
जल से कहीं अधिक चिंता का विषय ऊर्जा
वर्तमान में डेटा सेंटर राष्ट्रीय विद्युत बाजार में उपयोग होने वाली बिजली का केवल दो प्रतिशत से थोड़ा अधिक इस्तेमाल करते हैं।
ऑस्ट्रेलियाई ऊर्जा बाजार संचालक के पूर्वानुमानों के अनुसार, यह आंकड़ा चार वर्षों के भीतर लगभग तीन गुना बढ़कर छह प्रतिशत हो जाएगा।
स्वच्छ ऊर्जा वित्त निगम का अनुमान है कि एक दशक के भीतर यह आंकड़ा 11 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
ऊर्जा का उपयोग अपने आप में बुरा नहीं है।
महत्वपूर्ण यह है कि बढ़ती मांग को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरा किया जाएगा या गैस से।
जल उपयोग पर बेहतर नजर रखने की आवश्यकता
ऑस्ट्रेलिया के जल लेखा-जोखा प्रत्येक उद्योग द्वारा उपयोग किए जाने वाले जल की मात्रा को मापते हैं।
लेकिन वे वाष्पीकरण से होने वाली जल हानि या उपयोग किए गए जल के मूल्य का हिसाब नहीं रखते।
राष्ट्रीय लेखा-जोखा के सबसे विस्तृत विवरण में भी जल आपूर्ति और सीवरेज को एक साथ शामिल किया गया है, जिसका अर्थ है कि इनमें से किसी को भी स्पष्ट रूप से नहीं देखा जा सकता।
कृत्रिम मेधा पर नजर रखने का समय
मौजूदा आंकड़ों के आधार पर, हम कह सकते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में डेटा सेंटर की बढ़ती मांग न तो पानी की बर्बादी का उतना बड़ा कारण है, जितना कुछ लोग आशंका जताते हैं और न ही वह चमत्कार है, जैसा इसके समर्थक बताते हैं।
इसके बजाय, यह एक उच्च मूल्य वाला उद्योग प्रतीत होता है, जो रिकॉर्ड गति से आगे बढ़ रहा है, पानी का अपेक्षाकृत कम उपयोग करता है और ऊर्जा का काफी अधिक इस्तेमाल करता है।
द
कन्वरसेशन जितेंद्र पारुल
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