आर्मीनिया से जंग में अजरबैजान ने की हदें पार.. लोगों पर बरसा रहा क्लस्टर बम
आर्मीनिया से जंग में अजरबैजान ने की हदें पार.. लोगों पर बरसा रहा क्लस्टर बम
अजरबैजान। आर्मीनिया और अजरबैजान में जंग के बीच अब अजरबैजान की क्रूरता भी सामने आई है। अजरबैजान की सेना दुनियाभर में प्रतिबंधित कलस्टर बमों का इस्तेमाल कर रही है। यही नहीं कई बम तो नागरिकों की रिहाइश वाले इलाके में गिरे हैं। इस जंग में अब तक कम से कम 266 लोग मारे गए हैं और इसमें 45 आम नागरिक शामिल हैं।
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आर्मीनिया के मुताबिक कि अजरबैजान के सैनिक तोपों और रॉकेट से स्टेपनकर्ट को निशाना बना रहे हैं। उधर, अजरबैजान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि आर्मीनियाई सुरक्षा बल उसके गांजा शहर को निशाना बनाने के बाद अब तीन अन्य कस्बों में बमबारी कर रहे हैं। तमाम अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के बाद भी दोनों में से कोई भी पक्ष झुकने को तैयार नहीं दिख रहा है। स्टेपनकर्ट में करीब 50 हजार लोग रहते हैं और यह शहर भारी बमबारी से धुएं और राख से भरता जा रहा है। सड़कों पर रॉकेट और क्लस्टर बम पडे़ हैं। आम नागरिकों को जमीन के अंदर बने शेल्टर के अंदर अपनी जिंदगी बितानी पड़ रही है।
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नागोरनो-काराबाख इलाके में मौजूद पश्चिमी पत्रकारों ने इसकी पुष्टि की है कि अजरबैजान की सेना बेहद घातक क्लस्टर बमों का इस्तेमाल कर रही है। इन बमों में से निकले बिना फटे छोटे-छोटे बम नागोरनो-काराबाख की राजधानी स्टेपनकर्ट में बिखरे देखे जा सकते हैं। नागोरनो-काराबाख के अधिकारियों का कहना है कि इस जंग में उसके अब तक 220 सैनिक मारे जा चुके हैं। वहीं आर्मीनिया सरकार का दावा है कि 21 आम नागरिक अजरबैजान के हमले में मारे गए हैं और 82 अन्य बुरी तरह से घायल हो गए हैं।
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अजरबैजान के अधिकारियों ने अभी अपने सैनिकों के मारे जाने का ब्योरा नहीं दिया है। हालांकि उसने बताया कि अब तक 25 आम नागरिक मारे गए हैं और 127 अन्य घायल हो गए हैं। बता दें कि दुनिया के 109 देशों ने कई साल तक नुकसान पहुंचाने वाले क्लस्टर बम के इस्तेमाल पर बैन लगा दिया है।
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अभी तक न तो आर्मीनिया और न ही अजरबैजान ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में अजरबैजान के क्लस्टर बम से आने वाले समय में गलती से बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे जाएंगे। बताया जा रहा है कि अजरबैजान को हथियारों की आपूर्ति इजरायल और तुर्की कर रहे हैं।

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