बलूच नेता ने बीएलए को ‘आतंकवाद’ से जोड़ने के लिए ऑस्ट्रेलिया की कड़ी आलोचना की
बलूच नेता ने बीएलए को ‘आतंकवाद’ से जोड़ने के लिए ऑस्ट्रेलिया की कड़ी आलोचना की
लंदन/नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) बलूचिस्तान आंदोलन के एक वरिष्ठ नेता ने ऑस्ट्रेलियाई सरकार के बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) को आतंकवाद से जोड़ने के फैसले के औचित्य पर सवाल उठाया है।
प्रमुख बलूच कार्यकर्ताओं में से एक मीर यार बलूच ने ऑस्ट्रेलिया को चुनौती दी कि वह बीएलए के हमले का कोई सबूत पेश करे।
उन्होंने आरोप लगाया है कि संगठन को “आतंकी” घोषित करना पाकिस्तानी लामबंदी और दुष्प्रचार का परिणाम है।
मीर यार बलोच ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “न्याय, लोकतंत्र और मानवीय गरिमा को महत्व देने वाले राष्ट्र के रूप में, ऑस्ट्रेलिया के पास न केवल कब्जा करने वाले पाकिस्तान की आवाज सुनने का नैतिक अवसर है, बल्कि उन उत्पीड़ित लोगों की आवाज भी सुनने का अवसर है जो मान्यता, सम्मान और शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपने भविष्य का निर्धारण करने के अधिकार की मांग कर रहे हैं।”
पिछले सप्ताह, ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने कथित तौर पर “आतंकवादी हमलों में शामिल होने और उनका समर्थन करने” के आरोप में बीएलए पर आतंकवाद रोधी वित्तपोषण प्रतिबंध लगाए।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार द्वारा जारी एक बयान में बीएलए को एक ऐसे समूह के रूप में वर्णित किया गया है जिसने पूरे पाकिस्तान में हिंसक आतंकवादी हमले किए हैं।
यह दावा करते हुए कि बलूचिस्तान कभी स्वेच्छा से पाकिस्तान का हिस्सा नहीं था, मीर यार बलूच ने भारत सहित वैश्विक समुदाय से “बलूच राष्ट्र” के साथ औपचारिक राजनयिक और आर्थिक संबंध स्थापित करने की अपील की।
उन्होंने कहा, “विश्व को बलूचिस्तान के पासपोर्ट, मुद्रा और राष्ट्रीय संस्थानों की अंतरराष्ट्रीय मान्यता के लिए कानूनी और राजनयिक रास्ते बनाने होंगे।”
बलूच नेता ने “अलगाववादी” शब्द को राजनीतिक रूप से अप्रासंगिक बता खारिज करते हुए तर्क दिया कि कोई उस राष्ट्र से अलग नहीं हो सकता जिसका वह कानूनी रूप से कभी हिस्सा नहीं था।
पाकिस्तान का सबसे बड़ा और सबसे गरीब प्रांत बलूचिस्तान दशकों से चले आ रहे सशस्त्र विद्रोह का सामना कर रहा है, जिसका नेतृत्व जातीय बलूच अलगाववादियों ने किया है, जिन्होंने उत्पीड़न का आरोप लगाया है और अधिक स्वायत्तता तथा स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों में बड़ा हिस्सा दिये जाने की मांग की है।
गहरी जड़ें जमा चुकी अभाव की भावना ने लंबे समय से चल रही अशांति को हवा दी है। बलूच लिबरेशन आर्मी, जो प्रमुख बलूच विद्रोही समूहों में से एक है, ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर कई घातक हमलों की जिम्मेदारी ली है।
भाषा प्रशांत मनीषा
मनीषा

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