बांग्लादेश: हसीना का पूर्व आधिकारिक आवास ‘संग्रहालय’ बना; ‘जुलाई जन विद्रोह दिवस’ मनाया गया

बांग्लादेश: हसीना का पूर्व आधिकारिक आवास 'संग्रहालय' बना; 'जुलाई जन विद्रोह दिवस' मनाया गया

बांग्लादेश: हसीना का पूर्व आधिकारिक आवास ‘संग्रहालय’ बना; ‘जुलाई जन विद्रोह दिवस’ मनाया गया
Modified Date: August 5, 2026 / 05:23 pm IST
Published Date: August 5, 2026 5:23 pm IST

ढाका, पांच अगस्त (भाषा) देशभर में कड़ी सुरक्षा के बीच, बांग्लादेश सरकार ने 2024 के सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा के पीड़ितों की याद में बुधवार को एक स्मारक संग्रहालय का उद्घाटन किया। इन प्रदर्शनों के कारण ही शेख हसीना की सरकार गिर गई थी।

प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने ‘गणभवन’ में ‘जुलाई जन विद्रोह स्मारक संग्रहालय’ का उद्घाटन किया। हसीना के शासनकाल के दौरान ‘गणभवन’ प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास हुआ करता था। दो साल पहले पांच अगस्त को ही शेख हसीना देश छोड़कर भारत चली गई थीं और संग्राहलय का उद्घाटन आज ही के दिन हुआ है।

संग्रहालय की पट्टिका का अनावरण करते हुए रहमान ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा, ‘‘फासीवाद विरोधी आंदोलन के दौरान हत्याएं करने वालों पर कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय तरीके से मुकदमा चलाया जाएगा।’’

इस दौरान अंतरिम सरकार के पूर्व प्रमुख मोहम्मद यूनुस भी उनके साथ मौजूद थे।

प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि सरकारी संस्थानों का नाम इस विद्रोह में मारे गए कार्यकर्ताओं और 2009 से हसीना की अवामी लीग के शासनकाल के दौरान मारे गए लोगों के नाम पर रखा जाएगा।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की फरवरी 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल 15 जुलाई से 15 अगस्त के बीच 1,400 लोग मारे गए थे। इस अवधि को ‘जुलाई विद्रोह’ के रूप में जाना जाता है, जब हसीना सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों के जरिये कार्रवाई का आदेश दिया था।

नौकरियों में विवादित आरक्षण प्रणाली को लेकर सरकार के खिलाफ हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद पांच अगस्त 2024 को हसीना भारत चली गईं, जिसके तीन दिन बाद मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में कार्यभार संभाला था।

यूनुस सरकार द्वारा गठित एक विशेष न्यायाधिकरण ने नवंबर 2025 में ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ और ‘नरसंहार’ के आरोपों में हसीना को उनकी अनुपस्थिति में फांसी की सजा सुनाई थी। उनके अंतरिम शासन ने एक कार्यकारी आदेश के तहत हसीना की अवामी लीग पार्टी पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।

रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सरकार ने 12 फरवरी के चुनावों के बाद भी इस फैसले का समर्थन किया था।

सरकारी समाचार एजेंसी ‘बांग्लादेश संवाद संस्था’ (बीएसएस) के अनुसार, बांग्लादेश पांच अगस्त को ‘जुलाई जन विद्रोह दिवस’ के रूप में मना रहा है।

भाषा सुमित सुरेश

सुरेश


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