बांग्लादेश ने सीमा पर हुई ‘हत्याओं’ को मानवाधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन करार दिया
बांग्लादेश ने सीमा पर हुई ‘हत्याओं’ को मानवाधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन करार दिया
ढाका, 17 जून (भाषा) बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने बुधवार को संसद में कहा कि सीमा पर भारतीय सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की कथित कार्रवाइयों के कारण होने वाली मौतें ‘‘मानवाधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन’’ हैं।
अहमद ने कहा कि नयी दिल्ली में बीएसएफ के साथ हाल में हुई महानिदेशक स्तर की वार्ता के दौरान बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) ने यह मुद्दा उठाया था।
उन्होंने संसद में कहा, ‘‘बीएसएफ द्वारा निर्दोष बांग्लादेशी नागरिकों की हत्या बेहद अफसोसनाक है और यह मानवाधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है।’’ उन्होंने यह भी कहा कि ढाका ने सीमा पर बीएसएफ द्वारा घातक हथियारों के इस्तेमाल का लगातार विरोध किया है।
भारत और बांग्लादेश ने 11 जून को नयी दिल्ली में महानिदेशक स्तर की चार दिन की सीमा वार्ता पूरी की। इसमें बांग्लादेशी नागरिकों द्वारा बीएसएफ जवानों और भारतीय नागरिकों पर हमले तथा बांग्लादेशियों द्वारा सीमा पर लगी बाड़ को तोड़ने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
भारत का लंबे समय से यह कहना रहा है कि बीएसएफ द्वारा सीमा पर गोलीबारी आत्मरक्षा में की जाती है और यह तस्करी, घुसपैठ और मानव तस्करी जैसे अपराधों का नतीजा है।
भारत और बांग्लादेश के बीच 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा है – जिसका आधे से अधिक हिस्सा पश्चिम बंगाल में पड़ता है।
अहमद ने बुधवार को कहा कि बांग्लादेश ने द्विपक्षीय बैठकों में आत्मरक्षा के नाम पर बीएसएफ द्वारा घातक हथियारों के इस्तेमाल पर बार-बार कड़ी आपत्ति जताई है और ऐसी घटनाओं के लिए मुआवजे और जवाबदेही को लेकर दबाव बनाया है।
अहमद ने सीमा पर भारत द्वारा बांग्लादेशी नागरिकों को जबरन वापस भेजे जाने के अभियान की भी आलोचना की और कहा कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के बाद से बीजीबी ने बीएसएफ की ऐसी 36 कोशिशों को रोका है।
उन्होंने कहा कि 5 अगस्त 2024 से बीएसएफ द्वारा बांग्लादेश भेजे गए 2,369 लोगों में से कुल 2,175 को संबंधित पुलिस थानों के हवाले कर दिया गया, 11 लोगों को वापस बीएसएफ को सौंप दिया गया और 183 लोगों को वापस भेज दिया गया।
भाषा सुभाष पवनेश
पवनेश

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