यूक्रेन में युद्ध के बीच बचाए गए चमगादड़ों को छोड़ दिया गया
यूक्रेन में युद्ध के बीच बचाए गए चमगादड़ों को छोड़ दिया गया
कीव, छह अप्रैल (एपी) कड़ाके की ठंड के बाद यूक्रेन के लोग युद्ध प्रभावित इलाकों से बचाए गए चमगादड़ों को अब छोड़ रहे हैं।
राजधानी कीव के बाहरी इलाके में स्थित एक नेचर पार्क में रात ढलते ही बच्चे स्वयंसेवकों के आसपास इकट्ठा हो जाते हैं, जो कपड़े के थैलों को सावधानीपूर्वक खोलकर चमगादड़ों को अंधेरे आसमान में उड़ने के लिए छोड़ते हैं।
प्रत्येक चमगादड़ के हवा में उड़ान भरने पर वहां मौजूद 1,000 से अधिक लोग तालियां बजाकर उसका स्वागत करते हैं।
देश के पूर्वी हिस्सों के युद्धग्रस्त क्षेत्रों से बचाए गए सैकड़ों चमगादड़ों को शनिवार देर रात यूक्रेन के विभिन्न हिस्सों में आयोजित कार्यक्रमों के तहत छोड़ा गया, जो वसंत ऋतु के आगमन के साथ आयोजित किए गए थे।
‘यूक्रेनियन बैट रिहैबिलिटेशन सेंटर’ की स्वयंसेवक अनास्तासिया वोव्क ने कहा कि यह कार्यक्रम संगठन के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ये जीव संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची में शामिल हैं और उनका संरक्षण बेहद जरूरी है।
यूक्रेन में चमगादड़ों की सभी 28 प्रजातियों को इनकी घटती संख्या के कारण संरक्षित जीवों की सूची में रखा गया है।
कई लोगों के लिए यह कार्यक्रम कड़ी सर्दियों के बाद राहत का अवसर था। सर्दियों में शून्य से नीचे तापमान, रूस के ड्रोन और मिसाइल हमले तथा बिजली कटौती जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा था।
कार्यक्रम के दौरान कई बच्चों ने चमगादड़ ‘थीम’ वाली टी-शर्ट और टोपी पहन रखी थी। स्वयंसेवकों ने चमगादड़ों को चिमटी की मदद से खाद्य सामग्री खिलाई और फिर उन्हें छोड़ दिया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध के कारण इंसानों के साथ-साथ जानवर भी प्रभावित हुए हैं। गोलाबारी से इमारतों के नष्ट होने से चमगादड़ों के आश्रय खत्म हो जाते हैं और विस्फोटों से वे भयभीत हो जाते हैं।
कार्यक्रम का नेतृत्व करने वाली अलोना शुलेनको ने बताया कि प्राकृतिक आश्रय स्थल खत्म होने के कारण चमगादड़ शहरों में इमारतों की दरारों और बालकनियों में रहने लगते हैं, लेकिन इन स्थानों की मरम्मत या विनाश से चमगादड़ एक तरह से बेघर हो जाते हैं।
सभी यूक्रेनी चमगादड़ प्रजातियां कीटभक्षी हैं और कानूनी रूप से संरक्षित हैं।
चैरिटी संगठन के अनुसार, अब तक 30,000 से अधिक चमगादड़ों को बचाया गया है, जिनमें से 4,000 को पिछली सर्दियों में बचाया गया।
एपी मनीषा अमित
अमित

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