नेपाल में बाढ़ के बाद भोटेकोशी नदी का जलस्तर फिर बढ़ा, मृतकों की संख्या 700 के पार

नेपाल में बाढ़ के बाद भोटेकोशी नदी का जलस्तर फिर बढ़ा, मृतकों की संख्या 700 के पार

नेपाल में बाढ़ के बाद भोटेकोशी नदी का जलस्तर फिर बढ़ा, मृतकों की संख्या 700 के पार
Modified Date: August 30, 2026 / 12:48 pm IST
Published Date: August 30, 2026 12:48 pm IST

काठमांडू, 30 अगस्त (भाषा) नेपाल में विनाशकारी आकस्मिक बाढ़ के कुछ दिन बाद रविवार को भोटेकोशी नदी का जलस्तर फिर बढ़ गया जिसके बाद बाढ़ प्रभावित जिलों में रहने वाले लोगों और बचावकर्मियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ में मरने वालों की संख्या रविवार को 700 के पार पहुंच गई, जबकि करीब 2,500 लोग अब भी लापता हैं।

माना जा रहा है कि यह आपदा नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट हिमनद के टूटने के बाद हिमस्खलन जैसी घटना से आई। इसने मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई।

हिमालयी सीमा क्षेत्र से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी बाढ़ के पानी को नीचे की ओर ले गई, जिससे घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए तथा जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा।

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने एक बयान में बताया कि नदी का जलस्तर फिर बढ़ गया है।

प्राधिकरण ने रविवार को कहा, ‘‘बाढ़ प्रभावित भोटेकोशी नदी का जलस्तर फिर बढ़ गया है। सभी संबंधित लोगों से एहतियाती कदम उठाने का आग्रह किया जाता है।’’

एनडीआरआरएमए ने कहा कि और जानकारी मिलने पर स्थिति के बारे में सूचना दी जाएगी।

बारिश रुक-रुक कर होने और नदियों का जलस्तर बढ़ने के बीच नेपाल में शव मिलने का सिलसिला जारी है। खोज और बचाव अभियान भी लगातार संचालित किया जा रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, इस आपदा के बाद करीब 2,500 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 320 विदेशी नागरिक शामिल हैं। इस आपदा में चीन की ओर भी सात लोगों की मौत हुई है, जबकि 500 से अधिक लोग लापता हैं।

नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि बाढ़ के बाद 275 से अधिक भारतीय और भारतीय मूल के 128 लोग अब भी लापता हैं या उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है, जबकि 108 अन्य लोगों को बचा लिया गया है।

इस बीच, नेपाल सरकार ने खोज और बचाव अभियान के लिए करीब 20,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है। फंसे लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर लगातार उड़ानें भर रहे हैं।

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने शनिवार को बताया कि 4,500 से अधिक लोगों को बचाया जा चुका है और खोज तथा पुनर्वास अभियान जारी है। उन्होंने कहा कि देश अब भी “हाई अलर्ट” पर है।

नेपाल के मौसम विभाग ने शनिवार को बाढ़ प्रभावित इलाकों में फिर से गरज के साथ बारिश की चेतावनी दी थी। इससे जारी बचाव और राहत कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई गई।

राजधानी काठमांडू को पोखरा और पश्चिमी नेपाल से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण पृथ्वी राजमार्ग पर यातायात रोक दिया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, कृष्णभीर में त्रिशूली नदी के तेज बहाव से सड़क का एक हिस्सा बह गया है। उन्होंने कहा कि राजमार्ग को दोबारा खोलने में समय लगेगा और लोगों से वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की अपील की गई है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजना स्थलों पर सैकड़ों श्रमिकों के फंसे होने की आशंका है। नेपाली सुरक्षा बल अब तक 191 श्रमिकों को बचा चुके हैं, जबकि कई लोगों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है।

भारत की 11 सदस्यीय टीम फंसे हुए श्रमिकों के बचाव अभियान में सहायता कर रही है।

नेपाल सेना के सूत्रों के अनुसार, त्रिशूली जलविद्युत परियोजना स्थल पर भारतीय सुरंग विशेषज्ञों की मदद से नेपाली सुरक्षाकर्मी सुरंग में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। शनिवार आधी रात के बाद भी भारी बारिश के बावजूद सुरंग का प्रवेश द्वार तलाशने का काम जारी रहा।

एनडीआरआरएमए के अनुसार, भोटेकोशी बाढ़ में घायल हुए 242 लोगों को शनिवार शाम तक अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल, बीर अस्पताल और धुंचे स्थित रसुवा जिला अस्पताल शामिल हैं।

गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, नेपाल सरकार ने प्रभावित लोगों के लिए रसुवा और नुवाकोट जिलों में 1 करोड़ नेपाली रुपये, धादिंग में 50 लाख नेपाली रुपये और विभिन्न नगरपालिकाओं को 6.75 करोड़ नेपाली रुपये की नकद सहायता वितरित की है।

अब तक प्रभावित क्षेत्रों में खाद्य सामग्री से भरे 37 ट्रक और खाद्य एवं अन्य राहत सामग्री लेकर सात हेलीकॉप्टर भेजे गए हैं। रसुवा के उत्तरगया और धुंचे में दो टन खाद्य सामग्री पहुंचाई गई है।

भारतीय दूतावास के अनुसार, भारत ने भी 68.5 टन राहत सामग्री उपलब्ध कराई है और खोज एवं बचाव अभियान में सहायता के लिए तकनीकी दल, फॉरेंसिक विशेषज्ञ तथा उपकरण भेजे हैं।

भाषा शोभना वैभव

वैभव


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