हमास हमले के दोषियों को मृत्युदंड देने के लिए विशेष न्यायाधिकरण के गठन संबंधी विधेयक को मंजूरी

हमास हमले के दोषियों को मृत्युदंड देने के लिए विशेष न्यायाधिकरण के गठन संबंधी विधेयक को मंजूरी

हमास हमले के दोषियों को मृत्युदंड देने के लिए विशेष न्यायाधिकरण के गठन संबंधी विधेयक को मंजूरी
Modified Date: May 12, 2026 / 02:03 pm IST
Published Date: May 12, 2026 2:03 pm IST

यरूशलम, 12 मई (एपी) इजराइल के सांसदों ने एक विशेष न्यायाधिकरण की स्थापना के प्रावधान वाले विधेयक को सोमवार को मंजूरी दे दी, जिसे हमास के नेतृत्व में 2023 के हमले में शामिल दोषी फलस्तीनियों पर मुकदमा चलाने और उन्हें मौत की सजा सुनाने का अधिकार होगा।

हमास के हमले के बाद ही गाजा में युद्ध छिड़ा था।

यह विधेयक 120 सीट वाली संसद (नेसेट) में 93-0 के मत से पारित हुआ, जो इजराइल के इतिहास में हुए सबसे घातक हमले के लिए जिम्मेदार पाए गए लोगों को दंडित करने के लिए व्यापक समर्थन को दर्शाता है।

शेष 27 सांसद अनुपस्थित थे या उन्होंने मतदान में भाग नहीं लिया।

मानवाधिकार समूहों ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा है कि यह मृत्युदंड को लागू करना बहुत आसान बना देता है, साथ ही निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार की रक्षा करने वाली प्रक्रियाओं को भी समाप्त कर देता है।

अभियुक्त अपनी सजा के खिलाफ अपील कर सकते हैं, लेकिन इसकी सुनवाई नियमित अपील अदालतों के बजाय एक अलग, विशेष अपील अदालत द्वारा की जाएगी।

यह विधेयक न्यायाधीशों के एक पैनल को बहुमत से मृत्युदंड देने का अधिकार देता है और यह अनिवार्य करता है कि मुकदमे यरुशलम की अदालत में ‘लाइवस्ट्रीम’ के माध्यम से चलाए जाएं। इसी वजह से इसकी तुलना 1962 में नाजी युद्ध अपराधी एडॉल्फ आइचमैन के मुकदमे से की जा रही है, जिसका टेलीविजन पर सीधा प्रसारण किया गया था।

आइचमैन को फंदे पर लटकाकर मौत की सजा दी गई, जो इज़राइल में आखिरी मृत्युदंड था, हालांकि नरसंहार, युद्धकाल में जासूसी और कुछ आतंक अपराधों के लिए तकनीकी रूप से कानूनी किताबों में मृत्युदंड अब भी मौजूद है।

विधेयक के विरोधियों का यह भी कहना है कि दोष सिद्ध होने से पहले कार्यवाही का ‘लाइवस्ट्रीम’ करने से मुकदमे एक तमाशा बन सकते हैं।

एपी यासिर वैभव

वैभव


लेखक के बारे में