कैलोरी कम करने वाली डाइट से घटता है वजन, लेकिन दोबारा बढ़ने का खतरा भी: अध्ययन
कैलोरी कम करने वाली डाइट से घटता है वजन, लेकिन दोबारा बढ़ने का खतरा भी: अध्ययन
(यास्मीन प्रोब्स्ट एवं ओलीविया विल्स- यूनिवर्सिटी ऑफ वोलोंगोंग )
सिडनी, 29 सितंबर (द कन्वरसेशन) वजन घटाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कैलोरी कम करने वाली डाइट काफी लोकप्रिय हुई है। हालांकि, शोध बताते हैं कि ऐसी डाइट से शुरु में वजन घट सकता है, लेकिन लंबे समय तक कम वजन रखना अधिक चुनौतीपूर्ण होता है और कई लोगों का वजन दोबारा बढ़ जाता है।
कैलोरी घटाने वाली डाइट में व्यक्ति अपने भोजन से मिलने वाली ऊर्जा (कैलोरी) की मात्रा कम करता है। इसमें इंटरमिटेंट फास्टिंग (दिन के कुछ निश्चित समय में ही भोजन करना), अल्टरनेट डे फास्टिंग (एक दिन छोड़कर सीमित या बिना कैलोरी का सेवन) और फास्ट 800 जैसी डाइट शामिल हैं, जिनमें तेजी से वजन घटाने के लिए कैलोरी बहुत कम कर दी जाती हैं।
इसका मूल सिद्धांत यह है कि शरीर जितनी ऊर्जा खर्च करता है, उससे कम कैलोरी लेने पर वह जमा वसा का इस्तेमाल करता है, जिससे समय के साथ वजन कम हो सकता है।
हालांकि, ऐसी डाइट हमेशा के लिए नहीं होती। आमतौर पर इसमें कुछ समय तक कैलोरी सीमित करने के बाद ऐसी भोजन शैली अपनाई जाती है, जिससे लंबे समय तक स्वस्थ यानी जरूरत के अनुसार कम वजन बनाए रखा जा सके।
कुछ डाइट में रोजाना 500 से 600 कैलोरी कम लेने की सलाह दी जाती है, जबकि बहुत कम कैलोरी वाली डाइट में पूरे दिन में 800 से कम कैलोरी लेने को कहा जाता है।
बहुत कम कैलोरी वाली डाइट चिकित्सकीय निगरानी में ही अपनाई जाती है। मसलन, किसी सर्जरी से पहले तेजी से वजन कम करने के लिए डॉक्टर ऐसी डाइट की सलाह दे सकते हैं। इसमें यह सुनिश्चित करना जरूरी होता है कि व्यक्ति को पर्याप्त खनिज और विटामिन मिलते रहें।
विभिन्न शोध में लगातार पाया गया है कि कैलोरी कम करने वाली डाइट से वजन और कमर का घेरा घट सकता है।
यह शरीर में रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल के नियंत्रण में भी सुधार कर सकती है, जिससे हृदय रोग का खतरा कम हो सकता है। खासकर ऐसे लोगों में जो अधिक वजन वाले हैं, मोटापे से जूझ रहे हैं या टाइप-2 मधुमेह से पीड़ित हैं।
लेकिन इस संबंध में किए गए अधिकतर अध्ययन केवल 2 से 12 सप्ताह की छोटी अवधि के हैं। वजन कम करने के बाद उसे बनाए रखना अधिक कठिन होता है। कई लोग डाइट खत्म होने के बाद घटा हुआ कुछ या अधिक वजन फिर से हासिल कर लेते हैं।
शोध के अनुसार, लंबे समय तक कैलोरी सीमित रखना केवल इच्छाशक्ति पर निर्भर नहीं करता। अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन के आसानी से उपलब्ध और सस्ता होने के कारण ऐसी डाइट का पालन करना मुश्किल हो सकता है।
इसके अलावा, वजन घटने पर शरीर में कई बदलाव होते हैं। शरीर वजन को वापस बढ़ाने की कोशिश करता है। वजन कम होने के साथ भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन बदल सकते हैं, जिससे भूख बढ़ सकती है।
वहीं, शरीर कम ऊर्जा खर्च करने लगता है और वजन घटने की गति धीमी हो सकती है। इसे सोशल मीडिया पर अक्सर बताए जाने वाले ‘‘स्टारवेशन मोड’’ के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, लेकिन वजन कम होने के बाद ठहराव आना आम बात है।
कई लोगों के लिए लगातार भूख लगना कैलोरी सीमित डाइट छोड़ने का मुख्य कारण बनता है। इससे मूड, नींद और भोजन के साथ संबंध प्रभावित हो सकते हैं।
अगर बिना किसी स्पष्ट कारण के भूख में अचानक बदलाव आए और साथ में चक्कर आना, अत्यधिक थकान या ध्यान केंद्रित करने में परेशानी हो तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
कैलोरी कम करने वाली डाइट अधिक वजन वाले या मोटापे से जूझ रहे लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है। टाइप-2 मधुमेह या गठिया जैसी कुछ बीमारियों में वजन कम करना लाभकारी हो सकता है।
लेकिन यह डाइट गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं, बच्चों और किशोरों (विशेषज्ञ की निगरानी के बिना) तथा खाने से जुड़े विकारों से पीड़ित लोगों के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती।
विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकतर लोगों को केवल कैलोरी तेजी से घटाने के बजाय अपने पूरे आहार में सुधार और लंबे समय तक स्वस्थ आदतें विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।
स्वास्थ्य के लिए अनुकूल वजन बनाए रखने के लिए विशेषज्ञ नमक, अतिरिक्त चीनी और अधिक वसा वाले भोजन को सीमित करने, शराब का सेवन कम करने, भोजन की मात्रा नियंत्रित रखने, नियमित शारीरिक गतिविधि करने, पहले से भोजन की योजना बनाने और भूख तथा पेट भरने के संकेतों पर ध्यान देने की सलाह देते हैं।
आहार विशेषज्ञ पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर युक्त भोजन जैसे सब्जियां, दालें और साबुत अनाज शामिल करने को भी महत्वपूर्ण मानते हैं।
कैलोरी सीमित करने वाली डाइट शुरू करने से पहले किसी मान्यता प्राप्त आहार विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। विशेषज्ञ व्यक्ति की पोषण संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऐसी योजना बनाने में मदद कर सकते हैं, जिससे न केवल वजन कम हो बल्कि उसे लंबे समय तक कम भी रखा जा सके।
द कन्वरसेशन मनीषा नरेश
नरेश

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