युवावस्था में भांग का सेवन मनोविकृति के खतरे को कम नहीं करता, बल्कि शुरुआत जल्द हो सकती है: अध्ययन
युवावस्था में भांग का सेवन मनोविकृति के खतरे को कम नहीं करता, बल्कि शुरुआत जल्द हो सकती है: अध्ययन
( मैथ्यू लार्जेन एवं कार्ली स्टीवेन्स – न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी )
सिडनी, 19 अगस्त (द कन्वरसेशन) भांग यानी कैनाबिस का 20 और 30 की उम्र में सेवन करने वाले लोगों में गैर-उपयोगकर्ताओं की तुलना में मनोविकृति (साइकोसिस) की शुरुआत कई साल पहले ही होने की आशंका होती है। एक नए अध्ययन में यह दावा किया गया है।
‘बायोलॉजिकल साइकियाट्री’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, इससे उस धारणा को चुनौती मिलती है कि 25 की उम्र तक भांग का सेवन शुरू नहीं करने से मनोविकृति के जोखिम से बचा जा सकता है, क्योंकि माना जाता है कि इस उम्र तक मस्तिष्क का विकास पूरा हो जाता है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग मनोविकृति की दृष्टि से संवेदनशील थे, उनमें 30 की उम्र के आसपास भांग का सेवन करने से भी मनोविकृति की शुरुआत करीब 6.3 साल पहले हो गई थी।
भांग का सेवन लगातार आम होता जा रहा है। शोधकर्ताओं के अनुसार, कई उपयोगकर्ताओं में भांग से होने वाले मानसिक स्वास्थ्य संबंधी नुकसान इसके किसी भी चिकित्सकीय लाभ से अधिक हो सकते हैं। चिंता, अवसाद या अनिद्रा के उपचार में इसके प्रभावी होने के बहुत कम प्रमाण हैं।
—– क्या है मनोविकृति —–
मनोविकृति ऐसे विकारों का एक समूह है जिसमें व्यक्ति की वास्तविकता को समझने की क्षमता प्रभावित होती है। इसका गंभीर और लंबे समय तक रहने वाला रूप शिजोफ्रेनिया है।
मनोविकृति से पीड़ित व्यक्ति को भ्रम, मनोदशा में बदलाव और ऐसी चीजें देखने या आवाजें सुनाई देने का अनुभव हो सकता है जो वास्तव में मौजूद नहीं होतीं।
ऑस्ट्रेलिया में करीब 0.5 प्रतिशत लोग मनोविकृति से प्रभावित होते हैं। शिजोफ्रेनिया और मनोविकृति में आनुवंशिक कारकों की मजबूत भूमिका होती है, लेकिन भांग के सेवन जैसे पर्यावरणीय कारक भी प्रभाव डालते हैं।
—– भांग मनोविकृति को कैसे प्रभावित करती है —–
भांग में सबसे सक्रिय घटक डेल्टा-9-टेट्राहाइड्रोकैनाबिनोल (टीएचसी) है। हालांकि, बिना टीएचसी वाली चिकित्सकीय भांग भी उपलब्ध है।
टीएचसी मस्तिष्क में मौजूद कैनाबिनॉयड रिसेप्टर से जुड़कर काम करता है। ये रिसेप्टर शरीर की एंडोकैनाबिनॉयड प्रणाली का हिस्सा हैं, जो भूख, प्रतिरक्षा, स्मृति, मनोदशा, दर्द, नींद और तनाव जैसी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करके शरीर में संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।
पिछले अध्ययनों में पाया गया है कि नियमित रूप से भांग का सेवन करने वाले लोगों में मनोविकृति का अनुभव होने और इसके अधिक गंभीर प्रभावों का खतरा ज्यादा होता है।
शोधकर्ताओं के समूह ने 2011 में भी पाया था कि भांग के सेवन और मनोविकृति की शुरुआत कम उम्र में होने में संबंध है। तब यह माना गया था कि इसका असर मुख्य रूप से युवाओं पर पड़ता है, क्योंकि किशोरावस्था में विकसित हो रहे मस्तिष्क को भांग के प्रभाव के प्रति अधिक संवेदनशील माना जाता था।
—– नए अध्ययन में क्या सामने आया —–
नए अध्ययन ने भांग और मनोविकृति की जल्द शुरुआत के बीच संबंध को अलग और अधिक चिंताजनक तरीके से सामने रखा है।
शोधकर्ताओं ने पिछले 15 वर्षों में किए गए 149 अध्ययनों का विश्लेषण किया, जिनमें 71,000 से अधिक लोग शामिल थे। इनमें से ज्यादातर अध्ययन यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के शिजोफ्रेनिया से पीड़ित लोगों पर किए गए थे।
शोधकर्ताओं ने पाया कि भांग के सेवन का संबंध मनोविकृति की शुरुआत औसतन 2.5 साल पहले होने से है।
देर से शुरू होने वाली मनोविकृति के मामलों में यह संबंध अधिक मजबूत पाया गया। भांग के जिन उपयोगकर्ताओं में 20 से 29 वर्ष की उम्र के दौरान मनोविकृति विकसित हुई, उनमें यह औसतन 4.4 वर्ष पहले शुरू हुई।
30 वर्ष या उससे अधिक उम्र में मनोविकृति विकसित करने वाले लोगों में यह अंतर बढ़कर 6.3 वर्ष से अधिक हो गया।
दिलचस्प बात यह रही कि 20 वर्ष से कम उम्र में मनोविकृति विकसित करने वाले लोगों में इसकी शुरुआत पहले होने का कोई प्रमाण नहीं मिला।
—– अध्ययन के मायने —–
मनोविकृति की जल्द शुरुआत का संबंध खराब चिकित्सकीय परिणामों, अधिक कार्यात्मक अक्षमता और रोजमर्रा की देखभाल में कठिनाइयों से है।
20 या 30 की उम्र में मनोविकृति के कारण स्वस्थ जीवन के कई साल गंवाने का मतलब पढ़ाई, करियर बनाने, यात्रा करने, परिवार शुरू करने और मजबूत रिश्ते तथा सामाजिक सहयोग विकसित करने के अवसर खोना हो सकता है।
—– क्या हो सकता है कारण —–
शोधकर्ताओं के अनुसार, जीवन के अलग-अलग चरणों में भांग का सेवन मनोविकृति के कारण स्वस्थ जीवन के वर्षों में उल्लेखनीय कमी से जुड़ा है।
2011 के अध्ययन में संकेत मिला था कि किशोर मस्तिष्क पर भांग का प्रभाव महत्वपूर्ण तंत्रिका मार्गों को प्रभावित कर सकता है। नया अध्ययन इस संभावना की ओर इशारा करता है कि मस्तिष्क पर भांग के विषैले प्रभाव का लगातार असर भी एक अतिरिक्त कारक हो सकता है।
हालांकि, 20 वर्ष से कम उम्र के लोगों में मनोविकृति की शुरुआत जल्द होने का समान प्रभाव क्यों नहीं मिला, यह स्पष्ट नहीं है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस आयु वर्ग में मनोविकृति की शुरुआत में आनुवंशिक कारकों की भूमिका अधिक हो सकती है, जबकि 20 और 30 की उम्र में भांग का सेवन अधिक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता हो सकता है।
उन्होंने कहा कि भांग और मनोविकृति के बीच संबंध तथा इसके जैविक कारणों को समझने के लिए अभी और शोध की जरूरत है।
—– अध्ययन की सीमाएं —–
यह अध्ययन मेटा-विश्लेषण पर आधारित था, जिसमें समूह स्तर के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया। इसमें प्रतिभागियों की व्यक्तिगत विशेषताओं को ध्यान में नहीं रखा जा सका, जैसे बचपन में हुए गए आघात का अनुभव।
शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों की सटीक उम्र के बजाय आयु वर्गों का इस्तेमाल किया। इसके अलावा, शोधकर्ता इस्तेमाल किए गए भांग उत्पादों की क्षमता या उनके सेवन के तरीके—मसलन धूम्रपान या खाद्य उत्पादों के रूप में सेवन—का अलग-अलग विश्लेषण नहीं कर सके। विभिन्न अध्ययनों में इस्तेमाल किए गए उत्पादों की क्षमता अलग-अलग थी।
—–उपयोगकर्ताओं और चिकित्सकों को नुकसान की जानकारी जरूरी —-
शोधकर्ताओं के अनुसार, करीब 40 वर्षों के शोध में लगातार भांग के सेवन और मनोविकृति के बीच संबंध सामने आया है।
इसके अलावा, ऐसे प्रमाण भी बढ़ रहे हैं कि भांग का सेवन चिंता और अवसाद समेत कई अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी नुकसान से जुड़ा है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि उनके अध्ययन से पता चलता है कि भांग के सेवन से जुड़े संभावित मानसिक स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में लोगों को जीवन के सभी चरणों के लिए विस्तृत सार्वजनिक स्वास्थ्य चेतावनियां तत्काल दी जानी चाहिए।
( द कन्वरसेशन ) मनीषा संतोष
संतोष

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