भारत के साथ गंगा जल संधि के नवीनीकरण में ‘गारंटी’ की शर्त शामिल करने की मांग करेगा बांग्लादेश
भारत के साथ गंगा जल संधि के नवीनीकरण में ‘गारंटी’ की शर्त शामिल करने की मांग करेगा बांग्लादेश
ढाका, 19 अगस्त (भाषा) बांग्लादेश भारत के साथ गंगा जल संधि के नवीनीकरण में “गारंटी की शर्त” शामिल करने की मांग करेगा और वह अपने जल अधिकारों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों का रुख करने को भी तैयार है। स्थानीय मीडिया की खबरों से यह जानकारी सामने आई है।
सरकारी समाचार एजेंसी ‘बीएसएस’ की खबर के मुताबिक, जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी अनी ने मंगलवार को ढाका में ‘बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ एंड इंटरनेशनल अफेयर्स’ की ओर से ‘गंगा जल संधि : पुन: बातचीत के लिए मुद्दे’ विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी में कहा कि बांग्लादेश गंगा जल संधि पर फिर से बातचीत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
खबर के अनुसार अनी ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान अगले महीने संयुक्त राष्ट्र में बांग्लादेश का पक्ष मजबूती से रखेंगे।
‘द डेली स्टार’ अखबार ने अनी के हवाले से अपनी खबर में कहा, “हमें एक संधि पर हस्ताक्षर करने होंगे। संधि के बिना हमारे पास आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं है। यह हमारा अधिकार है।”
अनी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि दिसंबर में खत्म होने वाली है। यह संधि 1996 में सूखे के मौसम में गंगा के पानी के बंटवारे के लिए की गई थी।
नयी दिल्ली और ढाका के बीच द्विपक्षीय संबंधों में पानी का बंटवारा एक अहम मुद्दा रहा है। बांग्लादेश नये समझौते के लिए जोर दे रहा है, जबकि भारत का कहना है कि नवीनीकरण पर द्विपक्षीय बातचीत अभी शुरू नहीं हुई है।
‘बीएसएस’ की खबर के मुताबिक, अनी ने भविष्य में पानी के बंटवारे से जुड़े समझौतों में “सूचना का अधिकार” से संबंधित प्रावधान को शामिल करने और “गारंटी की शर्त” को बहाल करने पर जोर दिया।
“गारंटी की शर्त” 1977 की गंगा जल संधि में शामिल थी, लेकिन 1996 के समझौते में इसे हटा दिया गया था। यह शर्त नदी के निचले प्रवाह की दिशा में पड़ने वाले देश को एक निश्चित मात्रा में पानी उपलब्ध कराने की गारंटी देती है। इसका मकसद सूखे के मौसम में या नदी का जलस्तर अचानक कम हो जाने की सूरत में संबंधित देश में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
‘बीएसएस’ की खबर के अनुसार अनी ने कहा कि बांग्लादेश संधि का इच्छुक है और जरूरत पड़ने पर अपने जल अधिकारों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का रुख करने को भी तैयार है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत बांग्लादेशी लोगों के अधिकारों और भावनाओं को समझेगा और उनका सम्मान करेगा।
भाषा पारुल देवेंद्र
देवेंद्र

Facebook


