जयशंकर ने सिंगापुर में नए भारतीय उच्चायोग के ‘चांसरी कॉम्प्लेक्स’ की आधारशिला रखी
जयशंकर ने सिंगापुर में नए भारतीय उच्चायोग के ‘चांसरी कॉम्प्लेक्स’ की आधारशिला रखी
सिंगापुर, 19 अगस्त (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सिंगापुर में बुधवार को नए ‘चांसरी कॉम्प्लेक्स’ (भारतीय उच्चायोग परिसर) की आधारशिला रखी।
विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह उच्चायोग दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के एक ‘‘नए युग’’ को प्रदर्शित करेगा।
इस अवसर पर वहां सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन भी मौजूद थे।
जयशंकर बृहस्पतिवार से होने वाली चौथी भारत-सिंगापुर मंत्रीस्तरीय गोलमेज (आईएसएमआर) बैठक के लिए सिंगापुर में हैं।
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन के साथ नए उच्चायोग परिसर की आधारशिला रखने के कार्यक्रम में शामिल हुआ।’’
जयशंकर ने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि यह परिसर भारत-सिंगापुर व्यापक रणनीतिक साझेदारी के नए युग को प्रदर्शित करेगा और भारतीय समुदाय के लिए सेवाओं को और मजबूत करेगा।’’
सिंगापुर की 2020 की जनगणना के अनुसार, देश की 40.4 लाख की आबादी में भारतीय मूल के लोगों की हिस्सेदारी नौ प्रतिशत है।
सिंगापुर में भारतीय नागरिक समेत करीब 16.4 लाख विदेशी नागरिक भी रहते हैं।
भारतीय उच्चायोग के अनुसार, सिंगापुर में रहने वाले भारतीयों में छात्र और वित्तीय सेवाओं, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), निर्माण तथा समुद्री क्षेत्र में काम करने वाले लोग शामिल हैं।
सिंगापुर की चार आधिकारिक भाषाओं में से एक तमिल है। अन्य तीन आधिकारिक भाषाएं अंग्रेजी, मंदारिन चीनी और मलय हैं।
इससे पहले जयशंकर और बालाकृष्णन ने दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति पर भी ‘‘विस्तृत चर्चा’’ की।
जयशंकर ने एक अन्य पोस्ट में कहा, ‘‘कल होने वाली चौथी भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक के दौरान उनके (सिंगापुर के विदेश मंत्री के) साथ आगे भी बातचीत करने को लेकर आशान्वित हूं।’’
आईएसएमआर द्विपक्षीय आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा के लिए एक अहम मंच है।
आईएसएमआर की पहली बैठक सितंबर 2022 में नयी दिल्ली में हुई थी और इसके बाद अगस्त 2024 में सिंगापुर में दूसरी बैठक हुई। आईएसएमआर की तीसरी बैठक पिछले साल अगस्त में नयी दिल्ली में हुई थी।
जयशंकर के अलावा इस गोलमेज बैठक में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी शामिल होंगे।
भारत और सिंगापुर ने 2015 में अपने संबंधों को विस्तार देते हुए इसे ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक बढ़ाया था। इसमें व्यापार और निवेश, डिजिटलीकरण, रक्षा एवं सुरक्षा, शिक्षा, कौशल तथा उभरती हुई प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग शामिल है।
सिंगापुर, आसियान (दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन) में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
सिंगापुर भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का प्रमुख स्रोत है और विदेशी वाणिज्यिक ऋणों तथा विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) के सबसे बड़े स्रोत में से एक है।
वित्त वर्ष 2024-25 में सिंगापुर भारत का छठा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। इस अवधि में भारत ने सिंगापुर से 2120 करोड़ अमेरिकी डॉलर का आयात किया, जबकि सिंगापुर को भारत का निर्यात 1440 करोड़ अमेरिकी डॉलर रहा।
पिछले 10 वर्षों में सिंगापुर का भारत में वार्षिक निवेश 1000 करोड़ से 1500 करोड़ अमेरिकी डॉलर के बीच रहा है।
भाषा सुरभि मनीषा
मनीषा

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