सिंगापुर के प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय में दो हिमालयी गिद्धों के शवों का अध्ययन किया जाएगा

सिंगापुर के प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय में दो हिमालयी गिद्धों के शवों का अध्ययन किया जाएगा

सिंगापुर के प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय में दो हिमालयी गिद्धों के शवों का अध्ययन किया जाएगा
Modified Date: January 19, 2026 / 04:09 pm IST
Published Date: January 19, 2026 4:09 pm IST

(गुरदीप सिंह)

सिंगापुर, 19 जनवरी (भाषा) सिंगापुर का एक प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय दो हिमालयी गिद्धों के शवों का अध्ययन और शोध करेगा, जिन्हें उड़ते-उड़ते थक कर गिर जाने के बाद इस महीने की शुरुआत में बचाया गया था। सोमवार को बताया गया कि खराब स्वास्थ्य के कारण उनकी मृत्यु हो गई।

ली कोंग चियान प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय में पक्षियों के सहायक वरिष्ठ क्यूरेटर डॉ. टैन येन यी ने ‘द स्ट्रेट्स टाइम्स’ को बताया, “संग्रहालय ने (पहले गिद्ध के) शव को स्वीकार कर लिया, क्योंकि यह सिंगापुर में इस प्रजाति का पहला दर्ज नमूना है, जो इसे वैज्ञानिक और राष्ट्रीय दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाता है।”

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सिंगापुर की एनिमल कंसर्न्स रिसर्च एंड एजुकेशन सोसाइटी (एसीआरईएस) द्वारा लगभग एक हफ्ते पहले बचाए गए दूसरे हिमालयी गिद्ध की 15 जनवरी को मृत्यु हो गई। पशु संरक्षण संस्था ने सोमवार को इसकी पुष्टि की। उसके शव को संग्रहालय को सौंप दिया गया था।

मीडिया में आई खबरों के अनुसार, तीन जनवरी को बचाए गए पहले पक्षी को 7 जनवरी को उसकी सेहत बिगड़ने के बाद उसे मानवीय तरीके से मारना पड़ा।

एसीआरईएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कलाई वनन बालकृष्णन ने कहा कि पोस्टमॉर्टम से पता चला है कि बचाए गए दूसरे पक्षी की मौत “पहले से गुर्दे और जठरांत्र (गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल) समस्याओं से उत्पन्न तीव्र विषाक्तता” के कारण हुई, जो तनाव और थकावट से और बढ़ गई थी।

दोनों पक्षियों के शवों को शिक्षा और अनुसंधान के लिए सिंगापुर के राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के ली कोंग चियान प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय में स्थानांतरित कर दिया गया है।

सिंगापुर के दैनिक समाचार पत्र में कलाई के हवाले से कहा गया है, “इलाज के दौरान, दूसरे गिद्ध की हालत में सुधार के कुछ संकेत दिखाई दिए। जब ​​उसकी देखभाल घर के अंदर की जा रही थी, तब हम उसके लिए अलग से एक बाहरी पिंजरा भी तैयार कर रहे थे, क्योंकि इतने बड़े पक्षी को घर के अंदर बंद रखना तनावपूर्ण हो सकता था।”

उन्होंने कहा, “दुर्भाग्यवश, 15 जनवरी को उसकी हालत 12 घंटे के अंदर अचानक तेजी से बिगड़ गई। हमारी पशु चिकित्सा टीम ने तुरंत आपातकालीन देखभाल शुरू की, लेकिन गिद्ध ने आधी रात के करीब दम तोड़ दिया, जबकि हमारी पशु चिकित्सा टीम उसे स्थिर करने की कोशिश कर रही थी।”

भाषा प्रशांत दिलीप

दिलीप


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