डिजिटल संप्रभुता की अवधारणा का हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है: अमेरिकी अधिकारी

डिजिटल संप्रभुता की अवधारणा का हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है: अमेरिकी अधिकारी

डिजिटल संप्रभुता की अवधारणा का हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है: अमेरिकी अधिकारी
Modified Date: June 30, 2026 / 10:32 am IST
Published Date: June 30, 2026 10:32 am IST

(सागर कुलकर्णी)

वॉशिंगटन, 30 जून (भाषा) अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि डिजिटल संप्रभुता और कृत्रिम मेधा (एआई) संप्रभुता की अवधारणा को खतरा है और विदेशों में कुछ राजनीतिक समूह अपने हितों के लिए इसका दुरुपयोग कर सकते हैं।

अमेरिकी अधिकारी ने साथ ही देशों से आग्रह किया कि वे पहले से मौजूद तकनीकों को दोबारा विकसित करने में अरबों डॉलर खर्च न करें।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय में आर्थिक मामलों के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग ने ‘‘यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम लीडरशिप समिट’’ को संबोधित करते हुए यह बात कही।

हेलबर्ग ने कहा,‘‘ मेरे विचार में संप्रभुता का मतलब वैश्विक नवाचार व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बनना है। यह नवाचार संप्रभुता है, न कि केवल यह कि क्या आपने पिछले साल की पूरी प्रौद्योगिकी प्रणाली को अपने देश में ही नियंत्रित किया।’’

उन्होंने कहा कि संप्रभुता का विचार बेहद आकर्षक है और लोगों को सशक्त महसूस कराता है।

लेकिन उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ‘‘खतरा यह है कि विदेशों में कई राजनीतिक गुट इस अवधारणा का इस तरह इस्तेमाल कर रहे हैं कि जैसे संप्रभु बनने के लिए किसी देश को पूरी तकनीकी प्रणाली शुरू से अंत तक अपने देश में ही दोबारा बनानी होगी।’’

उन्होंने कहा कि यह मानना कि कोई देश तब तक संप्रभु नहीं हो सकता जब तक उसके पास अपनी पूरी एआई प्रौद्योगिकी प्रणाली न हो, ‘बेहद पिछड़ी सोच’ है और आर्थिक रूप से भी नुकसानदायक है।

हेलबर्ग ने कहा, ‘‘इसका मतलब यह होगा कि देश पहले से मौजूद किसी चीज को दोबारा विकसित करने में अरबों डॉलर खर्च करेंगे और संभवतः उन्हें उससे कमज़ोर और कम प्रभावी परिणाम ही मिलेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इतनी इंजीनियरिंग क्षमता और वित्तीय संसाधनों का उपयोग अगली पीढ़ी के नवाचार विकसित करने में होना चाहिए, न कि पिछले साल की तकनीक का कमतर संस्करण तैयार करने में।’’

हेलबर्ग ने वैश्विक प्रौद्योगिकी नेतृत्व की दौड़ में भारत को अमेरिका का ‘अनिवार्य साझेदार’ करार दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत हमारे लिए इसलिए भी विशेष महत्व रखता है क्योंकि हमारे बीच न केवल साझा लोकतांत्रिक मूल्य हैं बल्कि इंजीनियरिंग कार्यबल और प्रतिभा के मामले में भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जो चीन को वास्तविक चुनौती देने की क्षमता रखता है।’’

भाषा शोभना वैभव

वैभव


लेखक के बारे में