अदालत ने इमरान खान, पत्नी बुशरा को एकांत कारावास में नहीं रखने का दिया निर्देश

अदालत ने इमरान खान, पत्नी बुशरा को एकांत कारावास में नहीं रखने का दिया निर्देश

अदालत ने इमरान खान, पत्नी बुशरा को एकांत कारावास में नहीं रखने का दिया निर्देश
Modified Date: September 1, 2026 / 03:08 pm IST
Published Date: September 1, 2026 3:08 pm IST

इस्लामाबाद, एक सितंबर (भाषा) पाकिस्तान की एक उच्च अदालत ने जेल प्राधिकारियों को मंगलवार को निर्देश दिया कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को एकांत कारावास में नहीं रखा जाए।

क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान (73) और उनकी पत्नी बुशरा बीबी इस समय रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं। दोनों भ्रष्टाचार और इससे जुड़े मामलों में लंबी सजा काट रहे हैं।

इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (आईएचसी) के न्यायमूर्ति खादिम हुसैन सोमरो ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने इमरान खान और बुशरा बीबी को कथित तौर पर एकांत कारावास में रखे जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सुनवाई योग्य माना।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि इमरान खान के परिवार के सदस्यों को जेल नियमों के तहत उनसे मिलने की अनुमति दी जाए। साथ ही, प्राधिकारियों को उनके बेटों से फोन पर बातचीत की व्यवस्था करने का आदेश दिया।

आईएचसी ने अदियाला जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि इमरान खान को रोजाना समाचार पत्र और किताबें उपलब्ध कराई जाएं तथा जेल नियमों के अनुसार उन्हें चिकित्सा सुविधाएं भी दी जाएं।

अदालत ने अदियाला जेल के अधीक्षक को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने और 15 दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने को कहा।

न्यायमूर्ति सोमरो ने छह अगस्त को इमरान खान की बहन अलीमा खानम और बुशरा बीबी की बेटी मुबाशरा खावर मनेका की ओर से अलग-अलग दायर याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इन याचिकाओं में दोनों को कथित तौर पर एकांत कारावास में रखे जाने को चुनौती दी गई थी।

इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। उन्हें जिन मामलों में दोषी ठहराया गया है, उन्हें उन्होंने और उनकी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी ने राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।

उनके समर्थकों और रिश्तेदारों ने कई बार आरोप लगाया है कि प्राधिकारियों ने परिवार के सदस्यों से उनकी मुलाकात और उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा मिलने पर रोक लगा रखी है। सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।

भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद बुशरा बीबी को पहली बार 31 जनवरी, 2024 को जेल भेजा गया था। करीब नौ महीने जेल में रहने के बाद उन्हें उसी साल 24 अक्टूबर को जमानत पर रिहा किया गया।

भ्रष्टाचार के एक अन्य मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें 17 जनवरी, 2025 को फिर गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद भ्रष्टाचार से जुड़े कुछ अन्य मामलों में भी उन्हें सजा सुनाई गई और वह अब भी अदियाला जेल में बंद हैं।

इस बीच, डॉन न्यूज के अनुसार, पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को इमरान खान की बहन उजमा खान की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें सरकारी अधिकारियों के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की गई थी।

उजमा ने आरोप लगाया था कि अधिकारियों ने 18 अगस्त के उच्चतम न्यायालय के उस आदेश का अनुपालन नहीं किया जिसमें इमरान खान को एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया था।

उजमा ने जल्द सुनवाई का अनुरोध तब किया था, जब उच्चतम न्यायालय ने उनकी पहले से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की।

उच्चतम न्यायालय ने 18 अगस्त को सरकार को इमरान खान को निजी अस्पताल शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। उनके परिवार और समर्थक कई महीनों से उनकी सेहत को लेकर चिंता जता रहे थे। खासकर इस साल की शुरुआत में सामने आई आंखों की बीमारी को लेकर चिंता जताई गई थी।

हालांकि, 20-21 अगस्त की रात इमरान खान को शिफा अस्पताल ले जाने के बजाय चिकित्सा प्रक्रिया और जांच के लिए सरकारी पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पीआईएमएस) में भर्ती कराया गया। इसके बाद उन्हें फिर अदियाला जेल ले जाया गया।

उजमा की याचिका में कहा गया था कि यह फैसला उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लंघन है। आदेश में कहा गया था कि इमरान खान को 16 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई तक इस्लामाबाद के अस्पताल में भर्ती रखा जाए।

सरकार ने उन्हें पीआईएमएस ले जाने के फैसले का बचाव करते हुए सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला दिया।

अवमानना याचिका पर अब 16 सितंबर को तीन सदस्यीय पीठ सुनवाई करेगी। इसमें न्यायमूर्ति शाहिद वहीद, न्यायमूर्ति नईम अख्तर अफगान और न्यायमूर्ति इश्तियाक इब्राहिम शामिल हैं। यही पीठ इमरान खान की सेहत और परिवार से उनकी मुलाकात से जुड़े लंबित मामलों पर भी सुनवाई करेगी।

डॉन न्यूज के अनुसार, उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को जल्द सुनवाई का अनुरोध यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इसी श्रेणी की 94 अन्य आपराधिक मूल याचिकाएं पहले से लंबित हैं।

भाषा अमित नरेश

नरेश


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