महत्वपूर्ण ऊर्जा खनिजों को सतत विकास का आधार बनना चाहिए: भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कहा
महत्वपूर्ण ऊर्जा खनिजों को सतत विकास का आधार बनना चाहिए: भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कहा
(योषिता सिंह)
संयुक्त राष्ट्र, 15 जुलाई (भाषा) भारत ने कहा है कि ऊर्जा रूपांतरण के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिज सतत विकास का आधार बनें, न कि असमानता का एक और स्रोत।
साथ ही भारत ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय स्वामित्व और संसाधनों पर संप्रभु अधिकार वैश्विक सहयोग की आधारशिला बने रहने चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश पर्वथनेनी ने मंगलवार को ‘महत्वपूर्ण ऊर्जा खनिजों’ पर आयोजित उच्च-स्तरीय बैठक के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए ये टिप्पणियां कीं।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र से सदस्य देशों का समर्थन करने का भी आह्वान किया और इसके लिए उसने तकनीकी सहयोग को मजबूत करने, ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने और मौजूदा संस्थागत व्यवस्थाओं का बेहतर उपयोग करने की बात कही।
पर्वथनेनी ने कहा, ‘‘स्वच्छ ऊर्जा के लिए महत्वपूर्ण खनिज अनिवार्य हैं, लेकिन अनेक विकासशील देशों के लिए ये औद्योगिकीकरण को गति देने, गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजित करने और घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने का एक अवसर भी हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उद्देश्य यह होना चाहिए कि देश वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में अधिक से अधिक मूल्य संवर्धन कर सकें और अपनी भागीदारी को अधिक मजबूत, स्थायी एवं लचीला बना सकें।’’
उन्होंने कहा कि ऊर्जा रूपांतरण के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों को सतत विकास को गति देने वाला माध्यम बनना चाहिए, न कि दुनिया में असमानता बढ़ाने का एक और स्रोत।’’
उन्होंने कहा कि साझेदारियों को ऐसे पारस्परिक रूप से लाभकारी निवेश, प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान और कौशल विकास को बढ़ावा देना चाहिए, जिससे विकासशील देशों को अपने प्रसंस्करण, शोधन और विनिर्माण क्षेत्रों का विस्तार करने में मदद मिल सके।
भाषा देवेंद्र माधव
माधव

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