डार्क टूरिज्म : मौत, अपराध और त्रासदी से जुड़े स्थल पर्यटकों को क्यों आकर्षित करते हैं?
डार्क टूरिज्म : मौत, अपराध और त्रासदी से जुड़े स्थल पर्यटकों को क्यों आकर्षित करते हैं?
(जॉर्ज ग्रेसिया आईबनेज, सैन जॉर्ज यूनिवर्सिटी )
जरागोजा (स्पेन), 21 अगस्त (द कन्वरसेशन) इस गर्मी में गैलिसिया के प्रमुख मादक पदार्थ तस्कर लॉरेआनो ओउबिना ने आरूसा इलाके में ‘‘ड्रग तस्करी टूर’’ शुरू किया। उन्होंने पर्यटकों को नाव की सवारी के दौरान उन स्थानों की यात्रा कराने की पेशकश की, जो कभी तस्करी की वजह से सुर्खियों में थे। इस यात्रा में घटनाओं की प्रत्यक्ष जानकारी और दोपहर का भोजन भी शामिल था। हालांकि, गैलिसिया की क्षेत्रीय सरकार ने पर्यटन कानूनों के उल्लंघन के कारण इस पहल पर रोक लगा दी।
यह ‘‘डार्क टूरिज्म’’ का एक उदाहरण है—ऐसे स्थानों की यात्रा जहां मौत, हिंसा और अपराध से जुड़ी घटनाएं हुई हों। ओउबिना के प्रस्तावित दौरे से यह सवाल उठता है कि क्या तेजी से लोकप्रिय हो रही यह प्रवृत्ति अब अपनी सीमा से आगे बढ़ रही है।
हालांकि, डार्क टूरिज्म एक व्यापक अवधारणा है। यह एक ओर पर्यटन उद्योग की लगातार नए अनुभव तलाशने की जरूरत से जुड़ा व्यावसायिक शब्द है और दूसरी ओर एक सामाजिक घटना भी है। सांस्कृतिक अपराधशास्त्र के क्षेत्र में इसका विशेष अकादमिक महत्व है, जो यह अध्ययन करता है कि लोग अपराध को कैसे समझते हैं और हिंसा को किस नजर से देखते हैं।
सांस्कृतिक अपराधशास्त्र लोकप्रिय गैर-कथा शैली ‘‘ट्रू क्राइम’’ का भी अध्ययन करता है। इसमें गंभीर अपराधों का विश्लेषण करने वाली सीरीज, पॉडकास्ट, किताबें और फिल्में शामिल हैं। ‘ट्रू क्राइम’ और ‘डार्क टूरिज्म’ दोनों ही बदलते रुझानों का अनुसरण करते हैं और यह समझने में मदद करते हैं कि समाज हिंसा और अपराध को किस तरह देखता है।
ये दोनों बताते हैं कि आपराधिक और हिंसक घटनाओं के प्रति समाज की प्रतिक्रिया जटिल होती है। जिज्ञासा के साथ-साथ अतीत पर विचार करने, उसे याद रखने, घटनाओं के कारणों को समझने और उनका अर्थ तलाशने की इच्छा भी जुड़ी होती है।
अपराधशास्त्रियों के लिए डार्क टूरिज्म का संबंध मुख्य रूप से अपराध, हिंसा और न्याय से है। इसका एक बड़ा हिस्सा उन स्थानों से जुड़ा है जहां दर्दनाक घटनाएं हुईं या गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन हुए, जैसे यातना शिविरों और स्मारकों की यात्राएं।
वियतनाम युद्ध से लेकर द्वितीय विश्व युद्ध तक सशस्त्र संघर्षों से जुड़े स्थान भी इस श्रेणी में आते हैं। ऐतिहासिक जेलों, जैसे अल्काट्राज, की यात्राएं भी इसका हिस्सा हैं।
इसके अलावा, पारंपरिक पर्यटन मार्गों से हटकर ऐसे शहरी इलाकों की यात्राएं भी की जाती हैं जहां अपराध की दर अधिक रही है। इनमें न्यूयॉर्क के कुछ खतरनाक माने जाने वाले इलाकों या रियो डी जेनेरियो की झुग्गियों के दौरे भी शामिल हैं।
कुछ यात्राओं का उद्देश्य जानबूझकर अपराध से जुड़े कलंक को दूर करना होता है। मसलन, मेक्सिको सिटी में स्थानीय प्रशासन ‘‘तेपितूर’’ का आयोजन करता है, जिसका उद्देश्य कुख्यात तेपितो इलाके को एक अलग नजरिये से पेश करना है। इस इलाके में यूनियन तेपितो कार्टेल सक्रिय है।
हालांकि ये सभी इलाके और स्मारक अपराध या हिंसा से जुड़े हैं, लेकिन इनमें महत्वपूर्ण अंतर हैं। ऑशवित्ज जैसे यातना शिविर की यात्रा और लंदन में ‘जैक द रिपर’ के कथित कदमों का अनुसरण करने वाला पैदल टूर एक समान नहीं है। बाद वाले दौरे में पालतू जानवरों को भी ले जाने की अनुमति होती है।
बड़े पैमाने पर पर्यटन के विस्तार के कारण पर्यटन उद्योग को बढ़ती मांग पूरी करने के लिए नए और अनोखे अनुभव तलाशने पड़ रहे हैं, जिनमें ऐसे अनुभव भी शामिल हैं जो पारंपरिक अर्थों में खास ‘‘पर्यटन’’ जैसे नहीं लगते। डार्क टूरिज्म के बढ़ने का संबंध पॉप संस्कृति में अपराधशास्त्र की बढ़ती लोकप्रियता से भी है।
दुनिया के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल स्पेन भी डार्क टूरिज्म का केंद्र बन गया है। विशेष ब्लॉग स्पेन के गृहयुद्ध से जुड़े कई पर्यटन स्थलों और मार्गों को प्रमुखता देते हैं।
इसके उल्लेखनीय उदाहरणों में बास्क शहर का गुएर्निका शामिल है, जिस पर गृहयुद्ध के दौरान जर्मन सेना ने बमबारी की थी। इसके अलावा आरागॉन का पुराना शहर बेलचिते भी है, जिसके खंडहर आज भी उस संघर्ष की गवाही देते हैं।
हाल के वर्षों में स्पेन के गृहयुद्ध की प्रमुख लड़ाइयों से जुड़े बंकरों और स्थलों के लिए पर्यटक मार्गों की संख्या बढ़ी है। जादू-टोने और उसके दमन से जुड़े ऐतिहासिक स्थल, जैसे जुगारामुर्दी, भी इन यात्राओं का हिस्सा हैं।
हालांकि इनका उद्देश्य सामाजिक सक्रियता पर अधिक केंद्रित है, लेकिन स्पेन के विभिन्न शहरों में राजनीतिक और शहरी नियोजन में भ्रष्टाचार से जुड़े स्थलों को शामिल करने वाले पैदल पर्यटन मार्ग भी इसी व्यापक श्रेणी में आते हैं।
डार्क टूरिज्म को अक्सर पर्यटन स्थलों की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के साधन के रूप में पेश किया जाता है और यह पर्यटन उद्योग की नए अनुभव विकसित करने की क्षमता को दर्शाता है। ऐतिहासिक स्मृति से जुड़े स्थलों के मामले में यह सामाजिक जागरूकता बढ़ाने और उनके शैक्षणिक महत्व को मजबूत करने में भी मदद कर सकता है।
लेकिन इससे महत्वपूर्ण चुनौतियां भी पैदा होती हैं। इनमें से कई स्थल स्मरण, शोक और उपचार के लिए बनाए गए थे। पर्यटकों की मेजबानी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल नहीं थी। इसलिए डार्क टूरिज्म का एक बड़ा जोखिम यह है कि वह इन स्थलों के मूल उद्देश्य को तुच्छ बना दे। ऑशवित्ज और अन्य स्मारक स्थलों पर अनुचित तरीके से सेल्फी लेना इसका उदाहरण है।
इसके अलावा, ये स्थल अक्सर ऐसे असहज इतिहास को समेटे हुए होते हैं जिसकी व्याख्या जटिल और विवादास्पद प्रक्रियाओं से जुड़ी होती है। स्पेन का वाये दे लॉस काइदोस यानी ‘‘वैली ऑफ द फॉलन’’ इसका उदाहरण है। यह विशाल समाधि परिसर पहले स्पेन के पूर्व तानाशाह फ्रांसिस्को फ्रांको के अवशेषों का स्थान था।
इन स्थलों से जुड़े पीड़ितों की स्मृति का सम्मान करना और यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि अपराध या हिंसा से जुड़े स्थानों पर पर्यटन का वहां रहने वाले लोगों पर क्या असर पड़ता है। ऐसे उत्पादों या अनुभवों का विपणन, जो अपराधियों को सही ठहराते या उनका महिमामंडन करते हों, विशेष रूप से समस्याग्रस्त हैं।
इन्हीं कारणों से डार्क टूरिज्म को नैतिक तरीके से संचालित किया जाना चाहिए। घटनाओं का संदर्भ दिया जाना चाहिए और पीड़ितों का सम्मान किया जाना चाहिए ताकि उन्हें और पीड़ा न पहुंचे। नैतिक तरीके से संचालित होने पर यह समाज पर गहरी छाप छोड़ने वाली त्रासद घटनाओं से सीखने और उन पर विचार करने को प्रोत्साहित कर सकता है।
द कन्वरसेशन मनीषा नरेश
नरेश

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