एआई के वैश्विक नियमन की मांग तेज, कैसी हो सकती है व्यवस्था

एआई के वैश्विक नियमन की मांग तेज, कैसी हो सकती है व्यवस्था

एआई के वैश्विक नियमन की मांग तेज, कैसी हो सकती है व्यवस्था
Modified Date: September 22, 2026 / 04:33 pm IST
Published Date: September 22, 2026 4:33 pm IST

( स्टैन कैरेन्सियस, द यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड )

क्वींसलैंड, 22 सितंबर (द कन्वरसेशन) ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) विकसित करने वाली कंपनियों की ओर से इस तकनीक के खतरों को लेकर दी जा रही चेतावनियों पर ध्यान देते नजर आ रहे हैं।

अल्बनीज ने सप्ताहांत में कहा कि एआई के विकास को नियंत्रित करने के लिए वैश्विक नियमों की जरूरत है, ताकि ‘‘यह सुनिश्चित किया जा सके कि इंसान नियंत्रण में रहें।’’

यह बयान एआई कंपनी एंथ्रोपिक के प्रमुख डारियो अमोदेई के उस आह्वान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि एआई के विकास की गति धीमी की जानी चाहिए ताकि सरकारों और कंपनियों को इससे जुड़े ‘‘गंभीर’’ जोखिमों से निपटने के लिए अधिक समय मिल सके। ओपनएआई के प्रमुख सैम ऑल्टमैन समेत कई अन्य एआई विशेषज्ञ भी इस विचार से सहमत हैं।

लेकिन सवाल यह है कि एआई का बेहतर नियमन किस तरह किया जा सकता है और इसे लागू कौन करेगा?

—– एआई नियमन की जरूरत क्यों महसूस हो रही है? —–

एआई के मानव नियंत्रण से बाहर जाने की क्षमता को लेकर चिंता बढ़ रही है। हाल के दिनों में एआई से जुड़े कई बड़े साइबर सुरक्षा मामले सामने आए हैं।

पिछले सप्ताह गूगल ने बताया था कि उसके जेमिनी एआई मॉडल ने मई में साइबर सुरक्षा क्षमता के परीक्षण के दौरान तीन वेबसाइटों को अपने आप हैक कर लिया था।

एंथ्रोपिक और ओपनएआई के एआई मॉडलों से जुड़े इसी तरह के मामले भी हाल में सामने आए हैं।

इन घटनाओं को कुछ लोग एआई क्षमताओं के प्रचार के एक तरीके के रूप में भी देखते हैं, क्योंकि तेजी से बदलते मीडिया दौर में ऐसी खबरें एआई के प्रति उत्साह बनाए रखती हैं। हालांकि, ये घटनाएं यह सवाल भी उठाती हैं कि क्या एआई कंपनियों पर अधिक निगरानी और नियमन जरूरी है।

—– देश अभी क्या कदम उठा रहे हैं? —–

ऑस्ट्रेलिया सरकार ने पिछले सप्ताह प्रस्तावित राष्ट्रीय ‘‘एआई मानकों’’ पर एक परामर्श पत्र जारी किया। इसमें डेटा केंद्रों और एआई प्रशिक्षण ढांचे से जुड़े अवसरों का लाभ उठाने तथा संभावित नुकसान को कम करने पर जोर दिया गया है।

इसमें यह प्रस्ताव भी है कि एआई कंपनियों को किसी अन्य कंपनी की हैकिंग जैसी अनियंत्रित घटनाओं की जानकारी ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों को देना कानूनी रूप से अनिवार्य किया जाए।

यूरोपीय संघ का एआई कानून (एआई एक्ट) एआई नियमन के लिए सबसे व्यापक व्यवस्थाओं में से एक माना जाता है। इसमें जोखिम के आधार पर एआई को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है, जिसमें अस्वीकार्य जोखिम से लेकर न्यूनतम जोखिम तक शामिल हैं।

इस कानून को लागू करने की जिम्मेदारी सदस्य देशों, यूरोपीय डेटा संरक्षण पर्यवेक्षक और यूरोपीय आयोग के एआई कार्यालय के बीच बांटी गई है। एआई कार्यालय तकनीकी दस्तावेज मांग सकता है, मॉडलों का मूल्यांकन कर सकता है, सुधारात्मक कदमों का निर्देश दे सकता है और नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना लगा सकता है।

अमेरिका में एआई नियमन को लेकर राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप औपचारिक नियमन के विरोध में हैं। वहीं, सीनेटर बर्नी सैंडर्स जैसे कुछ नेता अमेरिका से चीन के साथ मिलकर एआई नियमन पर काम करने की मांग कर रहे हैं।

—– वैश्विक दृष्टिकोण की जरूरत —–

एआई एक वैश्विक तकनीक है। अलग-अलग देशों में डीपफेक, एल्गोरिदम में पक्षपात या हैकिंग जैसे मुद्दों पर अलग-अलग कानून इसे नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त नहीं होंगे।

एंथनी अल्बनीज की ओर से सुझाए गए वैश्विक दृष्टिकोण की जरूरत है। हालांकि, यह भी माना जाना चाहिए कि तकनीक के लगातार बदलने के कारण कोई भी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी नहीं होगी। फिर भी, केवल एआई कंपनियों पर भरोसा करने से बेहतर कोई नियामक व्यवस्था होना है।

इसमें वैश्विक विमानन उद्योग के नियमन से सीख ली जा सकती है। विमानन क्षेत्र में राष्ट्रीय नियामकों के साथ ‘अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन’ (आईसीएओ) भी है, जो सुरक्षा मानक तय करता है, अनुपालन की जांच करता है और घटनाओं का अध्ययन करता है।

एआई नियमन के लिए ‘अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी’ (आईएईए) जैसे मॉडल से भी प्रेरणा ली जा सकती है, जो परमाणु सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

ऐसी व्यवस्था से एआई मॉडलों की तीसरे पक्ष से अनिवार्य जांच, अधिक पारदर्शिता और मजबूत सुरक्षा ढांचा विकसित किया जा सकता है।

—– ऑस्ट्रेलिया निभा सकता है भूमिका —–

ऑस्ट्रेलिया भले ही बड़ी तकनीकी कंपनियों पर सीमित प्रभाव रखने वाला देश है, लेकिन वह एआई नियमन को लेकर वैश्विक सहमति बनाने में भूमिका निभा सकता है।

सोशल मीडिया तक युवाओं की पहुंच सीमित करने के उसके प्रयास इसका उदाहरण हैं। कई अन्य देश भी सोशल मीडिया मंचों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए इसी तरह के कदम उठा रहे हैं।

वैश्विक एआई नियमन तैयार करना धीमी प्रक्रिया होगी, खासकर तब जब अमेरिका खुद इस मुद्दे पर स्पष्ट नीति तय करने में संघर्ष कर रहा है। ऐसे में जब तक वैश्विक नियम नहीं बनते, अलग-अलग देशों को एआई कंपनियों को उनके उत्पादों से होने वाले नुकसान के लिए अधिक जवाबदेह बनाना होगा।

ऑस्ट्रेलिया के एआई नैतिकता सिद्धांतों में भी यह कहा गया है कि एआई प्रणाली के जीवन चक्र के विभिन्न चरणों के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए तथा मानव निगरानी की व्यवस्था होनी चाहिए।

कुछ देशों ने इससे आगे कदम उठाए हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिका के अलबामा प्रांत के अटॉर्नी जनरल ने इस साल तकनीकी स्टार्टअप हगिंग फेस की हैकिंग के मामले में ओपनएआई और सैम ऑल्टमैन के खिलाफ जांच शुरू की है। जांच में यह देखा जाएगा कि क्या ओपनएआई ने उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का उल्लंघन किया है।

ऐसी जवाबदेही से एआई कंपनियों को अपने उत्पादों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। इसके अभाव में तेजी से विकसित हो रही इस तकनीक के जोखिम बढ़ते रहेंगे।

द कन्वरसेशन मनीषा अमित

अमित


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