निर्वाचन आयोग ने मतदान केंद्रों के 400 गज के दायरे में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया

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निर्वाचन आयोग ने मतदान केंद्रों के 400 गज के दायरे में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया

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  • Publish Date - February 9, 2026 / 08:40 PM IST,
    Updated On - February 9, 2026 / 08:40 PM IST

ढाका, नौ फरवरी (भाषा) बांग्लादेश के निर्वाचन आयोग ने एक निर्देश जारी कर चुनाव के दिन मतदान केंद्रों के 400 गज के दायरे में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है। दक्षिणपंथी राजनीतिक दलों ने इस फैसले का विरोध करते हुए धमकी दी है कि अगर यह निर्णय वापस नहीं लिया गया तो वे आयोग के कार्यालय का घेराव करेंगे।

बांग्लादेश में 12 फरवरी को संसदीय चुनाव होंगे। ये अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद पहले चुनाव होंगे।

रविवार को जारी निर्देश में कहा गया है, ‘किसी भी व्यक्ति को मोबाइल फोन के साथ मतदान केंद्र में प्रवेश करने या उसके 400 गज के दायरे में रहने की अनुमति नहीं होगी। यह प्रतिबंध मतदाताओं, मतदान कर्मियों और चुनाव ड्यूटी पर मौजूद सभी लोगों पर लागू होगा। इसमें कुछ सीमित अपवाद भी हैं।’

इसमें कहा गया है कि केवल पीठासीन अधिकारी, केंद्रों पर तैनात पुलिस के प्रभारी अधिकारी और चुनाव ड्यूटी पर तैनात दो अधिकृत अर्ध-पुलिस अंसार सदस्य ही इस आदेश के दायरे से बाहर रहेंगे।

जमात-ए-इस्लामी और उसके दक्षिणपंथी सहयोगी ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया और आदेश वापस न लिए जाने पर आयोग के कार्यालय का घेराव करने की धमकी दी।

जमात के सहायक महासचिव अहसान-उल-महबूब जुबैर ने एक प्रेस विज्ञप्ति में यह घोषणा की।

जमात के नेतृत्व वाले 11-दलीय दक्षिणपंथी चुनावी गठबंधन में शामिल छात्रों के नेतृत्व वाली नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) ने भी आयोग के फैसले की आलोचना की। एनसीपी का गठन पिछले साल अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के समर्थन से हुआ था।

एनसीपी संयोजक नाहिद इस्लाम ने कहा, ‘अगर आज शाम तक यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो कल (मंगलवार) निर्वाचन आयोग को घेर लिया जाएगा।’

एनसीपी नेताओं ने 2024 के उन विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया जिन्हें जुलाई विद्रोह कहा जाता है। इसी के कारण हसीना की अवामी लीग सरकार गिर गई थी।

हालांकि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने आयोग के फैसले पर अबतक कोई टिप्पणी नहीं की है।

इसी बीच, चुनाव प्रचार अपने अंतिम दिन में प्रवेश कर गया, और राष्ट्रीय राजधानी में प्रमुख राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं की रैलियां देखने को मिलीं।

भाषा नोमान नरेश

नरेश