उभरती प्रौद्योगिकियां भारत-अमेरिका संबंधों के अगले चरण को परिभाषित करेंगी : क्वात्रा
उभरती प्रौद्योगिकियां भारत-अमेरिका संबंधों के अगले चरण को परिभाषित करेंगी : क्वात्रा
(सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, 30 जून (भाषा) अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने जैव प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और सेमीकंडक्टर को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में सूचीबद्ध करते हुए कहा कि उभरती प्रौद्योगिकियां भारत-अमेरिका सहयोग के अगले चरण को परिभाषित करेंगी।
यहां आयोजित ‘यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) लीडरशिप समिट’ को संबोधित करते हुए क्वात्रा ने कहा कि भारत ने खुद को उन कंपनियों के लिए पसंदीदा गंतव्य के रूप में स्थापित किया है, जो पारंपरिक विनिर्माण केंद्रों से आगे बढ़कर अपने उत्पादन और आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाना चाहती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत ने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई, स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा विनिर्माण जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया है, जिससे वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में उसकी भूमिका और मजबूत हुई है।
क्वात्रा ने कहा कि वर्तमान में 4,300 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला भारत इस दशक के अंत तक सात हजार अरब डॉलर, 2030 के दशक के मध्य तक लगभग 14 हजार अरब डॉलर तथा 2047 तक 25 से 30 हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है।
उन्होंने बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में व्यवधान के दौर में भारत को वैश्विक आर्थिक वृद्धि और स्थिरता का ‘‘अनिवार्य आधार’’ बताया।
क्वात्रा ने कहा कि भारत के आर्थिक परिवर्तन ने उसे विकसित होती वैश्विक व्यवस्था के केंद्र में ला खड़ा किया है और वह विकसित तथा उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक विश्वसनीय विकास इंजन और रणनीतिक साझेदार बनकर उभरा है।
उन्होंने कहा, ‘‘2014 से प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत में कई आर्थिक रूपांतरणकारी कदम उठाए गए हैं, जिनके परिणामस्वरूप देश लगातार सात प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि दर्ज कर रहा है। यह वृद्धि मुख्य रूप से घरेलू मांग से संचालित है, जो इसे विशिष्ट बनाती है।’’
क्वात्रा ने कहा कि भारत का आर्थिक उत्थान अब वैश्विक समृद्धि से गहराई से जुड़ गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है।
आत्मनिर्भर भारत के सरकार के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह कोई आत्मकेंद्रित नीति नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण और मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं का निर्माण करना है।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन का ऐसा मिश्रित मॉडल प्रस्तुत किया है, जो सकारात्मक वैश्विक प्रभाव पैदा करता है और किसी भी तरह से अलग-थलग रहने वाला नहीं है।’’
भाषा गोला वैभव
वैभव

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