झारखंड में रेलवे स्टेशन से चार नाबालिगों को बचाया गया, मानव तस्करी के आरोप में दो लोग गिरफ्तार
झारखंड में रेलवे स्टेशन से चार नाबालिगों को बचाया गया, मानव तस्करी के आरोप में दो लोग गिरफ्तार
साहिबगंज, पांच मई (भाषा) झारखंड के साहिबगंज जिले के एक रेलवे स्टेशन से चार नाबालिगों को बचाया गया और मानव तस्करी के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि सूचना मिली थी कि चार नाबालिगों को शारीरिक श्रम के लिए राज्य से बाहर ले जाया जा रहा है, जिसके बाद रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने बड़हरवा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या एक पर तलाशी अभियान चलाया और उन्हें बचा लिया।
एक अधिकारी ने बताया, ‘सभी चारों नाबालिग साहिबगंज जिले के बरहेट के निवासी थे।’
बच्चों ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने उन्हें हरियाणा के अंबाला और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में नौकरी दिलाने का लालच दिया था और उन्हें 9,000 रुपये से 12,000 रुपये प्रति माह के बीच वेतन देने की पेशकश की थी।
अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान मनोज साह (40) और मोहम्मद अताउल अंसारी (51) के रूप में हुई है और उन्होंने पूछताछ के दौरान अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
उन्होंने बताया कि शासकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है और बचाए गए नाबालिगों को सुरक्षात्मक हिरासत में रखा गया है।
अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार दोपहर को एक अन्य अभियान में आरपीएफ ने स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ने से पहले दो लड़कियों सहित छह नाबालिगों को बचाया।
एक अधिकारी ने कहा, ‘बच्चों को संदिग्ध परिस्थितियों में बिना पर्याप्त सामान के आने-जाने के क्षेत्र में पाया गया। पूछताछ के दौरान उनमें से तीन (दो लड़कियां और एक लड़का जिनकी उम्र 10 से 17 वर्ष के बीच है) ने बताया कि वे तालझारी थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं और अपने परिवारों को सूचित किए बिना घर छोड़ने से पहले सोशल मीडिया के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े थे।’
उन्होंने बताया कि 10 साल की एक लड़की ने कहा कि वह एक परिचित युवक के साथ आई थी। उन्होंने कहा कि वह युवक आरपीएफ कर्मियों को देखते ही भाग गया।
उन्होंने बताया कि शेष तीन नाबालिग कोटालपोखर थाना क्षेत्र के लड़के हैं जिन्होंने कहा कि वे मजदूर के रूप में काम की तलाश में पटना जाना चाहते हैं।
अधिकारी ने बताया कि सभी छह नाबालिगों को कानूनी औपचारिकताओं के लिए आरपीएफ चौकी पर रखा गया था, जिसके बाद उन्हें सुरक्षा, परामर्श और कानूनी प्रक्रियाओं के लिए एक गैर-लाभकारी संस्था को सौंप दिया गया।
भाषा
शुभम माधव
माधव

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