वर्ष 1790 में पहले भारतीय के आगमन से अब तक: भारतीय मूल के अमेरिकियों की यात्रा का दस्तावेज तैयार

वर्ष 1790 में पहले भारतीय के आगमन से अब तक: भारतीय मूल के अमेरिकियों की यात्रा का दस्तावेज तैयार

वर्ष 1790 में पहले भारतीय के आगमन से अब तक: भारतीय मूल के अमेरिकियों की यात्रा का दस्तावेज तैयार
Modified Date: July 3, 2026 / 12:29 am IST
Published Date: July 3, 2026 12:29 am IST

(सागर कुलकर्णी)

वॉशिंगटन, दो जुलाई (भाषा) अमेरिका से भारत का जुड़ाव उसकी आजादी के शुरुआती वर्षों से रहा है। वर्ष 1790 में मैसाचुसेट्स में ‘मद्रास से आए व्यक्ति’ के ऐतिहासिक आगमन से शुरू हुआ यह संबंध समय के साथ लगातार मजबूत होता गया और दो शताब्दियों के दौरान भारतीय मूल के लोगों ने अमेरिका के विकास की यात्रा में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।

प्रवासी भारतीयों के हितों के लिए काम करने वाले संगठन ‘इंडियास्पोरा’ की एक परियोजना में अमेरिका में भारतीयों की यात्रा का ब्योरा दिया गया है। इसमें पहले दर्ज ‘‘गैर-बाध्य’’ भारतीय आगमन से लेकर भारतीय मूल के लोगों के अमेरिकी समाज और इतिहास को आकार देने में योगदान को रेखांकित किया गया है। इनकी संख्या अब 30 लाख से 50 लाख के बीच आंकी जाती है।

‘द इंडियास्पोरा 250 ऐट 250 : द इंडियन अमेरिकन स्टोरी’ शीर्षक वाली इस परियोजना में 250 ऐसे महत्वपूर्ण पड़ावों को शामिल किया गया है, जो विज्ञान, कला, सार्वजनिक जीवन और अन्य क्षेत्रों में भारतीय मूल के लोगों के योगदान को दर्शाते हैं। यह परियोजना चार जुलाई को मनाई जाने वाली अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर तैयार की गई है।

गैर-लाभकारी संगठन ‘इंडियास्पोरा’ के ‘ग्लोबल फोरम’ प्रबंध निदेशक निरंजना राजगोपाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘इस संकलन में अमेरिकी जीवन के 15 क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इसे व्यापक शोध और संपादकीय प्रक्रिया के बाद तैयार किया गया है तथा अंतिम चयन की पुष्टि के लिए बाहरी विशेषज्ञों की भी मदद ली गई। हालांकि यह पूरी तरह समग्र सूची नहीं है।’’

‘इंडियास्पोरा’ के अनुसार, अमेरिका में भारतीय-अमेरिकियों की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2023 तक ‘फॉर्च्यून 500’ की 16 कंपनियों का नेतृत्व भारतीय मूल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) कर रहे थे। इसके अनुसार समुदाय के लोग अमेरिका के लगभग 60 प्रतिशत होटलों के मालिक हैं और स्वास्थ्य सेवा से लेकर पाक कला तक अनेक क्षेत्रों में उन्होंने उल्लेखनीय पहचान बनाई है।

नोबेल पुरस्कार विजेता सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर और ‘फाइबर ऑप्टिक्स’ के जनक नरिंदर सिंह कपानी ने अपने क्रांतिकारी शोध के माध्यम से क्रमशः खगोल भौतिकी और वैश्विक दूरसंचार के क्षेत्र में बुनियादी बदलाव किए।

अमेरिका में भारतीय प्रवास की शुरुआत वर्ष 1790 में मानी जाती है, जब ‘मद्रास से आए एक अज्ञात व्यक्ति’ कप्तान जॉन गिबॉट के साथ मैसाचुसेट्स के सेलेम पहुंचे।

हालांकि, उस व्यक्ति की पहचान और पेशा आज भी रहस्य बने हुए हैं, लेकिन उन्होंने सेलेम में सर्दियों का समय बिताया। रेवरेंड विलियम बेंटले ने उनके आगमन का औपचारिक उल्लेख किया था और वर्ष 1791 में वह भारत लौट गए।

आनंदी गोपाल जोशी वर्ष 1886 में 21 वर्ष की आयु में पेनसिल्वेनिया के ‘विमेंस मेडिकल कॉलेज’ से चिकित्सा की डिग्री प्राप्त करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उनकी इस उपलब्धि ने अमेरिकी चिकित्सा जगत में दक्षिण एशियाई महिलाओं की प्रारंभिक उपस्थिति दर्ज कराई और सीमाओं से परे चिकित्सा शिक्षा हासिल करने के लिए अनेक पीढ़ियों की महिलाओं को प्रेरित किया।

वर्ष 1890 में एडुलजी सोराबजी अमेरिकी नागरिकता प्राप्त करने वाले शुरुआती दक्षिण एशियाई प्रवासियों में शामिल हुए।

वर्ष 1956 में दलीप सिंह सौंद अमेरिकी कांग्रेस के लिए निर्वाचित होने वाले पहले एशियाई-अमेरिकी और पहले सिख बने।

कैलिफोर्निया में जन्मी भारतीय मूल की डेमोक्रेट नेता कमला हैरिस जनवरी 2021 में अमेरिका की उपराष्ट्रपति पद की शपथ लेने वाली पहली महिला बनीं।

वर्ष 1964 में अमर बोस ने यह साबित किया कि भारतीय नेतृत्व वाले उद्यम वैश्विक स्तर पर तकनीकी और व्यावसायिक सफलता हासिल कर सकते हैं। उन्होंने दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित ऑडियो ब्रांडों में से एक की स्थापना की।

‘सन माइक्रोसिस्टम्स’ के सह-संस्थापक विनोद खोसला ने बाद में ‘खोसला वेंचर्स’ के माध्यम से अनेक उभरते उद्यमियों को सहयोग देकर निवेश के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण पहचान बनाई।

इसी क्रम में सत्य नडेला, सुंदर पिचाई और इंद्रा नूई जैसे भारतीय मूल की हस्तियों ने दुनिया की कई प्रमुख वैश्विक कंपनियों का नेतृत्व कर समुदाय की पहचान को नई ऊंचाई दी।

भाषा अमित सुरेश

सुरेश


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