शहमात The Big Debate: सुशासन पर फोकस भारी.. फिर ‘चिंतन’ की बारी! विपक्ष ने उठाए कई सवाल, क्या शिविर में मंत्रियों को मिलेगा नया टास्क?
सुशासन पर फोकस भारी.. फिर 'चिंतन' की बारी! विपक्ष ने उठाए कई सवाल, Sai Govt Organised Brainstorming Camp for Ministers
- 4-5 जुलाई को IIM रायपुर में चिंतन शिविर 3.0
- सुशासन और प्रशासनिक सुधार पर रहेगा फोकस
- विपक्ष ने पिछले शिविरों के नतीजों पर सवाल उठाए
रायपुरः CG Chintan Shivir छत्तीसगढ़ सरकार के तमाम मंत्रियों के काम-काज की समीक्षा और रिपोर्ट कार्ड पर बार-बार कयासों का दौर चलता रहा है, लेकिन साय सरकार ने बीते हर साल एक चिंतन शिविर लगाकर सरकार सिस्टम में एक्सपर्ट की राय और आधुनिक तकनीक के जरिए मॉनिटरिंग और कसावट की कवायद का दावा किया है। अब तीसरी बार से पहले विपक्ष पूछ रहा है कि पिछले 2 सालों के चिंतन-मंथन के जमीनी लाभ गिनाएं।
CG Chintan Shivir साय सरकार ने अपने कार्यों में आधुनिकता, नवाचार और पारदर्शिता लाने के लिए पूरे मंत्रिमंडल के साथ एक चिंतन शिविर प्लान किया है। रायपुर के भारतीय प्रबंधन संस्थान यानि IIM में चिंतन शिविर 3.0 में 4 और 5 जुलाई को, मुख्यमंत्री समेत कैबिनेट के सभी मंत्री चिंतन शिविर में शामिल होंगे, प्रदेश के मुख्यमंत्री का दावा है कि ये तीसरा साल होगा, इस तरह के शिविर में देश भर के विद्वान से गुड गवर्नेंस के टिप्स मिलते हैं, जिससे सरकारी तंत्र के संचालन में कसावट आती है।
इस शिविर का उद्देश्य है:-
- विभागों को ज्यादा दक्ष और आधुनिक बनाना
- प्रशासनिक प्रबंधन
- नीति निर्माण और सुशासन
- तकनीकी नवाचार, विकास का विजन
- ज्यादा पारदर्शी, जवाबदेह, तकनीक आधारित सिस्टम
- प्रमुख योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन
- विभागों में बेहतर समन्वय, प्रशासनिक सुधार
- विभागों की उपलब्धियों, योजनाओं की समीक्षा
विपक्ष ने कसा तंज (CG Chintan Shivir)
हालांकि, विपक्ष को ये शिविर बेमानी और सियासी नौटंकी लगता है। पूर्व पीसीसी चीफ धनेंद्र साहू ने तंज कसते हुए कहा कि बीते 2 साल से साय कैबिनेट चिंतन-मनन कर रहे हैं, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं है। आरोप पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने नसीहत देते हुए कहा कि पहले कांग्रेस के अपने नेताओं और शिविरों का ब्यौरा दे, बीजेपी की चिंता ना करें। 2023 में सरकार बनने के बाद, कई वरिष्ठों के होते हुए भी सरकार में नए और युवा चेहरों को शामिल किया गया। उनके पहले ट्रेनिंग सेशन से लेकर अब तीसरा चिंतन होने जा रहा है। विपक्ष सीधे-सीधे पूछ रहा है कि बीते 2 ट्रेनिंग और चिंतिन शिविर में क्या तय किया था और कितने पर अमल हुआ इसका हिसाब दिया जाए। सवाल भी यही है चिंतन, मंथन और ट्रेनिंग से सरकार और सरकारी तंत्र में कसावट आई, उसका कितना लाभ जनता को मिल सका?
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