वैज्ञानिक प्रगति के वैश्विक विमर्श को ‘संकीर्ण नजरिए’ से देखा गया: जयशंकर
वैज्ञानिक प्रगति के वैश्विक विमर्श को 'संकीर्ण नजरिए' से देखा गया: जयशंकर
(योषिता सिंह)
(तस्वीरों के साथ)
संयुक्त राष्ट्र, 12 मई (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गणित के क्षेत्र में भारतीय सभ्यता के योगदान पर आधारित एक प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए कहा कि दुनिया भर में वैज्ञानिक प्रगति को लंबे समय से ‘संकीर्ण नजरिए’ से देखा गया और उन ऐतिहासिक विकृतियों को ‘सुधारने’ की आवश्यकता है।
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में भारत के स्थायी मिशन द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी का शीर्षक ‘शून्य से अनंत तक – गणित में भारतीय सभ्यता का योगदान’ है। इसे भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) और इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी) के सहयोग से आयोजित किया गया है।
जयशंकर ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में अपनी तरह की इस पहली ऐतिहासिक प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए कहा, ‘जब हम संयुक्त राष्ट्र में एकत्रित होते हैं, तो अक्सर साझा विरासत की बात करते हैं। फिर भी यदि हम आधुनिक इतिहास के सफर को देखें, तो दुनिया भर में वैज्ञानिक प्रगति को वक्त और भूगोल की सीमाओं में बांधकर एक संकीर्ण नजरिए से देखा गया है।’
उद्घाटन समारोह में अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा, न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूत बिनय प्रधान, प्रिंसटन विश्वविद्यालय में गणित के प्रोफेसर और फील्ड्स मेडल विजेता मंजुल भार्गव के साथ-साथ कई देशों के राजदूत और राजनयिक उपस्थित थे।
विदेश मंत्री ने कहा, ‘जैसे-जैसे भू-राजनीतिक बदलावों से राजनीतिक और आर्थिक पुनर्संतुलन हो रहा है, यह अनिवार्य रूप से सांस्कृतिक पुनर्संतुलन का मार्ग भी प्रशस्त कर रहा है। यह विविध विमर्शों के लिए जगह बनाकर किया जाएगा, जिसमें हमारे अतीत की अधिक व्यापक समझ शामिल है।’
जयशंकर दो से 10 मई तक जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो की आधिकारिक यात्रा पर थे।
सोमवार को अपनी न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान उन्होंने इस प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, जो ‘समहिता’ (दक्षिण एशियाई पांडुलिपि इतिहास और पाठ्य संग्रह) परियोजना का हिस्सा है।
यह विशेष संवादात्मक प्रदर्शनी उन प्राचीन गणितीय अवधारणाओं पर प्रकाश डालती है जिनकी जड़ें भारत में हैं और जो आगे चलकर हजारों वर्षों में पूरी दुनिया में फैलीं, इनमें शून्य, दशमलव स्थान मान प्रणाली (डेसिमल प्लेस वैल्यू सिस्टम), बीजगणित और एल्गोरिदम से लेकर ग्रहों के मॉडल, खगोलीय गणना, क्रमचय-संचय (कॉम्बिनेटरिक्स), द्विआधारी गणना (बाइनरी एन्यूमरेशन) और रेखागणित का ‘बौधायन-पायथागोरस प्रमेय’ शामिल हैं।
प्रदर्शनी में आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त और भास्कर से लेकर केरल के खगोल विज्ञान और गणित संप्रदाय तक के विद्वानों के योगदान को दर्शाया गया है।
जयशंकर ने कहा, ‘‘हम जो यहां एकत्र हुए हैं, वे केवल दीवार पर लिखे अंकों को नहीं देख रहे हैं। हम उस सभ्यता का अवलोकन कर रहे हैं जिसका जन्म भारत की बौद्धिक मिट्टी में हुआ था। यह एक ऐसी विरासत है जिसका संबंध जितना अतीत से है, उतना ही भविष्य से भी है।’’
विदेश मंत्री ने कहा कि यह प्रदर्शनी दर्शकों को ‘सहस्राब्दियों की एक ऐसी यात्रा पर ले जाएगी, जहां वे देख सकेंगे कि भारतीय सभ्यता की गणितीय खोजों ने किस तरह दुनिया भर का सफर तय किया और कैसे वे आज भी हमारे आधुनिक जीवन को आकार दे रही हैं।’
उन्होंने कहा, ‘जब आप इस प्रदर्शनी को देखेंगे, तो आप पाएंगे कि वह ‘कोड’, जो हमारे वर्तमान तकनीकी युग का आधार है, सदियों पहले भारत में ही संकल्पित किया गया था।’
यह प्रदर्शनी संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 15 मई तक आयोजित की गई है। इसका उद्देश्य यह प्रदर्शित करना है कि भारतीय उपमहाद्वीप में जन्मे गणितीय विचार आज भी प्रासंगिक हैं और वैश्विक डिजिटल ढांचे व कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का आधार हैं।
भाषा सुमित शोभना
शोभना

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