भारत निर्वासन से पहले अलग रखे गए हिंदू-मुस्लिम दंपति को ब्रिटेन में हर्जाने की उम्मीद

भारत निर्वासन से पहले अलग रखे गए हिंदू-मुस्लिम दंपति को ब्रिटेन में हर्जाने की उम्मीद

भारत निर्वासन से पहले अलग रखे गए हिंदू-मुस्लिम दंपति को ब्रिटेन में हर्जाने की उम्मीद
Modified Date: September 17, 2026 / 01:25 pm IST
Published Date: September 17, 2026 1:25 pm IST

अदिति खन्ना

लंदन, 17 सितंबर (भाषा) अंतरधार्मिक विवाह के कारण उत्पीड़न की आशंका जताते हुए ब्रिटेन में शरण मांगने वाले एक मुस्लिम व्यक्ति और उसकी हिंदू पत्नी ने हिरासत के दौरान एक-दूसरे से अलग किए जाने के खिलाफ दायर कानूनी मामले में जीत हासिल की है।

दोनों को वापस भारत भेजे जाने से पहले अलग-अलग हिरासत में रखा गया था और इसके लिये उन्हें हर्जाना मिल सकता है।

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश साइमन टिंक्लर ने मंगलवार को फैसला सुनाया कि हिरासत के दौरान दंपति को अलग रखने से उनके पारिवारिक जीवन के अधिकार का उल्लंघन हुआ और गृह मंत्रालय को मानवाधिकारों पर यूरोपीय संधि (ईसीएचआर) के अनुच्छेद आठ के तहत हर्जाना देना पड़ सकता है।

न्यायमूर्ति टिंक्लर ने अपने फैसले में कहा कि दंपति को आव्रजन हिरासत केंद्र में पुरुष और महिला आवास क्षेत्रों में अलग-अलग रखा गया था।

फैसले में कहा गया, ‘‘याचिकाकर्ता पति-पत्नी थे। जब वे आव्रजन हिरासत केंद्र में थे, उस दौरान उन्हें क्रमश: पुरुष और महिला आवास क्षेत्रों में अलग-अलग रखा गया।’’

अदालत ने कहा कि दंपति ने इसे पारिवारिक जीवन के अधिकारों में गैरकानूनी हस्तक्षेप करार दिया था, जो उन्हें अनुच्छेद आठ के तहत प्राप्त हैं, और इस आधार पर उनकी हिरासत के दौरान अलगाव को गैरकानूनी हस्तक्षेप घोषित करने की मांग स्वीकार की जाती है।

हालांकि, अदालत में हुई सुनवाई में हर्जाने की राशि तय नहीं की गई है। हर्जाना, यदि कोई बनता है, तो उसकी राशि निर्धारित करने के लिए मामला अब निचली अदालत में भेजा जाएगा।

शरण मामलों में नाम जाहिर न करने की व्यवस्था के कारण पत्नी को एफएनबी और पति को एफएनएन के नाम से संबोधित किया गया है।

दंपति ने ‘‘अंतरधार्मिक विवाह के कारण भारत में उत्पीड़न की आशंका’’ के आधार पर ब्रिटेन में शरण का दावा किया था।

पत्नी 2022 में छात्र वीजा पर ब्रिटेन पहुंची थी और बाद में उसका पति उसके आश्रित के तौर पर ब्रिटेन आया।

गृह मंत्रालय ने पिछले साल अगस्त में उनके शरण के दावे को खारिज कर दिया था। उनके मानवाधिकार और मानवीय संरक्षण संबंधी दावों को ‘‘स्पष्ट रूप से निराधार’’ बताते हुए प्रमाणित किया गया था। इसके परिणामस्वरूप उन्हें अपील का अधिकार नहीं मिला।

दंपति को भारत भेजे जाने की प्रक्रिया के तहत 11 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया। पत्नी को महिला आवास क्षेत्र और पति को पुरुष आवास क्षेत्र में रखा गया।

फैसले के अनुसार, उन्हें अलग रखने का मुख्य कारण यह बताया गया कि उन्हें जल्द ही भारत भेजा जाना था।

भाषा मनीषा रंजन

रंजन

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