हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य कैसे खुलेगा? तीन संभावित परिदृश्य

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य कैसे खुलेगा? तीन संभावित परिदृश्य

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य कैसे खुलेगा? तीन संभावित परिदृश्य
Modified Date: April 7, 2026 / 12:25 pm IST
Published Date: April 7, 2026 12:25 pm IST

( डोनाल्ड रॉथवेल, ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी )

कैनबरा, सात अप्रैल (द कन्वरसेशन) हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर संकट एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की मांग की है, अन्यथा अमेरिका सैन्य हमले और तेज कर सकता है।

हालांकि जलडमरूमध्य पूरी तरह से नौवहन के लिए बंद नहीं हुआ है, लेकिन इसमें भारी व्यवधान आया है और जहाजों की आवाजाही लगभग नहीं के बराबर हो गई है। यह जलमार्ग आर्थिक और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि फारस की खाड़ी से बाहर निकलने का यही एकमात्र रास्ता है और समस्त समुद्री यातायात इसी मार्ग से गुजरता है।

इस प्रमुख नौवहन अवरोध बिंदु के उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान है। इसकी चौड़ाई मात्र 29 समुद्री मील (लगभग 53 किलोमीटर) है और इसमें आने-जाने वाले जहाजों के लिए करीब दो-दो मील चौड़े अलग-अलग चैनल हैं, साथ ही दो मील का एक बफर क्षेत्र भी है। यह पूरा क्षेत्र ईरानी जलक्षेत्र में आता है।

वर्ष 2025 में इस जलडमरूमध्य से प्रतिदिन लगभग दो करोड़ बैरल कच्चे तेल और तेल उत्पादों का परिवहन हुआ, जो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 25 प्रतिशत है और यूरोप, एशिया तथा ऑस्ट्रेलिया सहित कई बाजारों तक पहुंचा।

ऐसे में सवाल यह है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य का भविष्य क्या होगा और इसे कैसे फिर से खोला जा सकता है। इसके तीन संभावित कानूनी, भू-राजनीतिक और सैन्य परिदृश्य सामने आते हैं।

पहला परिदृश्य: युद्धविराम

पहला विकल्प युद्धविराम है। लेकिन यह तब हो सकता है जब ईरान, ट्रंप की मांग मानते हुए जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमत हो जाए, भले ही यह स्थायी युद्धविराम तक पहुंचने के लिए एक अस्थायी कदम ही क्यों न हो।

ऐसा होने पर जलडमरूमध्य पर मुख्य नियंत्रण ईरान का ही रहेगा। हालांकि शत्रुता समाप्त हो सकती है, लेकिन इस बात की पूरी संभावना है कि ईरान वहां से गुजरने वाले विदेशी जहाजों पर शुल्क लगाने की कोशिश करे।

हाल के हफ्तों में ऐसी खबरें सामने आई हैं कि कुछ जहाजों से जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकलने के लिए शुल्क वसूला गया है। इसे युद्धकालीन अस्थायी उपाय के रूप में देखा जा सकता है, जिसे ईरान ने संकट में फंसी शिपिंग कंपनियों से हासिल किया होगा।

अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत शांति काल में किसी अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाना प्रतिबंधित है, लेकिन पूरी संभावना है कि अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान इन नियमों को ज्यादा महत्व नहीं दे रहा।

संभावना यह भी है कि भविष्य में किसी भी व्यवस्था के तहत ईरान इस तरह का शुल्क तंत्र जारी रखने की कोशिश करे। शुरुआत में इसका बोझ अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग पर पड़ेगा, जो जहाजों की आवाजाही बनाए रखने के लिए अनिच्छा के बावजूद भुगतान कर सकता है।

इन अतिरिक्त लागतों को बाद में बाजार में समायोजित किया जाएगा, जिससे खाड़ी क्षेत्र से होने वाले निर्यात की कीमतों में वृद्धि होना तय है।

वर्तमान कूटनीतिक और सैन्य प्रयासों को देखते हुए यह सबसे संभावित परिदृश्य माना जा रहा है, हालांकि यह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर उसकी रियायतों पर निर्भर करेगा।

दूसरा परिदृश्य: अमेरिकी जमीनी हस्तक्षेप

दूसरा संभावित परिदृश्य यह है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ हवाई और मिसाइल हमलों से आगे बढ़कर जमीनी सैन्य अभियान शुरू करे।

खाड़ी क्षेत्र में करीब 5,000 अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों की तैनाती के साथ कुल संख्या लगभग 50,000 तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे संकेत मिलता है कि अमेरिका इस विकल्प के लिए तैयार है।

ये भी अटकलें हैं कि क्या अमेरिका पहले खार्ग द्वीप पर कब्जा करेगा, जहां से ईरान के लगभग 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात होता है। यह द्वीप खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी जमीनी और समुद्री अभियानों के लिए एक आधार बन सकता है।

हालांकि खार्ग द्वीप हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में स्थित नहीं है और इसे कब्जे में लेने से जलडमरूमध्य को तुरंत खोलने में कोई प्रत्यक्ष सैन्य लाभ नहीं मिलेगा।

जलडमरूमध्य को खोलने के लिए अमेरिका को बड़े पैमाने पर नौसैनिक बल तैनात करना होगा, ताकि पहले इसे समुद्री बारूदी सुरंगों जैसे खतरों से सुरक्षित किया जा सके और फिर वाणिज्यिक जहाजों को दोनों दिशाओं में सुरक्षित मार्ग प्रदान किया जा सके।

हाल के बयानों से संकेत मिलता है कि ट्रंप अपने सहयोगी देशों के समर्थन के बिना यह कदम उठाने के इच्छुक नहीं हैं। अभी तक ऐसा समर्थन तो नहीं मिला है, बल्कि कुछ मामलों में इसका विरोध भी हुआ है।

ऐसे में, भले ही अमेरिका अपने अभियान को और तेज करने में सक्षम हो, लेकिन इससे जुड़े सैन्य और राजनीतिक जोखिमों के कारण इस विकल्प की संभावना फिलहाल कम दिखाई देती है।

तीसरा परिदृश्य: युद्ध समाप्त, लेकिन मार्ग बंद

तीसरा परिदृश्य यह है कि अमेरिका युद्ध समाप्त कर दे, लेकिन जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवाजाही बहाल नहीं हो पाए।

इस समस्या के समाधान के लिए समान विचारधारा वाले देशों के गठबंधन की संभावना बढ़ रही है। 11 मार्च को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव 2817 पारित किया, जिसमें खाड़ी क्षेत्र और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया।

एक नया प्रस्ताव पारित कर संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को सामूहिक कार्रवाई की अनुमति दी जा सकती है, जिससे जलडमरूमध्य को सुरक्षित किया जा सके और अंतरराष्ट्रीय नौवहन को फिर से बहाल किया जा सके। यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र के अधिदेश के तहत एक नौसैनिक गठबंधन द्वारा की जा सकती है, जो ईरानी हमलों से अपनी रक्षा करने में सक्षम हो।

ब्रिटेन ने दो अप्रैल को अपने सहयोगी देशों के साथ इस दिशा में चर्चा का समन्वय किया, जिसमें ऑस्ट्रेलिया भी शामिल था।

हालांकि ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और अन्य यूरोपीय तथा एशियाई देश, जैसे चीन, इस तरह के किसी संयुक्त अभियान में सक्रिय संघर्ष के दौरान शामिल नहीं होना चाहेंगे। वे तब कदम उठाना अधिक सुरक्षित समझेंगे जब अमेरिका अपनी सेनाएं हटा ले और प्रमुख पक्षों के बीच शत्रुता समाप्त हो जाए।

यदि ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा गतिरोध बना रहता है और ट्रंप विजय की घोषणा कर अमेरिकी सेना को वापस बुला लेते हैं, तो यह विकल्प अंतिम उपाय के रूप में सामने आ सकता है।

स्पष्ट है कि युद्ध से पहले की स्थिति अब हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में वापस नहीं बनेगी। यदि शत्रुता समाप्त भी हो जाती है और शांति समझौता हो जाता है, तब भी भौगोलिक वास्तविकताओं के कारण ईरान का इस जलमार्ग पर नियंत्रण बना रहेगा, जिसे दुनिया को स्वीकार करना होगा।

( द कन्वरसेशन ) मनीषा वैभव

वैभव


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