वाशिंगटन, 23 फरवरी (भाषा) भारतीय मूल के अमेरिका के पूर्व कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल नील कात्याल ने कहा कि यदि ट्रंप के ‘टैरिफ’ (शुल्क) वास्तव में “इतने अच्छे विचार” हैं, तो उन्हें इन्हें लागू कराने के लिए अमेरिकी कांग्रेस (संसद) को मनाने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए।
कात्याल ने कहा कि अमेरिकी संविधान के अनुसार इतने व्यापक शुल्क उपायों को लागू करने के लिए राष्ट्रपति को विधायी स्वीकृति (कांग्रेस की मंजूरी) अवश्य लेनी चाहिये।
कात्याल की यह टिप्पणी शुक्रवार को अमेरिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा ट्रंप के आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए व्यापक वैश्विक शुल्क को रद्द करने के बाद आई है। इन शुल्कों में, अन्य देशों पर लगाए गए पारस्परिक ‘टैरिफ’ भी शामिल हैं।
शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाया कि कांग्रेस (अमेरिकी संसद) की मंजूरी के बिना आयात शुल्क लगाने के लिए ट्रंप द्वारा आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करना अवैध था।
पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल के रूप में सेवा दे चुके कात्याल ने छोटे व्यवसायों की ओर से दायर शुल्क मामले की पैरवी की और मुकदमा जीता।
शनिवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, भारतीय मूल के वकील ने कहा कि अगर ट्रंप प्रशासन का मानना है कि व्यापक शुल्क आवश्यक हैं, तो उपयुक्त संवैधानिक तरीका यह होगा कि आपातकालीन प्रावधानों का सहारा लेने के बजाय प्रस्ताव को चर्चा और मंजूरी के लिए अमेरिकी संसद में रखा जाए।
कात्याल का जन्म 1970 में शिकागो में हुआ था। उनकी मां एक शिशु रोग विशेषज्ञ हैं और पिता एक इंजीनियर थे। उनके माता-पिता दोनों भारत से अमेरिका आए प्रवासी (इमिग्रेंट) थे।
उन्होंने शुल्क लगाने के लिए आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करने के ट्रंप प्रशासन के कदम के कानूनी आधार पर भी सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के लिए ‘‘15 प्रतिशत वाले विधान (धारा 122) का सहारा लेना मुश्किल होगा’’ क्योंकि पूर्व के एक मामले में न्याय विभाग स्वयं यह दलील दे चुका है कि यह कानून व्यापार घाटे से जुड़ी चिंताओं पर लागू नहीं होता।
भाषा सुभाष दिलीप
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