भारत सीईएलएसी को वैश्विक व्यवस्था को और प्रतिनिधित्वकारी बनाने में साझेदार के रूप पर देखता है:जयशंकर

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भारत सीईएलएसी को वैश्विक व्यवस्था को और प्रतिनिधित्वकारी बनाने में साझेदार के रूप पर देखता है:जयशंकर

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  • Publish Date - September 23, 2026 / 12:33 PM IST,
    Updated On - September 23, 2026 / 12:33 PM IST

(योशिता सिंह)

संयुक्त राष्ट्र, 23 सितंबर (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत और लातिन अमेरिकी तथा कैरिबियाई देशों के क्षेत्रीय समूह की यह साझा दिलचस्पी है कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के भविष्य को तय करने में ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज अधिक मजबूत हो।

उन्होंने यह बात यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर आयोजित भारत-लातिन अमेरिकी और कैरिबियाई देशों के समुदाय (सीईएलएसी) के विदेश मंत्रियों की बैठक में कही।

जयशंकर ने मंगलवार को अपने संबोधन में कहा, ‘‘भारत सीईएलएसी को सिर्फ एक क्षेत्रीय समूह के तौर पर नहीं, बल्कि अधिक प्रतिनिधित्व वाली, संतुलित और समावेशी वैश्विक व्यवस्था को आकार देने में एक बहुत अहम साझेदार के तौर पर देखता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमें एक-दूसरे से बहुत कुछ सीखना है। हमारे पास एक-दूसरे को देने के लिए बहुत कुछ है और सबसे बड़ी बात यह है कि हमारी साझा दिलचस्पी इस बात में है कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के भविष्य को तय करने में ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज मजबूत हो।’’

जयशंकर ने उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन के साथ मिलकर भारत-सीईएलएसी के विदेश मंत्रियों की बैठक की सह-अध्यक्षता की। इस बैठक में सीईएलएसी के 30 सदस्य शामिल हुए, जो अब तक का सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल था।

जयशंकर ने बैठक में कहा कि भारत, चिली के साथ प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता, पेरू के साथ मुक्त व्यापार समझौता और ‘मर्कोसुर’ के साथ वरीयता प्राप्त व्यापार समझौता के विस्तार के जरिए सीईएलएसी क्षेत्र के साथ ‘मजबूत और संतुलित’ आर्थिक साझेदारी बनाने की कोशिश कर रहा है।

मर्कोसुर दक्षिण अमेरिका का एक प्रमुख क्षेत्रीय व्यापार संगठन और आर्थिक खंड है जिसकी स्थापना 26 मार्च 1991 को असंसियन की संधि के माध्यम से हुई थी।

जयशंकर ने कहा,‘‘हमारा मकसद ऐसे ढांचे तैयार करना है जो दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हों। हम एक-दूसरे की संवेदनाओं और प्राथमिकताओं का ध्यान रखते हुए तेजी से आगे बढ़ना चाहते हैं।’’

सीईएलएसी एक क्षेत्रीय मंच है जो सभी लातिन अमेरिकी और कैरिबियाई सभी देशों को एक साथ लाता है।

जयशंकर ने भारत और सीईएलएसी देशों के बीच व्यापार एवं विकास के सहयोग को और मज़बूत करने की जरूरत पर जोर दिया। इसमें विकास और साझेदारी के लिए प्रशिक्षण और मानव संसाधन को एक पुल के तौर पर इस्तेमाल करना, और डिजिटल स्पेस, एआई और नवोन्मेष के क्षेत्र में मौकों का लाभ उठाना शामिल है।

जयशंकर ने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ के साथ भारत का जुड़ाव उसके राष्ट्रीय हितों से आगे बढ़कर है और यह साझा समृद्धि के प्रति उसकी एकजुटता तथा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि चाहे कैरिबियाई देशों में आजीविका का समर्थन करने वाली परियोजनाएं हों या चक्रवाती तूफान ‘मेलिसा’ से हुई तबाही के बाद मदद पहुंचाना रहा हो, भूकंप के बाद वेनेजुएला भेजे गए सैन्य अस्पताल हों या विभिन्न लातिन अमेरिकी देशों को भेजी गई दवाएं हों, ये सभी इसी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

भाषा राजकुमार संतोष

संतोष