आदित्यनाथ ने कानून व्यवस्था, किसानों को लेकर पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा

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आदित्यनाथ ने कानून व्यवस्था, किसानों को लेकर पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा

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  • Publish Date - September 23, 2026 / 01:08 PM IST,
    Updated On - September 23, 2026 / 01:08 PM IST

लखनऊ, 23 सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए बुधवार को कहा कि 2017 से पहले की तुलना में कानून व्यवस्था बेहतर है और किसानों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं।

लखनऊ में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक कर्फ्यू लगता था, दंगे होते थे और अराजकता का माहौल था और यहां तक कि टैक्सी और तिपहिया वाहन के ड्राइवर भी आपराधिक तत्वों से घबराते थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि कभी कभी ड्राइवरों को मारपीट कर अपराधी उनके वाहन उठा ले जाया करते थे और खड़ी टैक्सियों के टायर तक निकाल लिए जाते थे।

उन्होंने कहा, ‘‘दोपहिया, तिपहिया और चार पहिया वाहनों को तो छोड़ दें, यदि कभी कोई भैंसा गाड़ी पर यात्रा कर रहा होता और चाय पीने नीचे उतरता तो लौटकर आने पर केवल गाड़ी खड़ी मिलती और भैंसा गायब हो जाता।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज कहीं कोई कर्फ्यू नहीं है, कहीं कोई दंगे नहीं है और कहीं चोरी नहीं होती क्योंकि हमने 14 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं।

आदित्यनाथ ने किसानों की समस्याओं से निपटने के पूर्ववर्ती सरकारों के तरीकों पर निशाना साधते हुए कहा कि छोटे एवं सीमांत किसानों की उपेक्षा की जाती थी। 2017 में उनकी सरकार के आने के बाद सबसे पहले 86 लाख किसानों का 36,000 करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया गया।

मुख्यमंत्री ने यह दावा भी किया कि सिंचाई परियोजनाएं दशकों तक लंबित रहीं। सरयू नहर परियोजना को पूरा होने में करीब 50 वर्ष लग गए। उनकी सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में 24 लाख हेक्टेयर भूमि के लिए सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।

गन्ना भुगतान को लेकर आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने किसानों को उनके गन्ने के बकाये का भुगतान कराने के लिए वर्षों प्रतीक्षा कराई और 29 चीनी मिलें बंद हो गईं।

उन्होंने कहा कि इसके उलट, उनकी सरकार वर्तमान में 122 चीनी मिलें चला रही है और इनमें से 100 से अधिक मिलें चार दिनों के भीतर गन्ना बकाए का भुगतान कर रही हैं। 3.30 लाख करोड़ रुपये गन्ना भुगतान पिछले नौ वर्षों में किया गया है।

भाषा किशोर राजेंद्र मनीषा

मनीषा