अमेरिका की एक महीने की यात्रा पूरी कर पुर्तगाल के लिए रवाना हुआ आईएनएस सुदर्शिनी

अमेरिका की एक महीने की यात्रा पूरी कर पुर्तगाल के लिए रवाना हुआ आईएनएस सुदर्शिनी

अमेरिका की एक महीने की यात्रा पूरी कर पुर्तगाल के लिए रवाना हुआ आईएनएस सुदर्शिनी
Modified Date: July 27, 2026 / 01:01 pm IST
Published Date: July 27, 2026 1:01 pm IST

(सागर कुलकर्णी)

वाशिंगटन, 27 जुलाई (भाषा) भारतीय नौसेना का नौकायन पोत सुदर्शिनी अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के समारोहों में भाग लेने के लिए एक महीने की यात्रा पूरी करने के बाद अब पुर्तगाल के लिए रवाना हो गया है।

रक्षा मंत्रालय ने दिल्ली में जारी एक बयान में कहा, ‘‘भारतीय नौसेना का नौकायन प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी ‘लोकायन-26’ अभियान के तहत 25 जुलाई को अमेरिका के बोस्टन से रवाना हुआ।’’

बयान में कहा गया है कि आईएनएस सुदर्शिनी अब पुर्तगाल के अजोरेस द्वीपसमूह स्थित पोंटा डेलगाडा के लिए रवाना हो चुका है और वैश्विक मंच पर भारत की समुद्री शक्ति, पेशेवर दक्षता और सद्भावना के प्रतीक के रूप में अपनी यात्रा जारी रखेगा।

अमेरिका में प्रवास के दौरान सुदर्शिनी ने प्रतिष्ठित ‘सेल-250’ समारोह और ‘इंटरनेशनल नेवल रिव्यू-250’ में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उसने भारत की समृद्ध समुद्री विरासत का प्रदर्शन करने के साथ-साथ पेशेवर एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से विभिन्न देशों की नौसेनाओं के साथ साझेदारी को भी मजबूत किया।

पोत ने नॉरफॉक, बाल्टीमोर, न्यूयॉर्क और बोस्टन में आयोजित ‘सेल-250’ कार्यक्रमों में भाग लिया तथा विभिन्न देशों के गणमान्य व्यक्तियों, भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों और अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी की।

रक्षा मंत्रालय ने कहा, ‘‘इन गतिविधियों ने समुद्री सहयोग और मित्रता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को एक बार फिर रेखांकित किया।’’

कमांडर रविकांत नंदूरी के नेतृत्व में आईएनएस सुदर्शिनी ने ‘सेल-250 मैरीलैंड’ और ‘एयरशो बाल्टीमोर’ में भी भाग लिया। इन आयोजनों में अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में विभिन्न देशों के ऊंचे मस्तूल वाले पारंपरिक नौकायन पोत, सैन्य पोत और हवाई प्रदर्शन एक साथ आयोजित किए गए।

सुदर्शिनी तीन मस्तूल वाला बार्क प्रकार का नौकायन पोत है। इसकी लंबाई 54 मीटर है तथा इसमें 20 पाल, लगभग 7.5 किलोमीटर लंबी रस्सियां और 1.5 किलोमीटर लंबी तार वाली रस्सियां लगी हैं।

पाल और इंजन, दोनों के सहारे संचालित किए जा सकने वाले इस पोत पर पांच अधिकारी, 31 नौसैनिक और प्रशिक्षण के लिए सवार 30 कैडेट तैनात रहते हैं। यह पोत एक बार में कम से कम 20 दिन तक समुद्र में रह सकता है।

आईएनएस सुदर्शिनी ने इस वर्ष 20 जनवरी को कोच्चि से ‘लोकायन-26’ नामक अंतरमहासागरीय अभियान शुरू किया था। इस अभियान का उद्देश्य समुद्री संपर्क को बढ़ावा देना, अंतरराष्ट्रीय सद्भावना को मजबूत करना और भारत की समृद्ध समुद्री परंपराओं का प्रदर्शन करना है।

भाषा गोला रंजन

रंजन


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