Iran warns America: ईरान की अमेरिका को साफ चेतावनी.. खामेनेई के खिलाफ खोला मोर्चा तो भुगतने पड़ेंगे परिणाम, ये भी कहा..

Iran warns America: ट्रंप की इन टिप्पणियों के बाद जनरल अबुलफजल शेखरची ने यह चेतावनी दी। (Iran warns America) ईरान की खराब अर्थव्यवस्था को लेकर 28 दिसंबर को शुरू हुए प्रदर्शनों पर अधिकारियों द्वारा की गई हिंसक कार्रवाई के बाद से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। 

Iran warns America: ईरान की अमेरिका को साफ चेतावनी.. खामेनेई के खिलाफ खोला मोर्चा तो भुगतने पड़ेंगे परिणाम, ये भी कहा..

Iran warns America || Chatham House file image

Modified Date: January 21, 2026 / 07:27 am IST
Published Date: January 21, 2026 6:15 am IST
HIGHLIGHTS
  • खामेनेई पर कार्रवाई की धमकी पर ईरान की चेतावनी
  • ट्रंप की टिप्पणी से अमेरिका-ईरान तनाव तेज
  • प्रदर्शनों और आर्थिक संकट से हालात बिगड़े

दुबई: ईरान के सशस्त्र बलों के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ किसी प्रकार की कोई भी कार्रवाई नहीं करने की चेतावनी दी। ट्रंप ने खामेनेई के लगभग 40 वर्षों के शासन को समाप्त करने का आह्वान किया था, (Iran warns America) जिसके कुछ दिनों बाद यह चेतावनी आई है।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर

जनरल अबुलफजल शेखरची ने कहा, “ट्रंप जानते हैं कि अगर हमारे नेता की ओर कोई भी हाथ बढ़ाया गया, तो हम न केवल उस हाथ को काट देंगे बल्कि उनकी दुनिया को भी आग लगा देंगे।” ट्रंप ने शनिवार को ‘पॉलिटिको’ को दिए एक साक्षात्कार में खामेनेई को ‘एक बीमार व्यक्ति’ बताया था और कहा था कि ‘उन्हें अपने देश को ठीक से चलाना चाहिए और लोगों की हत्या करना बंद करना चाहिए’। ट्रंप ने कहा था कि ईरान में नए नेतृत्व की तलाश का समय आ गया है।

ट्रंप की इन टिप्पणियों के बाद जनरल अबुलफजल शेखरची ने यह चेतावनी दी। (Iran warns America) ईरान की खराब अर्थव्यवस्था को लेकर 28 दिसंबर को शुरू हुए प्रदर्शनों पर अधिकारियों द्वारा की गई हिंसक कार्रवाई के बाद से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है।

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ट्रंप ने फिर दिया खुद को श्रेय

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर खुद को परमाणु शक्ति संपन्न पड़ोसी देशों भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष खत्म कराने का श्रेय दिया है। उन्होंने यह दावा भी किया कि नोबेल शांति पुरस्कार नॉर्वे के नियंत्रण में है और यह सम्मान उन्हें मिलना चाहिए, क्योंकि उन्होंने आठ युद्ध खत्म कराए और लाखों लोगों की जान बचाई।

उन्होंने यह भी कहा कि भले ही उन्हें पुरस्कार की परवाह न हो, (Iran warns America) लेकिन उन्हें लोगों की जान बचाने की फिक्र है।

ट्रंप ने सोमवार को मियामी में एक कॉलेज फुटबॉल चैंपियनशिप मैच में भाग लेने के बाद पत्रकारों से कहा, “मुझे नोबेल पुरस्कार की परवाह नहीं है… एक बहुत ही नेक महिला को लगा कि मैं इसके योग्य हूं और वह सचमुच चाहती थी कि मुझे नोबेल पुरस्कार मिले। मैं इसके लिए उनका आभारी हूं। अगर कोई सोचता है कि नॉर्वे नोबेल पुरस्कार को नियंत्रित नहीं करता, तो वह सरासर गलत है। उनका एक बोर्ड है, लेकिन वह नॉर्वे द्वारा नियंत्रित है, और नॉर्वे जो भी कहे, मुझे उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।”

पिछले सप्ताह, वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ में 2025 में मिला नोबेल शांति पुरस्कार ट्रंप को प्रदान किया, जिसे ट्रंप ने “आपसी सम्मान का एक अद्भुत उदाहरण” बताया। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उन्होंने “लाखों लोगों की जान बचाई है”।

उन्होंने कहा, “ आप भारत, पाकिस्तान… दो परमाणु शक्तियों के मामले को देखें। आप उन कई देशों को देखें जो 30, कुछ मामलों में 35 साल के युद्ध में उलझे हुए हैं। मैंने यह कर दिखाया। हमने आठ युद्ध रोके, और शायद हम नौवें युद्ध को भी बहुत जल्द रोक देंगे।” ट्रंप ने कई बार भारत-पाकिस्तान संघर्ष को रोकने का श्रेय खुद को दिया है। उन्होंने पिछले साल 10 मई से लेकर अब तक लगभग 80 बार यह दावा किया है। (Iran warns America) 10 मई को उन्होंने सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि वाशिंगटन की मध्यस्थता में हुई बातचीत के बाद दोनों देश “पूर्ण व तत्काल” संघर्ष विराम पर सहमत हो गए हैं। भारत किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से लगातार इनकार करता रहा है।

ट्रंप ने यह भी कहा है कि इतिहास में नोबेल शांति पुरस्कार के लिए उनसे अधिक योग्य कोई नहीं है। उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की इस बात के लिए आलोचना की है कि उन्हें पदभार संभालने के तुरंत बाद 2009 में यह पुरस्कार दिया गया, जबकि उन्होंने “कुछ भी नहीं किया”। ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत कई वैश्विक नेताओं को शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। शांति बोर्ड को संयुक्त राष्ट्र के प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जा रहा है। यह गाजा में स्थायी शांति लाने की दिशा में काम करेगा और “वैश्विक संघर्ष” को हल करने के लिए एक “साहसिक नए दृष्टिकोण” के तहत आगे बढ़ेगा।

जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने उनके ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने से इनकार कर दिया है, तो उन्होंने जवाब दिया, “खैर, कोई उन्हें नहीं चाहता क्योंकि वह बहुत जल्द पद से हट जाएंगे। ठीक है… मैं उनकी वाइन और शैंपेन पर 200 प्रतिशत शुल्क लगा दूंगा, और वह शामिल हो जाएंगे। लेकिन अगर उन्होंने ऐसा कहा है तो उन्हें शामिल होने की जरूरत नहीं है। (Iran warns America) शायद आप मुझे थोड़ा अलग तरीके से बता रहे हैं, लेकिन अगर उसने सच में ऐसा कहा है… तो वह कुछ महीनों में सत्ता से हट जाएगा।”

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