गाजा में इजराइली हमले युद्ध अपराध के दायरे में आ सकते हैं : संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख

गाजा में इजराइली हमले युद्ध अपराध के दायरे में आ सकते हैं : संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख

गाजा में इजराइली हमले युद्ध अपराध के दायरे में आ सकते हैं : संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख
Modified Date: November 29, 2022 / 08:10 pm IST
Published Date: May 27, 2021 3:15 pm IST

जिनेवा, 27 मई (एपी) संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रमुख ने बृहस्पतिवार को कहा कि हमास चरमपंथी समूह शासित गाजा पट्टी में 11 दिन तक चले युद्ध में, हो सकता है कि इजराइली सैन्य बलों ने युद्ध अपराधों को अंजाम दिया हो। इजराइल से सैन्य कार्रवाई के लिए एक स्वतंत्र जांच कराने की अनुमति भी देने को कहा गया है।

मिशेल बैचलेट की यह टिप्पणी तब आई है जब संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष मानवाधिकार निकाय ने इस महीने हुई जंग में फलस्तीनियों की दुर्दशा पर चर्चा के लिए एक दिवसीय विशेष सत्र की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि संघर्ष के दौरान हमास की ओर से अंधाधुंध रॉकेट दागना भी युद्ध के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन था।

मानवाधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र की उच्चायुक्त ने मानवाधिकार परिषद में ‘‘2014 के बाद से शत्रुता के अत्यधिक बढ़ने’’ के घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा दिया। पिछले हफ्ते संघर्ष विराम होने से पहले गाजा पट्टी में बड़े पैमाने पर बर्बादी एवं मौत हुई थी।

दोनों पक्षों के बीच 11 दिनों तक चले संघर्ष में गाजा में 66 बच्चों और 39 महिलाओं समेत 248 लोगों की मौत हो गयी। वहीं, इजराइल में भी दो बच्चे समेत 12 लोगों ने जान गंवाई।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे घनी आबादी वाले इलाकों में हवाई हमलों से आम नागरिक बड़ी संख्या में हताहत हुए, साथ ही असैन्य आधारभूत ढांचे की बड़े पैमाने पर तबाही हुई।’’

बैचलेट ने कहा कि अगर नागरिकों पर इस तरह की कार्रवाई होती है तो ‘ऐसे हमले युद्ध अपराध के दायरे में आएंगे।’’ ऐसी स्थिति में उन्होंने इजराइल से जवाबदेही सुनिश्चित करने का अनुरोध करते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पारदर्शी, निष्पक्ष जांच कराने को कहा।

हमास की चाल की तरफ स्पष्ट रूप से इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि घनी आबादी वाले नागरिक इलाकों में सैन्य पहुंच का पता लगाना या उनसे हमले शुरू करवाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन है।

बैचलेट ने कहा कि हमास की तरफ से अंधाधुंध रॉकेट दागे गए और नागरिक तथा सैन्य प्रतिस्ठानों में भेद कर पाने में उसकी विफलता स्पष्ट रूप से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन है।

एपी आशीष उमा

उमा


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