इज़राइली संसद में हत्या के दोषी फलस्तीनियों के लिए मृत्युदंड कानून पारित

इज़राइली संसद में हत्या के दोषी फलस्तीनियों के लिए मृत्युदंड कानून पारित

इज़राइली संसद में हत्या के दोषी फलस्तीनियों के लिए मृत्युदंड कानून पारित
Modified Date: March 31, 2026 / 02:45 pm IST
Published Date: March 31, 2026 2:45 pm IST

यरूशलम, 31 मार्च (एपी) यरूशलम में इजराइल की संसद नेसेट ने सोमवार को एक कानून पारित किया जिसके तहत इजराइलियों की हत्या के दोषी ठहराए गए फलस्तीनियों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है।

इस कदम की अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों ने कड़ी आलोचना करते हुए इसे भेदभावपूर्ण और अमानवीय बताया है।

यह विधेयक लंबे समय से दक्षिणपंथी धड़े द्वारा किए जा रहे प्रयासों का परिणाम माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रवादी अपराधों में दोषी पाए गए फलस्तीनियों के लिए सजा को और कड़ा करना है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू स्वयं संसद में मौजूद रहे और विधेयक के पक्ष में मतदान किया।

नए कानून के तहत वेस्ट बैंक में तथाकथित राष्ट्रवादी हत्याओं के मामलों में दोषी पाए गए फलस्तीनियों के लिए फांसी के जरिए मृत्युदंड ‘अनिवार्य’ सजा होगी। हालांकि, कानून में यह भी प्रावधान है कि समान आरोपों में दोषी पाए गए इज़राइली नागरिकों पर भी मृत्युदंड लागू किया जा सकता है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि व्यवहार में यह प्रावधान मुख्य रूप से फलस्तीनियों पर ही लागू होगा और यहूदी नागरिक इससे बाहर रहेंगे।

यह कानून पूर्व प्रभाव से लागू नहीं होगा, यानी वर्तमान में हिरासत में मौजूद कैदियों—जिनमें 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमलों से जुड़े हमास के लड़ाके भी शामिल हैं—पर इसका असर नहीं पड़ेगा।

कुल 120 सदस्यीय नेसेट में हुए मतदान में 62 सदस्यों ने विधेयक के पक्ष में और 48 ने विरोध में मतदान किया। परिणाम घोषित होने के बाद समर्थक सांसदों ने खुशी जाहिर की, जबकि नेतन्याहू ने तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर, जिन्होंने इस कानून को आगे बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाई, ने फैसले पर खुशी जताई। वहीं, विधेयक की सह-प्रस्तावक और दक्षिणपंथी सांसद लिमोर सोन हार-मेलेच, जिनके पति की वेस्ट बैंक में एक हमले में मौत हुई थी, भावुक नजर आईं।

कानून के 30 दिनों में लागू होने का प्रावधान है, लेकिन इसके खिलाफ कानूनी चुनौतियां सामने आनी तय हैं। ‘एसोसिएशन फॉर सिविल राइट्स इन इजराइल’ ने विधेयक पारित होते ही देश की सर्वोच्च अदालत में इसे चुनौती दी है और इसे “स्वभाव से भेदभावपूर्ण” करार दिया है। संगठन का कहना है कि वेस्ट बैंक के फलस्तीनियों पर कानून लागू करने का अधिकार इज़राइल की संसद को नहीं है।

विशेषज्ञों ने भी इस कानून पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इज़राइल को वेस्ट बैंक जैसे गैर-संप्रभु क्षेत्र में इस प्रकार का कानून बनाने का अधिकार नहीं है। आलोचकों का यह भी कहना है कि यह कदम क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा सकता है।

कुल मिलाकर, इस कानून ने न केवल कानूनी और राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इज़राइल की नीतियों को लेकर नई चिंताएं भी पैदा कर दी हैं।

एपी मनीषा संतोष

संतोष


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