Naxalism Parliament Debate Video: अमित शाह ने संसद में ओवैसी को क्यों दिया ‘धन्यवाद?’.. नक्सल मामले में चर्चा के दौरान इस बात एक लिए जताया आभार, देखें वीडियो

Naxalism Parliament Debate Video: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में 31 मार्च 2026 तक देशभर से माओवाद खत्म करने की जानकारी दी।

Naxalism Parliament Debate Video: अमित शाह ने संसद में ओवैसी को क्यों दिया ‘धन्यवाद?’.. नक्सल मामले में चर्चा के दौरान इस बात एक लिए जताया आभार, देखें वीडियो

Naxalism Parliament Debate Video || Image- Sansad TV File

Modified Date: March 31, 2026 / 02:37 pm IST
Published Date: March 31, 2026 2:37 pm IST
HIGHLIGHTS
  • संसद में माओवाद खात्मे पर चर्चा
  • अमित शाह ने रणनीति और डाटा पेश किया
  • असदुद्दीन ओवैसी का भी जताया आभार

नई दिल्ली: देशभर से नक्सलवाद के खात्मे का आखिरी दिन है। 2024 में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने माओवाद को ख़त्म करने के लिए डेडलाइन दिया था। (Naxalism Parliament Debate Video) उन्होंने दावा किया था कि, राज्यों की पुलसि और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के समन्वय के साथ वे 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़, ओड़िशा, महाराष्ट्र, झारखण्ड, तेलंगाना और एमपी समेत दूसरे वामपंथ उग्रवाद से प्रभावित राज्यों से माओवाद को पूरी तरह ख़त्म कर दिया जाएगा।

चार दशक पुराने माओवाद के डेडलाइन से ठीक एक दिन पहले देश की संसद में इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा हुई। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने खुद संसद में नक्सलवाद के खात्मे की जानकारी सदन के सदस्यों को दी। उन्होंने विस्तार से बताया कि, माओवाद को ख़त्म करने के लिए सरकार ने किस तरह रणनीति तैयार की थी। उन्होंने मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों से जुड़ा पूरा डाटा भी पेश किया। इस बीच अमित शाह ने एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी का भी आभार जताया।

दरअसल अमित शाह माओवादी नेताओं के बारे में जानकारी दे रहे थे तब वह सेंट्रल आर्म्स फ़ोर्स की भी चर्चा कर रहे थे। इस बीच अमित शाह ने बताया कि, सांसद ओवैसी ने तेलंगाना के स्पेशल ग्रेहाउंड्स फ़ोर्स की भी नक्सलवाद के खात्मे में भूमिका बात कही है। इस पर शाह ने कहा कि, ग्रेहाउंड्स फ़ोर्स से भी उन्हें मदद मिली। इस फ़ोर्स ने भी अपने राज्य में माओवादियों से निबटने में बड़ी भूमिका अदा की है जिसके लिए वह ओवैसी का आभार व्यक्त करते है।

क्या है ग्रेहाउंड्स फ़ोर्स?

छत्तीसगढ़ के डीआरजी, महाराष्ट्र के सी-60 और एमपी के हॉक फ़ोर्स की तरह ही तेलंगाना का “ग्रेहाउंड्स फोर्स” एक विशेष कमांडो पुलिस यूनिट है, जिसे मुख्य रूप से नक्सल विरोधी ऑपरेशन्स के लिए स्थापित किया गया है। यह तेलंगाना पुलिस की सबसे प्रशिक्षित और एलीट टीम मानी जाती है, जिसकी शुरुआत 1980 के दशक में संयुक्त आंध्र प्रदेश में हुई थी। (Naxalism Parliament Debate Video) इसका मुख्य उद्देश्य जंगल और दुर्गम इलाकों में छिपे उग्रवादियों का सामना करना और उनके खिलाफ सटीक, तेज़ कार्रवाई करना है। ग्रेहाउंड्स फोर्स नक्सल और माओवादी गतिविधियों पर कार्रवाई करने, जंगलों में खोज अभियान चलाने, खुफिया जानकारी के आधार पर हमले करने और बंधक बचाव जैसे संवेदनशील ऑपरेशन्स में सक्रिय रहती है।

इस यूनिट की सबसे बड़ी खासियत है कि इसके कमांडो को जंगल वारफेयर की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है, जिससे वे छोटी टीमों में तेजी से और गुप्त तरीके से ऑपरेशन कर पाते हैं। इन्हें देश की सबसे प्रभावी एंटी-इंसर्जेंसी फोर्सेज़ में गिना जाता है। ग्रेहाउंड्स फोर्स ने कई सफल अभियानों में नक्सल नेताओं को पकड़ने या समाप्त करने में अहम भूमिका निभाई है और यह कठिन परिस्थितियों में काम करने की अपनी क्षमता के लिए भी जानी जाती है।

4 नक्सलियों ने सौंपे घातक हथियार

आज 31 मार्च है और वादे के मुताबिक़ माओवाद का आखिर दिन है। अपने इस अंतिम दिनों में माओवाद की कमर टूट चुकी है। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश पहले ही नक्सल मुक्त हो चुके है। बात छत्तीसगढ़ की ही करें तो यहाँ नक्सलियों की टॉप लीडरशिप को पूरी तरह से ख़त्म किया जा चुका है, जबकि कई नेताओं ने हथियार भी डाल दिए है। इस बीच कांकेर जिले से खबर आई है कि, दो माओवादियों ने हथियार समेत पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है। वे अपने साथ दो एके-47 हथियार लेकर पहुंचे थे। दोनों ने एसपी निखिल राखेचा को अपने हथियार सौंपे और समाज की मुख्यधारा में शामिल हुए।

बात करें सुकमा जिले के तो यहां भी दो नक्सलियों ने 6 ऑटोमैटिक हथियारो के साथ आत्मसमर्पण किया है। (Naxalism Parliament Debate Video) वे अपने साथ दो AK47, LMG तीन 303 हथियार पहुंचे थे। नक्सलियों के निशानदेही पर पुलिस ने 10 लाख रुपये डम्प कैश भी कर लिया है। इसकी पुष्टि खुद जिले के एसपी किरण चव्हाण ने की है।

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