इजराइल के नए कानून से फलस्तीनियों के लिए मौत की सजा ‘अनिवार्य’ बनने की आशंका

इजराइल के नए कानून से फलस्तीनियों के लिए मौत की सजा ‘अनिवार्य’ बनने की आशंका

इजराइल के नए कानून से फलस्तीनियों के लिए मौत की सजा ‘अनिवार्य’ बनने की आशंका
Modified Date: March 31, 2026 / 12:36 pm IST
Published Date: March 31, 2026 12:36 pm IST

( शैनोन बॉश, एडिथ कोवान यूनिवर्सिटी )

पर्थ, 31 मार्च (द कन्वरसेशन) इजराइल की संसद ‘नेसेट’ ने इस सप्ताह एक कानून पारित किया है, जिससे इजराइल और कब्जे वाले फलस्तीनी क्षेत्रों में मृत्युदंड दिए जाने का दायरा व्यापक रूप से बढ़ने की आशंका है।

इजराइल के दंड विधान में संशोधन के माध्यम से किए गए इन बदलावों के तहत उचित अपील, क्षमा या पर्याप्त न्यायिक विचार-विमर्श के बिना फांसी दी जा सकेगी।

मीडिया में आईं खबरों में कहा गया है कि 120 सदस्यीय नेसेट में इस विधेयक के पक्ष में 62 और विरोध में 48 वोट पड़े, जबकि बाकी सदस्यों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया या अनुपस्थित रहे। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इसके पक्ष में मतदान किया।

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने चेतावनी दी है कि इजराइल के नए मृत्युदंड नियम संभवत: पूरी तरह से फलस्तीनियों पर लागू होंगे। उनके अनुसार इससे पहले से ही मौजूद भेदभाव और बढ़ेगा, जिसे अंतरराष्ट्रीय न्यायालय नस्लभेद के समान करार दे चुका है।

संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने विधेयक के बारे में कहा कि चूंकि इजराइली सैन्य अदालतों में नागरिकों के खिलाफ मुकदमे आम तौर पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून और मानवीय कानून के तहत उचित न्यायिक मानकों पर खरे नहीं उतरते, इसलिए किसी भी मृत्युदंड से जीवन के अधिकार का उल्लंघन होगा।

इसके अलावा, उचित सुनवाई का मौका न देना भी युद्ध अपराध के दायरे में आता है।

यह बदलाव इजराइल के लिए बहुत बड़ा है, क्योंकि पिछले 60 वर्ष में किसी को मृत्युदंड नहीं दिया गया था। यह दशकों से चले आ रहे वैश्विक मृत्युदंड उन्मूलन दृष्टिकोण के विपरीत है और कब्जे वाले क्षेत्रों में फांसी को सामान्य बनाने जैसा है।

ये बदलाव राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन-ग्वीर और उनकी दक्षिणपंथी ओत्ज़्मा येहुडित पार्टी द्वारा पेश विधेयक के माध्यम से किए गए।

दंड संशोधन विधेयक (आतंकवादियों के लिए मृत्युदंड) के तहत इजराइली नागरिक कानून (इजराइलियों पर लागू) और सैन्य कानून (फलस्तीनियों पर लागू) दोनों में बदलाव किया गया है।

विधेयक के अनुसार, कब्जे वाले वेस्ट बैंक में आतंकवाद के लिए सैन्य अदालतों में दोषी पाए गए फलस्तीनी को अनिवार्य रूप से मृत्युदंड दिया जाएगा। यदि अदालत “विशेष कारण” पाए, तभी सजा को आजीवन कारावास में बदला जा सकता है।

इस बदलाव के तहत: 1. अभियोजकों को मृत्युदंड की सिफ़ारिश करने की आवश्यकता नहीं होगी।

2. रक्षा मंत्री तीन सैन्य अधिकारियों के न्यायिक आयोग को राय दे सकते हैं, जिसके तहत साधारण बहुमत से मृत्युदंड की सजा सुनाई जा सकती है।

3. न्यायाधीशों को मृत्युदंड की बजाय आजीवन कारावास की सजा देने के लिए विशेष कारण दर्ज कराना अनिवार्य होगा।

4. अपील के रास्ते बहुत सीमित होंगे।

5. क्षमा की कोई संभावना नहीं होगी।

6. मृत्युदंड पाने वाले लोग जेलों में अलग-थलग जगह रखे जाएंगे, जहां आगंतुकों की पहुंच सीमित होगी और कानूनी परामर्श केवल वीडियो लिंक के माध्यम से मिलेगा।

अंतिम निर्णय के बाद 90 दिन में फांसी दे दी जाएगी।

एक अन्य विधेयक अभी पारित नहीं हुआ है, जो जल्द ही नेसेट में पेश किया जा सकता है। ‘प्रोजिक्यूशन ऑफ पार्टिसिपेंट इन अक्टूबर 7 मैसेकर इवेंट्स बिल’ नामक इस विधेयक के कानून बनने पर मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के मामलों में और वृद्धि होने की आशंका है।

इसके तहत अस्थायी न्यायाधिकरण स्थापित किए जाएंगे। न्यायाधिकरण सात अक्टूबर 2023 को दक्षिण इजराइल में हमास के नेतृत्व में हुए हमलों में भाग लेने वाले आरोपियों के खिलाफ अभियोजन की सुनवाई करेंगे।

इन न्यायाधिकरण में: 1. एक सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश और न्यायाधीश के रूप में कार्य करने के योग्य दो अधिकारी होंगे।

2. न्यायाधिकरण के पास सबूत और प्रक्रिया के सामान्य नियमों से अलग रुख अपनाने का अधिकार होगा।

3. अभियोजकों की सिफ़ारिश के बिना साधारण बहुमत से मृत्युदंड सुनाया जा सकता है

4. अपील और क्षमा की प्रक्रिया फिर से अत्यधिक सीमित होगी।

इन दोनों कानूनों से इजराइल में मृत्युदंड के मामले काफी बढ़ सकती है। इनके तहत कई प्रक्रिया संबंधी सुरक्षा उपायों को भी हटाया जा सकता है।

समर्थकों का तर्क कि मृत्युदंड की वजह से भविष्य में हमले रुक सकते हैं। दूसरी ओर इजराइल की खुफिया सेवाएं अतीत में मृत्युदंड का विरोध करती रही हैं। उनका तर्क रहा है कि इससे सशस्त्र समूह इजराइलियों को बंधक बनाने के लिए प्रोत्साहित हो सकते हैं।

(द कन्वरसेशन )

मनीषा जोहेब

जोहेब


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