जयराम रमेश ने स्वेज सकंट के समय कृष्ण मेनन के कूटनीतिक प्रयास को याद किया

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जयराम रमेश ने स्वेज सकंट के समय कृष्ण मेनन के कूटनीतिक प्रयास को याद किया

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  • Publish Date - March 17, 2026 / 12:29 PM IST,
    Updated On - March 17, 2026 / 12:29 PM IST

नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पश्चिम एशिया एशिया में होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बीच मंगलवार को 1956 के स्वेज संकट का उल्लेख किया और कहा कि संयुक्त राष्ट्र में उस वक्त के भारतीय प्रतिनिधि वीके कृष्ण मेनन ने इस मामले के समाधान के लिए किए गए कूटनीतिक प्रयास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

वर्ष 1956 में पहले इजराइल तथा बाद में ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा मिस्र पर किया गया आक्रमण स्वेज संकट के नाम से जाना जाता है। यह आक्रमण स्वेज नहर पर पश्चिमी देशों का नियंत्रण पुनः स्थापित करने तथा मिस्र के तत्कालीन राष्ट्रपति जमाल अब्देल नासिर को सत्ता से हटाने के उद्देश्य से किया गया था।

रमेश ने यह भी याद दिलाया कि नवंबर 1956 की शुरुआत में मिस्र पर आक्रमण रुकने के बाद, मिस्र-इजराइल सीमा पर सिनाई और गाजा के साथ एक संयुक्त राष्ट्र आपातकालीन बल तैनात किया गया था जिसमें भारत सहित 10 देशों के सैनिक शामिल थे।

रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘दुनिया होर्मुज जलडमरूमध्य संकट से जूझ रही है। 70 साल पहले, देश उस समस्या से जूझ रहा था जिसे स्वेज संकट के नाम से जाना जाता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘26 जुलाई 1956 को मिस्र के तत्कालीन राष्ट्रपति नासिर ने स्वेज नहर का राष्ट्रीयकरण कर दिया। इससे पश्चिमी देशों में भारी हंगामा मच गया और युद्ध के बादल मंडराने लगे। संकट को सुलझाने के कूटनीतिक प्रयास के केंद्र में जो व्यक्ति था वह कोई और नहीं बल्कि वीके कृष्ण मेनन थे। वह सराहनीय रूप से सफल हुए लेकिन केवल कुछ समय के लिए।’’

उन्होंने बताया कि 29 अक्टूबर 1956 को ब्रिटेन, फ्रांस और इजराइल ने मिस्र पर आक्रमण शुरू किया, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहावर के हस्तक्षेप के बाद उन्हें कुछ ही दिनों में अपमानजनक तरीके से इस अभियान को रद्द करना पड़ा।

रमेश ने कहा, ‘‘विडंबना यह है कि यह (ड्वाइट आइजनहावर) वही व्यक्ति था जिसने तीन साल पहले ईरान के लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रधानमंत्री मुहम्मद मुसद्दिक को उखाड़ फेंकने के लिए अमेरिका-ब्रिटेन के संयुक्त अभियान को मंजूरी दी थी, जिन्होंने वहां तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण किया था।’’

कांग्रेस नेता ने कहा कि नवंबर 1956 की शुरुआत में मिस्र पर आक्रमण रोके जाने के बाद, मिस्र-इजराइल सीमा पर सिनाई और गाजा पर संयुक्त राष्ट्र आपातकालीन बल तैनात किया गया था।

रमेश ने कहा, ‘‘10 देशों (भारत सहित) से गठित यह बल जून 1967 की शुरुआत तक सक्रिय रहा। दिसंबर 1959 से जनवरी 1964 तक इसके कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पीएस ज्ञानी थे और जनवरी 1966 से जून 1967 तक मेजर जनरल इंदर जीत रिक्ये ने इसका नेतृत्व किया।’’

उन्होंने कहा कि नेहरू ने स्वयं 20 मई 1960 को गाजा पट्टी में भारतीय दल को संबोधित किया था।

रमेश ने एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए कहा, ‘‘संयुक्त राष्ट्र की इस आपातकालीन सेना के हटते ही छह-दिवसीय युद्ध शुरू हो गया।’’ इस तस्वीर में कृष्ण मेनन अपनी व्यस्त कूटनीति के दौरान नासिर, एंटनी ईडन और सेल्विन लॉयड के साथ दिख रहे हैं।

ये तस्वीरें ऐसे समय में सामने आई हैं जब दुनिया होर्मुज जलडमरूमध्य संकट से जूझ रही है।

वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंकाओं के बीच दुनिया के महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य से बहुत कम संख्या में जहाज गुजरे। इसी मार्ग से वैश्विक तेल खपत का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है।

जलडमरूमध्य में और उसके आसपास वाणिज्यिक जहाजों पर ईरानी हमलों ने समुद्री मार्ग से नौवहन को लगभग ठप्प कर दिया है, जिससे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है और वाशिंगटन पर उपभोक्ताओं एवं वैश्विक अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है।

भाषा हक प्रचेता सुरभि

सुरभि