उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों का वाई क्रोमोसोम खत्म हो जाता है: क्या कोई फर्क पड़ता है?

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उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों का वाई क्रोमोसोम खत्म हो जाता है: क्या कोई फर्क पड़ता है?

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  • Publish Date - February 13, 2026 / 06:11 PM IST,
    Updated On - February 13, 2026 / 06:11 PM IST

(जेनी ग्रेव्स, ला ट्रोब यूनिवर्सिटी)

मेलबर्न, 13 फरवरी (द कन्वरसेशन) उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों की कोशिकाओं से वाई क्रोमोसोम खत्म होने लगता है। लेकिन चूंकि वाई क्रोमोसोम में पुरुष की पहचानने तय करने के अलावा कुछ ही जीन होते हैं, इसलिए यह सोचा गया था कि इस कमी से स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

लेकिन पिछले कुछ सालों में इस बात के सबूत मिले हैं कि जब जिन लोगों का वाई क्रोमोसोम खत्म हो जाता है, तो यह कमी पूरे शरीर में गंभीर बीमारियों से जुड़ी होती है, जिससे उम्र भी कम हो जाती है।

बुज़ुर्ग पुरुषों में वाई का खत्म होना

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वाई क्रोमोसोम जीन का पता लगाने की नई तकनीक से पता चलता है कि बुज़ुर्ग पुरुषों के उत्तकों में वाई का अक्सर नुकसान होता है। उम्र के साथ यह बढ़ोतरी साफ है: 60 साल के 40 फीसदी पुरुषों में वाई क्रोमोसोम का नुकसान होता है, लेकिन 90 साल के 57 फीसदी लोगों में ऐसा होता है।

धूम्रपान और कार्सिनोजेन्स के संपर्क में आने जैसे पर्यावरणीय तत्व भी इसमें भूमिका निभाते हैं। वाई सिर्फ़ कुछ कोशिकाओं में ही खत्म होता है और उनके बाद उनके वंशजों को यह कभी वापस नहीं मिलता। इससे शरीर में वाई वाली और बिना वाई वाली कोशिकाओं का एक संयोजन बन जाता है। वाई रहित कोशिकाएं सामान्य कोशिकाओं के मुकाबले तेज़ी से बढ़ती हैं, जिससे पता चलता है कि शरीर में उनका फ़ायदा हो सकता है।

वाई के खत्म होने से क्या फ़र्क पड़ना चाहिए?

इंसान का वाई एक अजीब सा छोटा क्रोमोसोम है, जिसमें सिर्फ़ 51 प्रोटीन-कोडिंग जीन होते हैं (कई कॉपी को छोड़कर), जबकि दूसरे क्रोमोसोम पर हज़ारों होते हैं। यह सेक्स तय करने और शुक्राणुओं के काम में ज़रूरी भूमिका निभाता है, लेकिन इसके बारे में यह नहीं सोचा गया था कि यह और कुछ भी करता है।

जब प्रयोगशाला में कोशिका को कल्चर किया जाता है तो वाई क्रोमोसोम अक्सर खत्म हो जाता है।

वाई के कम होने का स्वास्थ्य समस्या से संबंधः

शरीर की ज़्यादातर कोशिका के लिए इसके बेकार होने के बावजूद, इस बात के सबूत जमा हो रहे हैं कि वाई का कम होना गंभीर स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ा है, जिसमें हृदय और न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियां और कैंसर शामिल हैं।

किडनी सेल्स में वाई फ्रीक्वेंसी का कम होना किडनी की बीमारी से जुड़ा है।

अब कई अध्ययन वाई के कम होने और दिल की बीमारी के बीच संबंध दिखाती हैं। उदाहरण के लिए, एक बहुत बड़े जर्मन शोध में पाया गया कि 60 साल से ज़्यादा उम्र के जिन पुरुषों में वाई ज्यादा तेजी से कम हो रहा था उन्हें दिल के दौरे का खतरा ज़्यादा था।

वाई का कम होना कोविड से होने वाली मौत से भी जुड़ा है, जो मौत की दर में लैंगिक अंतर को समझा सकता है। अल्ज़ाइमर बीमारी के मरीज़ों में वाई के कम होने की दर दस गुना ज़्यादा पाई गई है। कई शोध में पुरुषों में वाई की कमी और अलग-अलग कैंसर के बीच संबंध पाए गए हैं। यह उन लोगों के लिए खराब नतीजों से भी जुड़ा है जिन्हें कैंसर है। दूसरी क्रोमोसोम गड़बड़ियों के साथ-साथ, कैंसर कोशिका में भी वाई की कमी आम है।

वाई के नुकसान के क्लिनिकल असर बताते हैं कि वाई क्रोमोसोम के शरीर की कोशिकाओं में ज़रूरी काम होते हैं। लेकिन दिमाग में इसकी सक्रियता का एकमात्र असर पार्किंसंस होने में शामिल होना है।

द कन्वरसेशन नरेश पवनेश

पवनेश