मिर्जा फखरुल इस्लाम: वामपंथी छात्र राजनीति से बांग्लादेश के राष्ट्रपति पद तक का सफर

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मिर्जा फखरुल इस्लाम: वामपंथी छात्र राजनीति से बांग्लादेश के राष्ट्रपति पद तक का सफर

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  • Publish Date - August 20, 2026 / 07:51 PM IST,
    Updated On - August 20, 2026 / 07:51 PM IST

ढाका, 20 अगस्त (भाषा) बांग्लादेश की संसद ने बृहस्पतिवार को बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के लंबे समय से महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को देश का नया राष्ट्रपति चुना। इसके साथ ही 1960 के दशक के अंत में एक वामपंथी छात्र कार्यकर्ता के रूप में राजनीति में कदम रखने वाले दिग्गज नेता को देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन किया गया है।

राष्ट्रपति चुने जाने से पहले 78 वर्षीय नेता प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व में स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्री के रूप में कार्य कर रहे थे। इसके साथ ही वह मध्य-दक्षिणपंथी विचार वाली बीएनपी के महासचिव की जिम्मेदारी भी निभा रहे थे।

ढाका विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान आलमगीर वामपंथी संगठन ‘ईस्ट पाकिस्तान स्टूडेंट्स यूनियन’ में शामिल हुए थे। वह 1969 में तत्कालीन पाकिस्तानी सैन्य समर्थित सरकार के खिलाफ हुए जन आंदोलन के दौरान ढाका विश्वविद्यालय में पार्टी की इकाई के अध्यक्ष बने। इसके बाद 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान उन्होंने भारत में शरण ली और वामपंथी स्वतंत्रता सेनानियों को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बीएनपी की स्थापना बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के सात साल बाद हुई थी।

मुख्यधारा की राजनीति में आने से पहले आलमगीर सरकारी सेवा में थे। वह 1972 में सिविल सेवा के शिक्षा कैडर में शामिल होकर अर्थशास्त्र के शिक्षक बने। राजनीति में आने के लिए उन्होंने 1986 में नौकरी छोड़ दी और दो साल बाद अपने गृहनगर ठाकुरगांव से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नगर पालिका अध्यक्ष चुने गए।

मुस्लिम लीग के नेता और पूर्वी पाकिस्तान प्रांतीय विधानसभा के पूर्व सदस्य मिर्जा रूहुल अमीन के बेटे आलमगीर 1990 के दशक की शुरुआत में बीएनपी में शामिल हुए थे।

वह 2001 में पहली बार संसद सदस्य बने और कृषि राज्य मंत्री तथा नागरिक उड्डयन एवं पर्यटन राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। वह फरवरी 2026 के आम चुनाव में ठाकुरगांव-1 सीट से फिर से चुने गए।

भाषा सुमित नरेश वैभव

वैभव