इस्केदेंरुन (तुर्किये), 10 फरवरी (एपी) तुर्किये में आए तीव्र भूकंप के 100 घंटों से भी अधिक समय के बाद बचाव और राहत कर्मियों ने उस समय राहत की सांस ली जब उन्होंने मलबे में कुछ लोगों को जिंदा निकालने में सफलता हासिल की जिनमें छह रिश्तेदार भी शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि क्रमश: 7.8 और 7.5 तीव्रता के आए भूकंप के दो बड़े झटकों से तुर्किये और सीरिया में भारी तबाही आई है और 20 हजार से भी अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
तुर्किये के इस्केंदेरुन में बचावक्रमियों ने मलबे के नीचे 101 घंटे तक दबे रहे छह लोगों को शुक्रवार सुबह जिंदा निकाल लिया।एक खोज और बचावकर्मी मूरत बेगुल ने बताया कि इन छह लोगों को ध्वस्त इमारत के भीतर बची एक छोटी सी जगह में एक साथ रहने से जीवित बच पाने में मदद मिली। सभी छह लोग रिश्तेदार हैं।
इस भूकंप से मरने वाले लोगों की तादाद जापान के फुकुशिमा में आए भूकंप और सुनामी से होने वाली मौतों की संख्या से भी अधिक हो गई है और मलबों से शवों का निकलने का सिलसिला जारी है जिससे हताहतों की संख्या और बढ़ने की आशंका हैं
भूकंप के चार दिनों के बाद भूकंप के केंद्र रहे गैजियांतेप स्थित एक मकान की इमारत से बचाव कर्मियों ने 17 वर्षीय अदनान मुहम्मद कोरकुत को जिंदा निकाला। वह, 94 घंटे से मलबे में दबा था और अपना ही पेशाब पीकर जिंदा रहा। कोरकुत ने कहा, ‘‘ईश्वर का शुक्र है कि आप (बचावकर्मी) आए।’’ उसकी मां और अन्य ने उसे झुक कर तब चूमा जब कोरकुत को एंबुलेंस में ले जाया जा रहा था।
इस बीच, अदियामान में बचावकर्मियों ने भूकंप में दबे रहने के करीब 105 घंटे बाद चार साल के योगिज कोमसु नामक बच्चे को जिंदा निकाला। बचाव कार्य का सजीव प्रसारण करने वाले हाबेर तुर्क के मुताबिक बच्चे को निकालने के बाद उसकी मां को मलबे से निकाले की कोशिश शुरू कर दी गई है। बचाव कर्मियों ने बच्चे को बाहर निकालने के बाद भीड़ से खुशी में शोर नहीं मचाने को कहा क्योंकि बच्चा सहमा हुआ था।
हबेरतुर्क टेलीविजन चैनल ने बताया कि इस्केंदरुन शहर की एक बहुमंजिला इमारत के मलबे में फंसे नौ लोगों की पहचान की गई है जिनमें से एक महिला सहित छह लोगों को निकाल लिया गया है।
उन्होंने बताया कि इमारत भूमध्य सागर से महज 200 मीटर दूर थी और भूकंप के बाद उठी ऊंची लहरों से आई बाढ़ से बाल-बाल बची थी।
मलबे से जिंदा निकाले जाने की और घटनाएं भी सामने आई हैं। जर्मन बचाव टीम ने बताया कि उसने किरिखान स्थित एक मकान से करीब 50 घंटे के बाद मलबे से एक महिला को जिंदा निकालने में सफलता हासिल की है। भूकंप से सबसे अधिक प्रभावित कहरामंमरास में दो किशोरी बहनों को बचाया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि मलबे में व्यक्ति एक सप्ताह या इससे अधिक समय तक जिंदा रह सकता है लेकिन कड़ाके की पड़ रही ठंड की वजह से संभावनाए क्षीण होती जा रही हैं।
गौरतलब है कि इलाके में कड़ाके की सर्दी पड़ रही है और शवों को रखने व उनकी पहचान करने के लिए अस्थायी मुर्दाघर बनाए गए हैं। कई इलाकों में अब भी लोग तंबू व भोजन के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
इस बीच, भूकंप आने के बाद पहली बार सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद शुक्रवार को सार्वजनिक रूप से दिखे। उन्होंने अपनी पत्नी आसमा के साथ अलेप्पो यूनिवर्सिटी अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने भूकंप प्रभावित इलाकों में बचावकर्मियों से भी मुलाकात की।
तुर्किये के आपदा प्रबंधन एजेंसी ने अबतक भूकंप से 18,300 लोगों की मौत और करीब 75 हजार लोगों के घायल होने की पुष्टि कर दी है। सरकार ने अबतक बेघर हुए लोगों की संख्या नहीं बताई है। वहीं, सीरिया में 3,300 लोगों के भूकंप से मारे जाने की पुष्टि की गई है जिन्हें मिलाकर अबतक भूकंप में कुल 21,600 लोगों की मौत हो चुकी है।
वहीं, वर्ष 2011 में जापान के फुकिशिमा में आए भूकंप और सुनामी में जान गंवाने वालों की संख्या 18,400 थी।
तुर्किये के पर्यावरण और शहरी योजना मंत्री मुरत कुरम के मुताबिक देश में में करीब 12 हजार इमारतें या तो ध्वस्त हो गई हैं या गंभीर रूप से क्षतिग्रसत हैं।
एपी धीरज संतोष
संतोष