पीओके में ‘ब्रॉड पीक’ पर हिमस्खलन में पर्वतारोही पुर्जा और नौ अन्य पर्वतारोहियों की मौत
पीओके में ‘ब्रॉड पीक’ पर हिमस्खलन में पर्वतारोही पुर्जा और नौ अन्य पर्वतारोहियों की मौत
(एम. जुल्करनैन/ शिरीष बी. प्रधान)
काठमांडू/लाहौर, एक अगस्त (भाषा) दिग्गज नेपाली-ब्रिटिश पर्वतारोही निर्मल पुर्जा समेत 10 पर्वतारोहियों की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के गिलगित-बाल्टिस्तान में स्थित ‘ब्रॉड पीक’ पर हुए हिमस्खलन में मौत हो गई। पुर्जा की अभियान कंपनी ने शनिवार को यह जानकारी दी।
पुर्जा (43) के अलावा पांच नेपाली और पाकिस्तान, ओमान, अमेरिका और चीन के एक पर्वतारोही समेत कुल 10 पर्वतारोही बृहस्पतिवार को लगभग 7,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ब्रॉड पीक पर आए हिमस्खलन की चपेट में आ गए थे। ब्रॉड पीक काराकोरम पर्वत श्रृंखला में के2 के पास स्थित है।
पुर्जा की मौत की पुष्टि शनिवार को उनकी अभियान कंपनी ‘एलीट एक्सपेड’ द्वारा जारी बयान में की गई। कंपनी ने कहा कि अभियान का कोई भी सदस्य हिमस्खलन से जीवित नहीं बचा।
‘एलीड एक्सपेड’ ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा, “बहुत दुख और गहरे सदमे के साथ हम पुष्टि करते हैं कि निर्मल ‘निम्सदाई’ पुर्जा की ब्रॉड पीक पर हुए हिमस्खलन के बाद मौत हो गई।”
बयान में कहा गया है, “हमें यह भी बताया गया है कि अभियान में शामिल अन्य सदस्य भी जीवित नहीं बच सके।”
कंपनी ने कहा, “आज हम केवल निम्स को ही नहीं, बल्कि इस त्रासदी में जान गंवाने वाले हर व्यक्ति को याद कर रहे हैं, जिनमें उनके साथी पर्वतारोही और गाइड पुर बहादुर गुरूंग (युक्ता) और निमा शेरपा भी शामिल हैं।”
कंपनी ने कहा, “दुनिया ने पर्वतारोहण के सबसे महान पर्वतारोहियों में से एक को खो दिया है; एक ऐसे शख्स को खो दिया है, जिन्होंने अपने साहस, विनम्रता और इस अटूट विश्वास से लाखों लोगों को प्रेरित किया कि मनुष्य की क्षमता हमारी सोच से कहीं अधिक है।”
पाकिस्तान के अल्पाइन क्लब (एसीपी) के अध्यक्ष मेजर जनरल इरफान अरशद के अनुसार, शुक्रवार को 10 शवों में से चार बरामद किए गए थे, जिनमें से तीन की पहचान ओमान की नधीरा अहमद अब्दुल्ला अल हरथी, नेपाल के पुर बहादुर गुरूंग और अमेरिका की मैलोरी गीस के रूप में हुई।
उन्होंने बताया कि शवों को स्कर्दू ले जाया गया।
शनिवार को किस्तान सरकार ने कहा कि वह बाकी पर्वतारोहियों के शवों को खोजने के अभियान के पूरा होने तक ‘हर संभव सहायता’ जारी रखेगी।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने एक बयान में कहा, “पाकिस्तान ब्रॉड पीक पर्वतारोहण दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त करता है और नेपाल के लोगों के दुख में उनके साथ खड़ा है।”
सनाउल्लाह ने कहा कि हिमस्खलन के तुरंत बाद पाकिस्तान ने खोज और बचाव अभियान को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि बेहद खराब मौसम और कठिन परिस्थितियों के बावजूद खोज अभियान जारी है।
उन्होंने कहा कि अभियान पूरा होने तक पाकिस्तान हर संभव सहायता देता रहेगा।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने भी पुर्जा और पांच अन्य नेपाली पर्वतारोहियों की मौत पर शोक व्यक्त किया।
उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “निर्मल पुर्जा और अन्य दिवंगत पर्वतारोहियों की केवल शारीरिक यात्राएं समाप्त हुई हैं; उनके साहस, समर्पण और योगदान की विरासत हमेशा जीवित रहेगी और प्रेरणा देती रहेगी। सभी दिवंगत पर्वतारोहियों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि। शोक संतप्त परिवारों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं।”
ब्रॉड पीक अभियान पुर्जा के शानदार पर्वतारोहण करियर का अंतिम अभियान था। यह दुनिया का 12वां सबसे ऊंचा पर्वत है और इसे चढ़ाई के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण चोटियों में से एक माना जाता है।
साल 2003 में शुरू हुए अपने 16 साल के सैन्य करियर में उन्होंने छह साल गोरखा और 10 साल ब्रिटेन की स्पेशल फोर्सेज में सेवा दी। साल 2018 में पुर्जा को ‘मेंबर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर’ (एमबीई) से सम्मानित किया गया था।
उन्हें 2018 में मेंबर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर (एमबीई) के सम्मान से नवाजा गया था।
पुर्जा ने वर्ष 2019 में दुनिया की 8,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली सभी 14 चोटियों को केवल 6 महीने और 6 दिन में फतह कर नया रिकॉर्ड बनाया था। ब्रॉड पीक पर चढ़ाई पूरी करने के बाद वह आठ हजार मीटर की सभी 14 चोटियों पर दो बार चढ़ने का अपना मिशन पूरा करने वाले थे।
एसीपी के अनुसार, बृहस्पतिवार सुबह करीब नौ बजे पर्वत पर लगभग 7,000 मीटर की ऊंचाई पर हिमस्खलन हुआ, जिसने शिखर पर पहुंचने की कोशिश कर रहे 10 सदस्यीय पर्वतारोहण दल को अपनी चपेट में ले लिया।
क्षेत्र में खराब मौसम के कारण शुक्रवार देर रात बचाव अभियान रोक दिया गया था, जो शनिवार को फिर शुरू हुआ।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, प्रसिद्ध पर्वतारोही सरबाज खान के नेतृत्व में तीन सदस्यीय नागरिक बचाव दल खोज अभियान में शामिल था। इस अभियान में पाकिस्तान सेना के हेलीकॉप्टरों ने भी सहायता की।
भाषा
जोहेब देवेंद्र
देवेंद्र

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