नासा ने आर्टेमिस-तृतीय मिशन के चालक दल की घोषणा की, चंद्र अभियान से पहले तकनीक का होगा परीक्षण

नासा ने आर्टेमिस-तृतीय मिशन के चालक दल की घोषणा की, चंद्र अभियान से पहले तकनीक का होगा परीक्षण

नासा ने आर्टेमिस-तृतीय मिशन के चालक दल की घोषणा की, चंद्र अभियान से पहले तकनीक का होगा परीक्षण
Modified Date: June 19, 2026 / 04:34 pm IST
Published Date: June 19, 2026 4:34 pm IST

( मार्गरेट लैंडिस, एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी )

एरिजोना, 19 जून (द कन्वरसेशन) अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपने महत्वाकांक्षी आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत आर्टेमिस-तृतीय मिशन के चालक दल की घोषणा कर दी है। हालांकि यह मिशन अब अपने मूल उद्देश्य से काफी अलग जा चुका है।

प्रारंभिक योजना के अनुसार आर्टेमिस-तृतीय के तहत मनुष्यों को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारा जाना था, लेकिन कार्यक्रम में हुए बदलावों के बाद अब यह मिशन मुख्य रूप से उन तकनीकों, उपकरणों और प्रणालियों का परीक्षण करेगा, जिनका उपयोग भविष्य में चंद्रमा पर उतरने के अभियानों में किया जाएगा।

नासा ने जून 2026 में घोषित चालक दल में अपने तृतीय अंतरिक्ष यात्रियों आंद्रे डगलस, रैंडी ब्रेसनिक और फ्रैंक रुबियो के साथ यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के अंतरिक्ष यात्री लुका परमितानो को शामिल किया है। यह दल पृथ्वी की कक्षा में उड़ान भरकर उन महत्वपूर्ण प्रणालियों का परीक्षण करेगा जो बाद में चंद्रमा पर मानव अवतरण के लिए इस्तेमाल की जाएंगी।

आर्टेमिस कार्यक्रम में यह बदलाव फरवरी 2026 में किया गया था, जब नासा ने आर्टेमिस-द्वितीय और पहले आर्टेमिस चंद्र मिशन के बीच एक अतिरिक्त मिशन जोड़ने की घोषणा की। उस समय एजेंसी ने कहा था कि चंद्रमा पर मानव को भेजने से पहले कुछ महत्वपूर्ण तकनीकों का अंतरिक्ष में परीक्षण आवश्यक है ताकि मिशन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके बाद मई 2026 में नासा ने आर्टेमिस-तृतीय के नए उद्देश्य तय किए।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव मुख्य रूप से सुरक्षा कारणों से किया गया। नासा भविष्य के चंद्र मिशनों में इस्तेमाल होने वाले यानों, प्रणालियों और लैंडर के बीच समन्वय की विश्वसनीयता को लेकर अतिरिक्त आश्वस्त होना चाहता है। अंतरिक्ष अभियानों में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है और छोटी-सी तकनीकी विफलता भी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।

आर्टेमिस-तृतीय के 2027 के अंत से पहले प्रक्षेपित होने की संभावना नहीं है। इसके मिशन को 2028 में चंद्रमा पर मानव उतारने वाला अभियान माना जा रहा है। इस प्रकार मानवों की चंद्रमा पर वापसी की समयसीमा एक बार फिर आगे खिसक गई है।

आर्टेमिस कार्यक्रम में लगातार बदलाव और देरी ने कई लोगों को भ्रमित भी किया है। जब इस कार्यक्रम की घोषणा की गई थी, तब आर्टेमिस-तृतीय को वर्ष 2024 में चंद्रमा पर उतरने वाला मिशन बताया गया था। लेकिन तकनीकी चुनौतियों और परीक्षणों की आवश्यकता के कारण कार्यक्रम की समयसीमा कई बार बदली गई।

इन चुनौतियों में सबसे प्रमुख ओरियन अंतरिक्ष यान के हीट शील्ड से जुड़ी समस्या रही है। आर्टेमिस-प्रथम मिशन के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि यान का हीट शील्ड अपेक्षा से अधिक क्षतिग्रस्त हुआ था। हीट शील्ड किसी भी अंतरिक्ष यान का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा होता है क्योंकि पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश के समय तापमान हजारों डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। यह ढाल अंतरिक्ष यात्रियों और यान को अत्यधिक गर्मी से सुरक्षित रखती है।

नासा के अनुसार, आर्टेमिस-द्वितीय मिशन में हीट शील्ड का प्रदर्शन बेहतर रहा है, लेकिन एजेंसी अभी भी अंतिम विश्लेषण कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि चंद्रमा पर मानव भेजने से पहले अतिरिक्त परीक्षण आवश्यक हैं।

आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत नासा ने चंद्रमा पर उतरने वाले लैंडर विकसित करने के लिए स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन को अनुबंध दिए हैं। हालांकि अभी तक इन दोनों कंपनियों के किसी भी लैंडर ने चंद्रमा पर सफल मानवयुक्त या मानव रहित अवतरण नहीं किया है। इसलिए आर्टेमिस-तृतीय मिशन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य ओरियन क्रू कैप्सूल और संभावित लैंडर प्रणालियों के बीच समन्वय तथा तकनीकी इंटरफेस का परीक्षण भी होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरिक्ष में किसी प्रणाली की सुरक्षा और विश्वसनीयता का सबसे बड़ा प्रमाण उसका वास्तविक संचालन होता है। इसी कारण नासा जल्दबाजी के बजाय चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ना चाहता है।

हालांकि चालक दल की घोषणा के साथ एक नया विवाद भी सामने आया है। आर्टेमिस कार्यक्रम की शुरुआत 2019 में इस वादे के साथ हुई थी कि यह चंद्रमा पर ‘‘अगले पुरुष और पहली महिला’’ को उतारेगा। कार्यक्रम के प्रचार और आधिकारिक संदेशों में महिलाओं की भागीदारी को विशेष रूप से रेखांकित किया गया था।

लेकिन आर्टेमिस-तृतीय के लिए घोषित चार सदस्यीय दल पूरी तरह पुरुषों का होने के कारण सोशल मीडिया पर आलोचना शुरू हो गई। कई लोगों ने सवाल उठाया कि यदि कार्यक्रम का एक प्रमुख लक्ष्य पहली महिला को चंद्रमा तक पहुंचाना था, तो चालक दल में किसी महिला को क्यों शामिल नहीं किया गया।

विवाद बढ़ने के बाद नासा प्रशासक जारेड आइज़ैकमैन ने कहा कि चालक दल का चयन मिशन की आवश्यकताओं, अनुभव, प्रशिक्षण और तकनीकी योग्यता के आधार पर किया गया है तथा इस प्रक्रिया में किसी राजनीतिक नियुक्त व्यक्ति ने हस्तक्षेप नहीं किया।

विश्लेषकों का कहना है कि अंतरिक्ष यात्रियों का चयन कभी पूरी तरह यादृच्छिक नहीं होता। इसमें उड़ान अनुभव, तकनीकी विशेषज्ञता, मिशन की जरूरतें और दल के सदस्यों के बीच कार्य समन्वय जैसे कई कारकों को ध्यान में रखा जाता है। इसके बावजूद प्रतिनिधित्व और विविधता का प्रश्न सार्वजनिक चर्चा का विषय बना हुआ है।

लेख में यह भी उल्लेख किया गया है कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी अभी भी पुरुषों की तुलना में कम है। यही स्थिति विमानन और अंतरिक्ष कार्यक्रमों में भी लंबे समय तक देखने को मिली है। इतिहास में अमेरिकी अंतरिक्ष कार्यक्रमों के शुरुआती चरणों में महिलाओं को अवसर नहीं दिए गए थे, हालांकि बाद के दशकों में इसमें उल्लेखनीय सुधार हुआ।

विशेषज्ञों का मानना है कि मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम केवल वैज्ञानिक या तकनीकी परियोजनाएं नहीं होते, बल्कि वे राष्ट्रीय प्रतिष्ठा, सामाजिक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक अपेक्षाओं से भी जुड़े होते हैं। इसी वजह से आर्टेमिस-तृतीय के चालक दल को लेकर हो रही बहस तकनीकी मुद्दों से आगे बढ़कर व्यापक सामाजिक विमर्श का हिस्सा बन गई है।

इसके बावजूद अंतरिक्ष विज्ञान समुदाय का एक बड़ा वर्ग मानता है कि आर्टेमिस कार्यक्रम मनुष्य को दोबारा चंद्रमा तक पहुंचाने और भविष्य में मंगल ग्रह जैसे दूरस्थ लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में सबसे बड़ी प्राथमिकता मिशन की सुरक्षा और सफलता सुनिश्चित करना है, ताकि मनुष्य लगभग छह दशकों बाद फिर से पृथ्वी के इकलौते उपग्रह की सतह पर कदम रख सके।

द कन्वरसेशन मनीषा माधव

माधव


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