नेपाल बाढ़: मृतकों की संख्या बढ़कर 1,356 हुई, करीब 5,000 लोग अब भी लापता

नेपाल बाढ़: मृतकों की संख्या बढ़कर 1,356 हुई, करीब 5,000 लोग अब भी लापता

नेपाल बाढ़: मृतकों की संख्या बढ़कर 1,356 हुई, करीब 5,000 लोग अब भी लापता
Modified Date: September 7, 2026 / 10:11 pm IST
Published Date: September 7, 2026 10:11 pm IST

(शिरिष बी प्रधान)

काठमांडू, सात सितंबर (भाषा) नेपाल में अचानक आयी विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित इलाकों से और शव बरामद किए जाने के बाद सोमवार को मृतकों की संख्या बढ़कर 1,356 हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

राष्ट्रीय विपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं व्यवस्थापन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने बताया कि बचाव दल अब भी 4,994 लोगों की तलाश कर रहे हैं, जिनमें कम से कम 589 विदेशी नागरिक शामिल हैं। अब तक 13,396 लोगों को बचाया जा चुका है।

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को हिमस्खलन के कारण अचानक भोटेकोशी नदी में आयी बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों तथा गांवों में भारी तबाही मचाई है।

चीनी मीडिया की खबरों के मुताबिक इस आपदा से चीन नियंत्रित तिब्बत में भी कम से कम 43 लोगों की मौत हुई है, जबकि 500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं।

एनडीआरआरएमए के अनुसार, चितवन जिले से 363 शव, नवलपरासी पश्चिम से 223, नवलपरासी पूर्व से 221 और नुवाकोट से 197 शव बरामद किए गए हैं।

इसी तरह, रसुवा से 169, गोरखा से 75, धादिंग से 70 और तनहूं से 38 शव बरामद किए गए हैं।

एनडीआरआरएमए के मुताबिक सोमवार तक केवल 98 शवों की पहचान की गई और उन्हें उनके परिवारों को सौंपा गया।

अधिकारियों ने बताया कि मृतकों की पहचान करना एक बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि पानी के साथ बहकर आए कई शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हैं, या फिर उनके केवल कुछ हिस्से ही मिल पाए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में पहचान आसान बनाने के लिए डीएनए नमूने लेने के बाद 1,000 से अधिक अज्ञात शवों को दफनाया गया है।

उन्होंने बताया कि अस्पतालों को शवों की बढ़ती संख्या से निपटने में मुश्किल हो रही है। चिकित्सा केंद्रों पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो रही है जो अपने लापता रिश्तेदारों की तस्वीरें साथ लेकर आते हैं और मृतकों की दीवारों पर लगी तस्वीरों को ध्यान से देखकर अपने परिजनों से मिलान करने की कोशिश करते दिख रहे हैं।

नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने भीषण बाढ़ से प्रभावित नुवाकोट और रसुवा इलाकों का सोमवार को दौरा किया और बचाव एवं राहत कार्यों की समीक्षा की।

राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा के दौरान अधिकारियों ने पौडेल को खोज एवं बचाव अभियान, राहत सामग्री वितरण, अस्थायी शिविरों के प्रबंधन और पुनर्वास कार्यों की जानकारी दी।

पौडेल ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद देश को टेलीविजन के माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे हिमालयी देश और जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहे अन्य देशों के लिए जलवायु न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाएं।

राष्ट्रपति ने नेपाल के सभी राजनीतिक दलों और नागरिकों से भी अपील की कि वे एक-दूसरे पर आरोप लगाने या टकराव में उलझने के बजाय राहत कार्यों के लिए एकजुट हों।

नेपाल ने रसुवा में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के 13वें दिन सोमवार को राष्ट्रीय शोक दिवस मनाया और इस दौरान हाल के वर्षों में देश की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान देश और दुनियाभर में नेपाल के दूतावासों पर लगे राष्ट्रीय ध्वज आधा झुके रहे।

आपदा के 13वें दिन यह शोक दिवस मनाया जा रहा है। हिंदू परंपरा में किसी व्यक्ति की मृत्यु के 13वें दिन को शोक अवधि के महत्वपूर्ण दिन के रूप में माना जाता है। इस दिन मृतकों की आत्मा की शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं और शोक अवधि के औपचारिक समापन का प्रतीक माना जाता है।

सरकार ने विनाशकारी बाढ़ के पीड़ितों के सम्मान में सात सितंबर को राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया है।

नेपाल स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘हमारी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों और प्रभावित लोगों के साथ हैं। भारत इस मुश्किल समय में नेपाल के साथ खड़ा है और खोज, बचाव और राहत कार्यों में नेपाल की कोशिशों का समर्थन करना जारी रखेगा।’’

बाढ़ के बाद से लापता लोगों के कई परिजन सोमवार को काठमांडू के माइतीघर मंडला इलाके में जमा हुए। वे अपने प्रियजनों की तस्वीरें वाली तख्ती लिए हुए थे और सरकार से उन्हें तलाश करने की कोशिशें तेज़ करने की अपील कर रहे थे।

एनडीआरआरएफए के कार्यकारी अध्यक्ष धर्मराज उप्रेती ने कहा कि सरकार ने खोज, बचाव और राहत कार्यों के लिए सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया है जो 24 घंटे काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अधिकतर प्रभावित इलाकों तक राहत सामग्री पहुंच चुकी है, जबकि जिन जगहों तक केवल हेलीकॉप्टर से ही पहुंचा जा सकता है, वहां खाना और दूसरी ज़रूरी चीज़ें पहुंचाने की कोशिशें की जा रही हैं।

एनडीआरआरएमए के अनुसार, सोमवार तक रासुवा, नुवाकोट और धाडिंग में सरकार द्वारा संचालित आश्रय शिविरों में करीब 3,500 लोग रह रहे थे। लेकिन बाढ़ से बेघर हुए कई अन्य लोगों ने जहां भी जगह मिली, वहां शरण ली है जिनमें स्कूल, मंदिर, मठ, खाली कार्यालय की इमारतें, सामुदायिक इमारतें और जंगलों में लगाए गए तंबू शामिल हैं।

बाढ़ प्रभावित जिलों में जल विद्युत परियोजनाओं पर भी बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाए जा रहे हैं और आशंका है कि इन परियोजनों की सुरंगों में करीब 121 लोग फंसे हो सकते हैं।

नेपाली सेना ने सोमवार को कहा कि जब तक कोई सफलता नहीं मिल जाती, तब तक सुरंगों के अंदर खोज और बचाव अभियान जारी रहेंगे, बशर्ते सरकार कोई और निर्देश न दे।

ब्रिगेडियर जनरल सुभाष जंग थापा ने कहा कि बचाव दल सुरंगों के अंदर लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सेना के जवान, रसुवागढ़ी जल विद्युत परियोजनाओं के प्रतिनिधियों के साथ, संभावित जीवित बचे लोगों की तलाश करते हुए क्षतिग्रस्त विद्युत घर और ‘नियंत्रण बिंदु’ तक पहुंच गए हैं।

नेपाली सेना के प्रवक्ता राजा राम बस्नेत ने बताया कि बचाव अभियान को तीन हिस्सों – हवाई, ज़मीनी और सुरंग में तलाशी – में बांटा गया है और सेना दूसरी सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है।

बाढ़ प्रभावित जिलों में स्थित जलविद्युत परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। इन परियोजनाओं की सुरंगों में सैकड़ों लोगों के फंसे होने की आशंका है। इन अभियानों में भारत और चीन के विशेषज्ञों के दल अपने नेपाली समकक्षों की मदद कर रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया के सुरंग विशेषज्ञ और 2023 में भारत की सिल्क्यारा सुरंग से 41 मज़दूरों को बचाने में मदद करने वाले अर्नोल्ड डिक्स चिलीमे जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों की तलाश में भी मदद कर रहे हैं।

इस बीच, पुनर्निर्माण कार्य में भी तेजी लाई जा रहा रही है। अधिकारी धाडिंग में पृथ्वी राजमार्ग के बाढ़ से क्षतिग्रस्त हिस्से को ठीक करने में जुटे हैं, जहां काठमांडू और पश्चिमी नेपाल को जोड़ने वाले मुख्य सड़क मार्ग को फिर से चालू करने के लिए 252 मीटर लंबा एक अस्थायी रास्ता खोला गया है। दूसरी क्षतिग्रस्त सड़कों और अहम पुलों की मरम्मत का काम भी चल रहा है।

इस बीच, पर्यटन पर पड़ने वाले असर को रोकने के लिए विदेशी पर्यटकों को भरोसा दिलाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि देश अब भी पर्यटकों के लिए खुला है और हिमालयी ट्रैकिंग मार्ग आगंतुकों के स्वागत के लिए तैयार हैं।

नेपाल के पर्यटन मंत्री खड़ग राज पौडेल ने सोशल मीडिया पर ‘नेपाल कॉलिंग’ अभियान शुरू किया है। इसके जरिए उन्होंने विदेशी पर्यटकों से नेपाल आने की अपील करते हुए कहा है कि प्राकृतिक आपदा के बावजूद देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर स्थित सामान्य है।

पौडेल ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में कहा, ‘‘नेपाल अब भी खुला है… हमारे हिमालयी ट्रैकिंग मार्ग आपका इंतजार कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस समय छुट्टियां बिताने के लिए आपके नेपाल आने से देश की मदद होगी जो विनाशकारी बाढ़ से जूझ रहा है।’’

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नेपाल के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में पर्यटन क्षेत्र का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष योगदान करीब 6.7 प्रतिशत है और इससे 10 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है।

पर्यटन क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए विदेशी पर्यटकों की संख्या में गिरावट का असर होटल, ट्रैकिंग एजेंसियों, गाइड, पोर्टर, विमानन कंपनियों, रेस्तरां और परिवहन सेवाओं पर पड़ सकता है।

भाषा

धीरज अविनाश

अविनाश


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